देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

उत्तर प्रदेश

मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बच्चों की एकाग्रता में आ रही कमी: मानसिक रोग चिकित्सक

आज के दौर में बच्चे मोबाइल में गेम खेलने या यूट्यूब देखने में व्यस्त रहते हैं इससे समाज में बच्चों की सहभागिता या मौजूदगी का एहसास नाम मात्र का ही रह गया है। बलरामपुर अस्पताल के डॉ देवाशीष शुक्ला ने बताया कि मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बच्चों की एकाग्रता में कमी आ रही है। आइए डॉ शुक्ला से पूरी बात जानते है।

रंजीव ठाकुर
August 15 2022 Updated: August 15 2022 23:16
0 58409
मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बच्चों की एकाग्रता में आ रही कमी: मानसिक रोग चिकित्सक प्रतीकात्मक चित्र

लखनऊ। आज के दौर में बच्चे मोबाइल में गेम खेलने या यूट्यूब देखने में व्यस्त रहते हैं इससे समाज में बच्चों की सहभागिता या मौजूदगी का एहसास नाम मात्र का ही रह गया है। बलरामपुर अस्पताल के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ देवाशीष शुक्ला ने बताया कि मोबाइल के अधिक इस्तेमाल से बच्चों की एकाग्रता में कमी आ रही है। आइए डॉ शुक्ला से पूरी बात जानते है। 

 

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Children) के एक अध्ययन  के अनुसार स्मार्टफोन के अधिक उपयोग से बच्चों में एकाग्रता की कमी (lack of concentration in children) आ रही है। 37.15 प्रतिशत बच्चे हमेशा या कभी-कभी स्मार्टफोन के उपयोग के कारण एकाग्रता में कमी का अनुभव करते हैं। 

इस बारे में बलरामपुर अस्पताल के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ देवाशीष शुक्ला (Dr. Devashish Shukla, Chairman, Department of Mental Disease, Balrampur Hospital) का कहना है कि कोरोना (Corona) ने जीवन को बहुत प्रभावित किया है। बच्चों का लंबे समय तक घर पर ही रहना, पढ़ाई का बोझ, लैपटॉप व स्मार्टफोन पर ऑनलाइन पढ़ाई (studying online) करना आदि ने उन्हें सामाजिकता से बहुत हद तक दूर किया है।  इसका एक कारण आज का भौतिकतावादी युग भी है। 

 

एक अच्छा जीवन जीने के लिए परिवार के पुरुषों के साथ महिलाएं भी काम करने लगी हैं। कामकाजी महिलाओं के बच्चे नौकरानी के भरोसे रहते हैं। बच्चों को घर से बाहर खेलने के बजाय मोबाइल पकड़ा दिया जाता है। इसके साथ ही बच्चा अभिभावकों को परेशान न करे तो वह बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन (smartphone) पकड़ा देते हैं।  मोबाइल, लैपटॉप बच्चों के मानसिक विकास में बहुत बड़े अवरोधक हैं। 

 

इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि वर्ष 2025 तक मानसिक बीमारी (mental illness) दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी होगी जिसमें डिप्रेशन अर्थात अवसाद (depression) मुख्य होगा। यह लोगों के जीवन को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा। 

मोबाइल और लैपटॉप के उपयोग से बच्चों में चिड़चिड़ापन (irritability), गुस्सा, एकाकीपन (loneliness), लापरवाह, एकाग्रता की कमी, जिद्दी, अभिभावकों की बातों को अनसुना करना, नींद न आना (sleeplessness) आदि समस्याएं आती हैं। इसके साथ ही शारीरिक समस्याएं जैसे आँखों की रोशनी कम होना (loss of eyesight), आँखों में दर्द (pain in eyes), मोटापा का सामना करना पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि छोटे बच्चों को दो घंटे से ज्यादा मोबाइल नहीं देखना चाहिए ।

 

इस समस्या का समाधान यही है कि बच्चों को स्मार्टफोन से दूर रखें। उन्हें खेलकूद, पढ़ने या उनकी रुचि के किसी काम में  व्यस्त रखें। माता-पिता बच्चों को भरपूर समय दें। बच्चों की बातों को अनसुना न करें। स्मार्टफोन देखने के समय को सीमित करें। इस पर भी नजर रखें कि बच्चे क्या देख रहे हैं क्योंकि जो चीज बच्चे देखते हैं उसका असर बच्चों के मस्तिष्क (children brain) पर पड़ता है।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

