देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

लेख

क्या हमें जीवन जीना आता है?

आज की शिक्षा आदमी को सजा कर छोड़ देती है, लेकिन उसके जीवन के संगीत को बजाने की संभावना उससे पैदा नहीं हो पाती। और ऐसा नहीं है कि पहले शिक्षा से हो जाती थी। पहले तो शिक्षा करीब-करीब थी ही नहीं।

अध्यात्म
January 10 2021 Updated: March 17 2021 03:50
0 47376
क्या हमें जीवन जीना आता है? फोटो ओशो

- ओशो

जीवन मिलता नहीं, निर्मित करना होता है। जन्म मिलता है, जीवन निर्मित करना होता है। इसीलिए मनुष्य को शिक्षा की जरूरत है। शिक्षा का एक ही अर्थ है कि हम जीवन की कला सीख सकें। एक कहानी मुझे याद आती है। एक घर में बहुत दिनों से एक वीणा रखी थी। उस घर के लोग भूल गए थे, उस वीणा का उपयोग।

पीढ़ियों पहले कभी कोई उस वीणा को बजाता रहा होगा। अब तो कभी कोई भूल से बच्चा उसके तार छेड़ देता था तो घर के लोग नाराज होते थे। कभी कोई बिल्ली छलांग लगा कर उस वीणा को गिरा देती तो आधी रात में उसके तार झनझना जाते, घर के लोगों की नींद टूट जाती।

वह वीणा एक उपद्रव का कारण हो गई थी। अंतत: उस घर के लोगों ने एक दिन तय किया कि इस वीणा को फेंक दें- जगह घेरती है, कचरा इकट्ठा करती है और शांति में बाधा डालती है। वह उस वीणा को घर के बाहर कूड़े पर फेंक आए।

वह लौट ही नहीं पाए थे फेंककर कि एक भिखारी गुजरता था, उसने वह वीणा उठा ली और उसके तारों को छेड़ दिया। वे ठिठक कर खड़े हो गए, वापस लौट गए। उस रास्ते के किनारे जो भी निकला, वह ठहर गया। घरों में जो लोग थे, वे बाहर आ गए। वहां भीड़ लग गई। वह भिखारी मंत्रमुग्ध हो उस वीणा को बजा रहा था।

जब उन्हें वीणा का स्वर और संगीत मालूम पड़ा और जैसे ही उस भिखारी ने बजाना बंद किया है, वे घर के लोग उस भिखारी से बोले- वीणा हमें लौटा दो। वीणा हमारी है। उस भिखारी ने कहा- वीणा उसकी है जो बजाना जानता है, और तुम फेंक चुके हो। तब वे लड़ने-झगड़ने लगे। उन्होंने कहा, हमें वीणा वापस चाहिए।

उस भिखारी ने कहा- फिर कचरा इकट्ठा होगा, फिर जगह घेरेगी, फिर कोई बच्चा उसके तारों को छेड़ेगा और घर की शांति भंग होगी। वीणा घर की शांति भंग भी कर सकती है, यदि बजाना न आता हो। वीणा घर की शांति को गहरा भी कर सकती है, यदि बजाना आता हो। सब कुछ बजाने पर निर्भर करता है।

जीवन भी एक वीणा है और सब कुछ बजाने पर निर्भर करता है। जीवन हम सबको मिल जाता है, लेकिन उस जीवन की वीणा को बजाना बहुत कम लोग सीख पाते हैं। इसीलिए इतनी उदासी है, इतना दुख है, इतनी पीड़ा है। इसीलिए जगत में इतना अंधेरा है, इतनी हिंसा है, इतनी घृणा है। इसलिए जगत में इतना युद्ध है, इतना वैमनस्य है, इतनी शत्रुता है।

