











































प्रतीकात्मक चित्र
कोविड-19 महामारी के बाद शरीर की इम्युनिटी क्षमता को मजबूत करने का महत्व बढ़ गया है। लंबे समय तक वायरल इन्फेक्शन रहने से इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। इससे व्यक्ति को बैक्टीरियल इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। जब बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है तो व्यक्ति सेप्सिस की चपेट में आ जाता है। इस स्थिति में टीकाकरण और हाथ की स्वच्छता द्वारा इम्युनिटी बढ़ाने पर महत्व दिया जाना चाहिए।
हेल्थ जागरण से बातचीत करते हुए रीजेंसी हॉस्पिटल, कानपुर के पल्मोनोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर कंसल्टेंट डॉ अशोक कुमार सिंह ने कहा कि सेप्सिस एक जानलेवा बीमारी है। जब शरीर किसी रिएक्शन के प्रति बहुत गंभीर प्रतिक्रिया करती है तो यह बीमारी होती है। इस बीमारी की वजह से हेल्थकेयर सेटिंग्स जैसे कि इंटेंसिव केयर यूनिट्स और इमरजेंसी डिपार्टमेंट में बहुत सारी बीमारी और मौते होती हैं। सेप्सिस से होने वाली मृत्यु दर 25 से 30% से ज्यादा है। दुनिया भर में हर साल 6 से 9 मिलियन लोग सेप्सिस से मर जाते हैं।

रीजेंसी हॉस्पिटल, कानपुर के पल्मोनोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर कंसल्टेंट, डॉ अशोक कुमार सिंह ने 'विश्व सेप्सिस दिवस' पर अपनी राय देते हुए कहा, "नियमित टीकाकरण न कराने, चोट और घाव लगने के बाद साफ-सफाई न रखने और हाथों को स्वच्छ न रखने से लोग सेप्सिस की चपेट में जल्दी आते हैं। हम लंबे समय से किसी वायरल संक्रमण से पीड़ित व्यक्तियों को सलाह देते हैं कि वे इस बीमारी को नज़रअंदाज़ न करें और स्वच्छता का ध्यान रखें। इसके अलावा समय पर टीका लगवाएं। उचित एंटीबायोटिक उपचार न होने से सेप्सिस के मरीजों की क्लीनिकल कंडीशन तेजी से बिगड़ सकती है। कमजोर इम्युनिटी वाले युवा या वृद्ध आयु के लोगों में सेप्सिस होने का ज्यादा खतरा रहता है। कैंसर, डायबिटीज, ट्रामा या जलन जैसी स्थितियों से पीड़ित लोगों में भी सेप्सिस होने का खतरा ज्यादा रहता है। कैथेटर जैसे आक्रामक उपकरणों के उपयोग और कमजोर इम्युनिटी के कारण कई मरीजों में सेप्सिस हो सकता है।"
सेप्सिस एक इन्फेक्शन के प्रति शरीर की एक गंभीर इम्यून प्रतिक्रिया है। इम्यून सिस्टम सेप्सिस से पीड़ित व्यक्ति के ऊतक और अंग घायल हो सकते है। यह जीवन के लिए खतरा हो सकता है। यह बीमारी खून में बैक्टीरिया, वायरल और फंगल इन्फेक्शन होने से होती है। ये खतरनाक पैथोजन चोट या सर्जरी के माध्यम से खून में घुस जाते हैं। इसलिए लक्षणों पर नजर रखना और सेप्सिस से खुद को बचाने के लिए इन्फेक्शन का जल्द पता लगाना महत्वपूर्ण होता है।
बुखार, ठंड और कंपकंपी होने, नाड़ी की गति तेज होने, सांस लेने में कठिनाई, पसीने से तर हो जाने, असहनीय दर्द और बेचैनी, और घाव के आसपास लालिमा और सूजन दिखने पर तत्काल डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए। इसके अलावा गंभीर लक्षणों में चक्कर आने के साथ ब्लड प्रेशर कम होने, पेशाब कम होना, त्वचा के रंग में परिवर्तन होना (पीला, फीका पड़ा हुआ या धब्बेदार त्वचा होना), उलझन या सतर्क न रहना, मौत का अचानक डर होना और सांस लेने में तकलीफ होना, उल्टी और दस्त होना आदि सेप्सिस के गंभीर लक्षणों में शामिल है।
हालत बिगड़ने पर मरीज को सेप्टिक शॉक हो सकता है। ऐसे में ब्लड प्रेशर अचानक कम हो सकता है। इससे अधिकांश अंगों में खून की पर्याप्त आपूर्ति नही हो सकती है और ऑक्सीजन भी नहीं मिल सकती है। अगर सेप्सिस का जल्द पता न लगाया और उसके अनुसार इलाज न शुरू किया गया तो इस वजह से कई अंग फेल हो जाते हैं और मौत हो जाती है। सेप्सिस को होने से रोकने के लिए हमें एक्सरसाइज, पोषण और वायरल इन्फेक्शन के खिलाफ टीका लगवाना चाहिए ताकि इम्युनिटी को मजबूत किया जा सके। इसके अलावा साफ़-सफाई भी अच्छी रखनी चाहिए।







