











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। कुछ राज्यों के एआरटी केन्द्रों में दवाओं की आपूर्ति कम होने से एचआईवी मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एआरटी दवाओं और डोलटेग्रेविर की कमी ने एचआईवी मरीजों की परेशानी में इजाफा कर दिया है। इन दवाओं से मरीजों में वायरस का लोड कम हो जाता है।
सूचना के अनुसार केन्द्रीय चिकित्सा सेवा सोसायटी (Central Medical Services Society) ने 8 महीने पहले एआरटी दवाओं की आपूर्ति के लिए टेण्डर निकाला था लेकिन निविदा प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। 3 महीने पहले भी निविदा निकाली गई थी लेकिन इसको भी अंजाम तक नहीं पहुंचाया गया। अब राज्यों से कहा जा रहा है कि वह अपने स्तर पर एआरटी दवाओं का प्रबंध करें।
देश के कई राज्य एचआईवी (HIV) के लिए जरूरी डोलटेग्रेविर (Dolutegravir) के साथ नेविरापीन (Nevirapine), लोपिनवीर (Lopinavir), रटनवीर (Ritonavir) आदि दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। यह समस्या महाराष्ट्र, नागालैण्ड, असम, मेघालय और मणिपुर में बनी हुई है।
एड्स सोसायटी ऑफ इंडिया (AIDS Society of India) के अध्यक्ष डॉ ईश्वर गिलाडा के मुताबिक एड्स के लिए जरूरी दवाएं आउट ऑफ स्टॉक है और इन दवाओं की जल्द आपूर्ति के लिए हम प्रयासरत है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (National AIDS Control Programme) में दवाओं (antiretroviral and dolutegravir drugs) की कमी के लिए दो कारण महत्वपूर्ण है। पहली समस्या आपूर्ति श्रंखला में है और दूसरी समस्या यह है कि कुछ ही फार्मा कंपनियों द्वारा इन दवाओं का निर्माण किया जाता है और अधिकारी इन दवाओं को काफी कम दामों पर खरीदते हैं जिससे दवाओं की उपलब्धता में कमी हो रही है।







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