देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

राष्ट्रीय

आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य का अधिकार अभियान।

आचार्य मनीष ने कहा, 'हम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक जनहित  याचिका दायर करके आयुर्वेद को उसका सही स्थान प्रदान करने के लिए न्यायिक सक्रियता की भी योजना बना रहे हैं। ' 

हुज़ैफ़ा अबरार
January 11 2021 Updated: January 14 2021 04:41
0 22891
आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य का अधिकार अभियान। आचार्य मनीष एवं अन्य

लखनऊ। प्रख्यात आयुर्वेद विशेषज्ञ आचार्य मनीष ने 'आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य का अधिकार अभियान' नामक एक अनूठी पहल को हरी झंडी दी है। आचार्य मनीष 1997 से आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और आयुर्वेदिक लेबल 'शुद्धि आयुर्वेद ' के संस्थापक भी हैं, जिसका कॉर्पोरेट कार्यालय चंडीगढ़ के पास जीरकपुर में है। आचार्य मनीष ने 'स्वास्थ्य के अधिकार अभियान' की आधिकारिक रूप से घोषणा की।आयुर्वेदिक चिकित्सक- डॉ. गीतिका चौधरी और डॉ. सुयश प्रताप सिंह भी उपस्थित रहे। इस अभियान की टैगलाइन है-'आयुर्वेद को है अब घर-घर पहुंचाना' । आचार्य मनीष ने कहा,'चरक संहिता के अनुसार, आयुर्वेद का उद्देश्य है व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और रोगी के विकारों को जड़ से समाप्त करना। आयुर्वेद का अर्थ ही है आयु को जानने का संपूर्ण विज्ञान। आयुर्वेद  सिर्फ एक चिकित्सा  पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। आचार्य मनीष का मानना है कि आयुर्वेद हर एक भारतीय के 'स्वास्थ्य के अधिकार ' के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। हमने कोविड युग को इस अभियान की शुरुआत के लिए इसलिए चुना, क्योंकि कोविड के खिलाफ प्रभावकारिता के कारण आयुर्वेद इस अभूतपूर्व महामारी के दौरान प्रमुखता से सामने आया है। यह  अभियान आयुर्वेद के प्रति एक सम्मानजनक कदम है। यह अभियान 6 माह तक चलेगा, जिसके तहत हम  मीडिया, विशेष आयोजनों और कार्यक्रमों के जरिये आयुर्वेद एवं  संबद्ध उपचार विधियों के बारे में जागरूकता पैदा करेंगे। इसका अंतिम उद्देश्य है आयुर्वेद के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य का अधिकार दिलाना।

आयुर्वेद विशेषज्ञ, आचार्य मनीष ने आयुर्वेदक चिकित्सकों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए एलोपैथिक डॉक्टरों की निंदा की प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ, आचार्य मनीष ने 'स्वास्थ्य का अधिकार' नामक एक अनूठी पहल का अनावरण करने के मौके पर, भारत में आयुर्वेद के विकास हेतु सरकार द्वारा घोषित उपायों के खिलाफ एलोपैथिक और यहां तक कि दंत चिकित्सकों से विरोध करवाने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की कड़े शब्दों में निंदा की। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा आयुर्वेदिक चिकित्सकों को विशिष्ट सर्जरी की अनुमति देने के खिलाफ एलोपैथी डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया था।आचार्य मनीष ने कहा, "विरोध खराब स्तर पर हो रहा है और इसका उद्देश्य आयुर्वेद के खिलाफ झूठ फैलाना है। एलोपैथिक डॉक्टर आयुर्वेदिक चिकित्सकों को अल्पशिक्षित बताने का प्रयास कर रहे हैं, जो कि सच नहीं है। वास्तव में, आयुर्वेदिक डॉक्टरों को एमबीबीएस डॉक्टरों से अधिक पढ़ाई करनी होती है। उन्हें एमबीबीएस में पढ़ाए जानी वाली शरीर रचना, शल्य चिकित्सा आदि विषयों के अलावा, अलग से आयुर्वेद का भी अध्ययन करना पड़ता है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों को विशिष्ट सर्जरी की अनुमति देने के लिए केंद्र का धन्यवाद करते हुए, आचार्य मनीष ने केंद्र सरकार से आयुर्वेद के सर्वांगीण विकास हेतु एक 'आयुर्वेद परिषद' स्थापित करने का भी आह्वान किया।