जो संगीत बन सकता था जीवन, वह विसंगीत बन गया है क्योंकि बजाना हम उसे नहीं जानते हैं। शिक्षा का एक ही अर्थ है कि हम जीवन की वीणा को कैसे बजाना सीख लें। लेकिन ऐसा मालूम पड़ता है कि जिसे हम आज शिक्षा कहते हैं, वह भी जीवन की वीणा को बजाना नहीं सिखा पाती। वह जीवन की वीणा को रंग-रोगन सिखा देती है करना। जीवन की वीणा को हम रंग कर लेते हैं। जीवन की वीणा को सजा लेते हैं, फूल लगा देते हैं। जीवन की वीणा पर हीरे-मोती जड़ देते हैं, लेकिन न हीरे-मोतियों से वीणा बजती है, न फूलों से, न रंग-रोगन से।

आज की शिक्षा आदमी को सजा कर छोड़ देती है, लेकिन उसके जीवन के संगीत को बजाने की संभावना उससे पैदा नहीं हो पाती। और ऐसा नहीं है कि पहले शिक्षा से हो जाती थी। पहले तो शिक्षा करीब-करीब थी ही नहीं। आज की शिक्षा से भी नहीं होती है, पहले की शिक्षा से भी नहीं हो पाती थी। कहीं न कहीं कोई भूल हो रही है।

और वह भूल यही हो रही है कि वीणा के बजाने के नियम पर ध्यान नहीं है, वीणा को सजाने पर ध्यान है। वीणा को सजाने का अर्थ है- एक व्यक्ति को अहंकार दे देना, महत्वाकांक्षा दे देना। आज की सारी शिक्षा एक व्यक्ति के भीतर अहंकार की जलती हुई प्यास के अतिरिक्त और कुछ भी पैदा नहीं कर पाती है।

विश्वविद्यालय से निकलता है कोई, तो अहंकार से भरी हुई आकांक्षाएं लेकर निकलता है यह होने की, यह होने की, वहां पहुंच जाने की। सर्वप्रम हो जाने की पागल दौड़ से भर कर बाहर निकलते हैं। जीवन की वीणा तो पड़ी रह जाती है, प्रथम होने की दौड़ प्रारंभ हो जाती है। पहले ही दिन कक्षा में कोई भर्ती होता है तो हम उसे सिखाते हैं पहले आने का पागलपन। वह एक तरह का बुखार है, जिससे सभी पीड़ित हैं।

महत्वाकांक्षा एक तरह की बीमारी है जो हम सबके प्राणों को घेर लेती है। और अब तक की सारी शिक्षा महत्वाकांक्षा के ज्वर पर ही खड़ी है। मां-बाप भी वह जहर देते हैं, शिक्षक भी वह जहर देते हैं, लेकिन वह जहर देते हैं। वह हर आदमी को सिखाते हैं कि नंबर एक होना है तो ही जिंदगी में सुख है।

वह यह हमारा तर्क है शिक्षा का कि जो प्रथम है, वह सुखी है। जीसस ने एक वचन लिखा है जो हमें बहुत पागलपन का मालूम पड़ेगा। जीसस ने लिखा है: धन्य हैं वे लोग जो अंतिम खड़े होने में समर्थ हैं! और हमारी शिक्षा कहती है, धन्य हैं वे लोग जो प्रथम खड़े होने में समर्थ हो जाते हैं! या तो जीसस पागल हैं, या हम सब पागल हैं।

जीसस कहते हैं, धन्य हैं वे लोग जो अंतिम खड़े होने में समर्थ हैं। क्यों? क्योंकि जो अंतिम खड़ा हो जाता है, वह सभी बुखार से मुक्त हो जाता है। दौड़ से मुक्त हो जाता है। और जहां कोई बुखार नहीं है, जहां कोई दौड़ नहीं है, जहां कोई पागलपन नहीं है कहीं पहुंचने का, वहां अपने जीवन की वीणा के अतिरिक्त बजाने को और कुछ भी नहीं बचता है।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य दिव्यांगजन बच्चों को समाज से जोड़ेगा: सीआरसी गोरखपुर

सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य दिव्यांगजन बच्चों को समाज से जोड़ेगा: सीआरसी गोरखपुर