अब यात्रियों के लिए RT-PCR जरूरी, 6 देशों के लिए जारी हुई गाइडलाइन

अब यात्रियों के लिए RT-PCR जरूरी, 6 देशों के लिए जारी हुई गाइडलाइन

एस. के. राणा December 30 2022 33459

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने बताया कि एक जनवरी से अब छह देशों से आने वाले यात्रिय

प्रदेश सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगियों को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा

प्रदेश सरकार के कर्मचारी और पेंशनभोगियों को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा

हुज़ैफ़ा अबरार April 10 2022 34112

सरकारी मेडिकल संस्थान व अस्पताल में इलाज पर खर्च होने वाली रकम की कोई बाध्यता नहीं होगी जबकि प्राइवे

पीएम मोदी हिमाचल को देंगे दशहरे पर AIIMS की सौगात

पीएम मोदी हिमाचल को देंगे दशहरे पर AIIMS की सौगात

विशेष संवाददाता October 04 2022 30837

एम्स का निर्माण 1470 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। अस्पताल में 18 स्पेशिएलिटी और 17 सुपर स्पेशि

अन्य रोग के साथ कोविड से होने वाली मौतों को कोविड मृत्यु मना जाये: केंद्र

अन्य रोग के साथ कोविड से होने वाली मौतों को कोविड मृत्यु मना जाये: केंद्र

एस. के. राणा June 20 2021 28816

गृह मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा: "कोविड -19 के निदान के साथ सभी मौतें, सह-रुग्णता के बावजूद, को

सुखी जीवन के लिए कामेच्छा में कमी के कारणों को समझिये

सुखी जीवन के लिए कामेच्छा में कमी के कारणों को समझिये

लेख विभाग June 12 2022 1535158

सेक्स के प्रति अरुचि को शुरूआती तौर पर सामान्य समस्या के रूप में माना गया है। शोधों से या स्पष्ट होत

डॉ लाल पैथलैब्स का तीसरी तिमाही में शुद्ध लाभ 75 प्रतिशत पहुंचा।  

डॉ लाल पैथलैब्स का तीसरी तिमाही में शुद्ध लाभ 75 प्रतिशत पहुंचा।  

हे.जा.स. February 01 2021 24718

कंपनी ने 31 दिसंबर को समाप्त हुए तिमाही तक शुद्ध लाभ में 75 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 95.9 करोड़ रुपय

जानिए एंटीबायोटिक सेहत के लिए कितनी हानिकारक हो सकती है?

जानिए एंटीबायोटिक सेहत के लिए कितनी हानिकारक हो सकती है?

आरती तिवारी September 20 2022 33430

एक रिसर्च के मुताबिक एंटीबायोटिक की ज्यादा खुराक लेना शरीर में बैक्टीरिया के खतरे को और बढ़ा सकता है

केजीएमयू के शल्य चिकित्सा विभाग ने मनाया 109वां स्थापना दिवस।

केजीएमयू के शल्य चिकित्सा विभाग ने मनाया 109वां स्थापना दिवस।

हुज़ैफ़ा अबरार February 14 2021 35656

कोविड महामारी के दौरान शल्य चिकित्सा विभाग का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रो टीसी गोयल द्वारा लिखित पुस

लीवर फेलियर का 50 से 60 प्रतिशत कारण शराब का सेवन है: डॉ अभिषेक

हुज़ैफ़ा अबरार January 29 2026 994

अपोलोमेडिक्स की व्यापक लिवर सेवाएं उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों में हर उम्र के लोगों‌ के  साथ-सा

मैनकाइंड फार्मा ने बाज़ार में उतारा ब्लैक फंगस की दवा।

मैनकाइंड फार्मा ने बाज़ार में उतारा ब्लैक फंगस की दवा।

हे.जा.स. June 10 2021 26817

मैनकाइंड फार्मा ने एक बयान में कहा, ‘‘चूंकि ब्लैक फंगस के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, इसलिए

Login Panel