उल्लेखनीय है कि विश्व स्वास्थ्य  संगठन (डब्ल्यूएचओ) स्वास्थ्य को 'शारीरिक,मानसिक और सामाजिक  कल्याण की एक संपूर्ण स्थिति के रूप में  परिभाषित करता है, न कि महज बीमारी या दुर्बलता की अनुपस्थिति। ' अत: डब्ल्यूएचओ की स्वास्थ्य परिभाषा को वास्तविकता में बदलने के लिए,  ऐसी उपचार विधियों की जरूरत है, जो न केवल चिकित्सा स्थितियों का इलाज करें, बल्कि शारीरिक और  मानसिक कल्याण पर भी ध्यान दें। इस अभियान के माध्यम से आचार्य मनीष और उनकी कानूनी टीम संविधान के अनुच्छेद 21 की भी ओर ध्यान खींचना चाहती है, जो प्रत्येक नागरिक को जीवन की सुरक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी देता है। उच्चतम न्यायालय ने भी माना है कि अनुच्छेद 21 में निहित अधिकार, राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों से लिए गए हैं, इसलिए अनुच्छेद 21 में 'स्वास्थ्य की सुरक्षा ' भी शामिल है।

'स्वास्थ्य का अधिकार लागू नहीं हो पा रहा है, क्योंकि समग्र स्वास्थ्य प्रदान करने में आयुर्वेद की शक्ति के बारे में जागरूकता की कमी है। आयुर्वेद ही डब्ल्यूएचओ  द्वारा प्रस्तुत परिभाषा को प्रमाणित कर सकता है, क्योंकि यह न केवल बीमारियों का इलाज करता है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा में सुधार भी करता है, जिससे कि बीमारी पैदा ही न हो। यह कोविड महामारी के दौरान इस्तेमाल की जा रही आयुर्वेदिक दवाओं से प्रतिरक्षा में हो रही वृद्धि से अच्छी तरह साबित हुआ है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि 'स्वास्थ्य का अधिकार ' आयुर्वेद के बिना एक मिथक है। आचार्य मनीष ने आगे कहा, 'एलोपैथी रोगग्रस्त शरीर को ठीक करने में ही सक्षम है और संक्रमण से बचाने के लिए यह उतनी कारगर नहीं है। स्पष्ट है कि 'स्वास्थ्य का अधिकार' एलोपैथी के जरिये  प्राप्त करना संभव नहीं होगा। दूसरी तरफ, आयुर्वेद शरीर को डिटॉक्स करने का काम करता है, ताकि कोई बीमारी हो ही नहीं। इसमें योग, पंचकर्म आदि जैसे पहलू भी शामिल हैं, जो व्यापक स्वास्थ्य सुनिश्चित करते हैं। आचार्य मनीष ने कहा 'हमारे आयुर्वेदिक लेबल 'शुद्धि ' का अर्थ है 'शुद्धिकर ' और हमारी व्यापक शोध आधारित एवं आयुष द्वारा  अनुमोदित औषधियां डिटॉक्स के सिद्धांत पर ही काम करती हैं। ' हालांकि, प्रमुख चिंता आयुर्वेद के प्रसार को लेकर है। जहां एक ओर संविधान 'स्वास्थ्य के अधिकार ' की गारंटी देता है, जिसे आयुर्वेद के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है, वहीं  दूसरी ओर, आयुर्वेद को एलोपैथी की तुलना में कमतर करके देखा जाता है। एलोपैथी को  अभी भी  उपचार में प्रमुखता दी जाती है और आयुर्वेद व आयुर्वेदिक चिकित्सकों के साथ भेदभाव किया जाता है। इस बीच कुछ नये घटनाक्रमों से खुश भी हैं, जैसे कि डब्ल्यूएचओ द्वारा भारत में एक पारंपरिक चिकित्सा  केंद्र स्थापित करने का निर्णय और आयुर्वेदिक डॉक्टरों को विशिष्ट सर्जरी की अनुमति मिलना, आदि। फिर भी अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। नये अभियान के तहत शीर्ष सरकारी अधिकारियों को आयुर्वेद बोर्ड की स्थापना करने, और आयुर्वेद को उपचार में प्राथमिकता दिये जाने या कम से कम इसे एलोपैथी के बराबर दर्जा दिये जाने के लिए कहा जायेगा। आचार्य मनीष ने कहा, 'हम पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक जनहित  याचिका दायर करके आयुर्वेद को उसका सही स्थान प्रदान करने के लिए न्यायिक सक्रियता की भी योजना बना रहे हैं। ' 