रंजीव ठाकुर July 12 2022 27272

घर पर रहते हुए अभिभावक किस तरह से अपने और दिव्यांग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को सदृढ़ रखे तथा पुनर्व

अमेरिकी टीके पाने वाला प्रमुख देश होगा भारत: राजदूत संधू

अमेरिकी टीके पाने वाला प्रमुख देश होगा भारत: राजदूत संधू

एस. के. राणा June 05 2021 23831

करीब 70 लाख खुराक एशिया में भारत, नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, अफगानिस्तान, मालदीव, मलेशि

बच्चों को सुपोषित बनाने को एक जुलाई से चलेगा ‘संभव’ अभियान। 

बच्चों को सुपोषित बनाने को एक जुलाई से चलेगा ‘संभव’ अभियान। 

हुज़ैफ़ा अबरार June 30 2021 34844

गर्भवती के स्वास्थ्य व पोषण का ध्यान रखा जाए तो आने वाला बच्चा स्वस्थ होगा | आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गृ

लखनऊ विश्वविद्यालय में फार्मास्युटिकल के छात्रों को मिलेगा शोध, इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर

लखनऊ विश्वविद्यालय में फार्मास्युटिकल के छात्रों को मिलेगा शोध, इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर

हुज़ैफ़ा अबरार February 21 2022 39506

लखनऊ विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट आफ फार्मास्युटिकल साइंसेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आइआइटी क

बूस्टर ख़ुराक के अंधाधुंध प्रयोग से कोविड-19 महामारी को नहीं हराया जा सकता: डब्लू.एच.ओ.

बूस्टर ख़ुराक के अंधाधुंध प्रयोग से कोविड-19 महामारी को नहीं हराया जा सकता: डब्लू.एच.ओ.

हे.जा.स. December 24 2021 32793

अंधाधुंध बूस्टर कार्यक्रमों से महामारी का अन्त होने के बजाय, उसके लम्बा खिंच जाने की सम्भावना है। इस

केजीएमयू कर्मचारी परिषद ने स्थगित किया कार्य बहिष्कार और हड़ताल

केजीएमयू कर्मचारी परिषद ने स्थगित किया कार्य बहिष्कार और हड़ताल

रंजीव ठाकुर September 07 2022 32534

एक दिन की हड़ताल और कार्य बहिष्कार के बाद किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कर्मचारी काम पर वापस ल

माहवारी, लड़कियों द्वारा स्कूल छोड़ने का एक बड़ा कारण

माहवारी, लड़कियों द्वारा स्कूल छोड़ने का एक बड़ा कारण

लेख विभाग October 06 2022 102432

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की बाल सुरक्षा के लिए काम करने वाली एजेंसी यूनिसेफ ने एक अध्ययन में बताया

एसजीपीजीआई में पहली बार प्रोग्राम्ड शंट से हाइड्रोसेफलस का इलाज हुआ

एसजीपीजीआई में पहली बार प्रोग्राम्ड शंट से हाइड्रोसेफलस का इलाज हुआ

रंजीव ठाकुर July 31 2022 28425

क्या आप जानते है कि दिमाग में लगातार पानी बनता है जो अधिकतर खून के साथ बाहर निकल जाता है। लेकिन कई ब

टीबी के बढ़ते संक्रमण पर डब्लूएचओ गंभीर, टीबी के खिलाफ टीका लाने के प्रयास तेज़  

टीबी के बढ़ते संक्रमण पर डब्लूएचओ गंभीर, टीबी के खिलाफ टीका लाने के प्रयास तेज़  

हे.जा.स. January 20 2023 30852

महानिदेशक घेबरेयेसस ने मंगलवार को स्विट्ज़रलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान एक उच

किडनी रोग, लिवर फेल व कैंसर के इलाज़ में रामबाण है आयुर्वेद: आचार्य मनीष

हुज़ैफ़ा अबरार October 19 2022 38234

आचार्य मनीष ने कहा, ''देश भर में हमारे सौ से अधिक शुद्धि क्लीनिक्स  संचालित हैं। दिल्ली में सीजीएचएस

Login Panel