एस. के. राणा January 13 2026 0 3556
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 3556
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 3381
एस. के. राणा January 20 2026 0 3346
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3101
एस. के. राणा February 01 2026 0 2786
एस. के. राणा February 04 2026 0 2583
उत्तर प्रदेश
सौंदर्या राय May 06 2023 0 102418
सौंदर्या राय March 09 2023 0 106946
सौंदर्या राय March 03 2023 0 107199
admin January 04 2023 0 107054
सौंदर्या राय December 27 2022 0 97530
सौंदर्या राय December 08 2022 0 85925
आयशा खातून December 05 2022 0 140525
लेख विभाग November 15 2022 0 109596
श्वेता सिंह November 10 2022 0 158834
श्वेता सिंह November 07 2022 0 109788
लेख विभाग October 23 2022 0 94674
लेख विभाग October 24 2022 0 98055
लेख विभाग October 22 2022 0 103778
श्वेता सिंह October 15 2022 0 106718
एमएसडी फार्मास्युटिकल्स की मैनेजिंग डायरेक्टर ने बताया कि प्राथमिक केयर की सेवाएं, विकसित तकनीक द्वा
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 24 जुलाई को स्टाफ नर्स (पुरुष) की मुख्य परीक्षा आयोजित की जानी थी
चिंताजनक बात है कि अब मुख कैंसर की चपेट में युवा तेजी से आ रहे हैं। जेके कैंसर संस्थान में तीन वर्ष
प्रदेश की 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का चयन किया गया है, जहां पीपीपी मॉडल पर सभी सुविधाएं विकसि
हाथ का अंगूठा कटकर अलग हो जाए तो उसे जोड़ने के बारे में तो सोचा जा सकता है, हालांकि अगर अंगूठा कटकर
नर्सिंग को प्रोफेशन बनाने का निर्णय सराहनीय है। नर्सिंग स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ है। जिस चिकित्सा सं
2015 के ग्लोबल बर्डन डिजीज के अध्ययन के अनुसार, क्रोनिक किडनी रोग को भारत में मृत्यु दर के आठवें प्र
नीदरलैंड की लगभग 85 प्रतिशत आबादी का पूर्ण टीकाकरण हो गया है, लेकिन स्वास्थ्य संस्थान ने 24 घंटों मे
सर्वे के अनुसार अब भी बड़ी संख्या में बेटियों की शादी कम उम्र में ही कर दी जाती है। आंकड़ों के अनुसार
देशभर में पिछले 24 घंटों में 308 लोगों की कोविड की वजह से मौत भी हुई है। अब तक देशभर में कुल 4,40,53

COMMENTS