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

आवारा कुत्तों के हमले में कटी थी बच्ची की सांस नली, ईएनटी सर्जन ने बचाई जान।

आवारा कुत्तों के हमले में कटी थी बच्ची की सांस नली, ईएनटी सर्जन ने बचाई जान।

admin August 11 2021 26208

कुत्तों के हमले में बच्ची की सांस की नली कटकर दो हिस्सों में बंट गई थी, जिससे उसकी हालत काफी गम्भीर

मंकीपॉक्स टीका सभी के लिए जरूरी नहीं: एनआईवी निदेशक

मंकीपॉक्स टीका सभी के लिए जरूरी नहीं: एनआईवी निदेशक

विशेष संवाददाता August 27 2022 24884

एनआईवी निदेशक डॉ. अब्राहम ने कहा देश की स्थिति अभी काफी बेहतर है। मुझे नहीं लगता कि मंकीपॉक्स का टीक

सहारा हॉस्पिटल की स्थापना दिवस के 14 वर्ष पूर्ण, मनाया गया वार्षिकोत्सव

सहारा हॉस्पिटल की स्थापना दिवस के 14 वर्ष पूर्ण, मनाया गया वार्षिकोत्सव

हुज़ैफ़ा अबरार March 02 2023 97317

डायरेक्टर डॉ मजहर हुसैन ने नर्सों का योगदान को महत्वपूर्ण योगदान बताते हुए कहा कि चिकित्सक दवा लिखते

डायबिटीज: बार-बार इंसुलिन का इंजेक्शन लगाने का झंझट खत्म

डायबिटीज: बार-बार इंसुलिन का इंजेक्शन लगाने का झंझट खत्म

हे.जा.स. August 05 2022 37600

डायबिटीज के मरीजों के लिए एक अच्छी खबर ऑस्ट्रेलिया से आई है। अब डायबिटीज के मरीजों को बार-बार इंसुलि

सही समय पर इलाज से निमोनिया से बचाव संभव

सही समय पर इलाज से निमोनिया से बचाव संभव

लेख विभाग November 12 2022 28312

अगर समय बच्चों के टीके लगवाए जाए और सामान्य सर्दी, फीवर, खांसी, कफ की शिकायत होने पर बच्चों को डॉक्

कोविड-19: टोक्यो में आपातकाल होगा लागू, बगैर दर्शकों के होगा ओलंपिक का आयोजन। 

कोविड-19: टोक्यो में आपातकाल होगा लागू, बगैर दर्शकों के होगा ओलंपिक का आयोजन। 

हे.जा.स. July 08 2021 26314

दर्शकों पर प्रतिबंध लगाना संक्रमण को रोकने का बेहतर विकल्प है। यहां पहले ही विदेशी दर्शकों पर प्रतिब

केजीएमयू रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में एमडी सीटें बढ़कर 15 हुई

केजीएमयू रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में एमडी सीटें बढ़कर 15 हुई

रंजीव ठाकुर August 06 2022 24630

गौरतलब है कि डॉ सूर्यकान्त ने 11 साल पहले 5 अगस्त 2011 को इस विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में पदभार

दुनिया में ओमिक्रोन और डेल्टा का रिकाम्बिनेंट वायरस तेजी से फैल रहा: विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन

दुनिया में ओमिक्रोन और डेल्टा का रिकाम्बिनेंट वायरस तेजी से फैल रहा: विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन

एस. के. राणा March 15 2022 33998

देश दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर का असर अब कम हो गया है, लेकिन विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य स

भोजन से मिलता हैं संपूर्ण पोषण

भोजन से मिलता हैं संपूर्ण पोषण

लेख विभाग September 08 2023 83492

अच्छी सेहत के लिए स्वास्थ्य (Health) के प्रति लोगों में सजगता बढ़ी है। लोग न्यूट्रिशन के लिए प्रतिदि

रीजेंसी अस्पताल के तत्वावधान में 28 को किडनी स्वास्थ्य  जागरूकता के लिए वॉकथॉन

हुज़ैफ़ा अबरार March 25 2023 29103

डॉ दीपक दीवान ने बताया कि आबादी का 17 से 18 प्रतिशत किडनी बीमारियों से पीडि़त है, लेकिन जब क्रोनिक क

Login Panel