











































प्रतीकात्मक
लखनऊ| चक्रवात ‘यास’ के चलते कुछ स्थानों पर हुई बेमौसम बारिश से जगह-जगह मच्छर पनप सकते हैं, जिसके कारण डेंगू और मलेरिया फैलने की सम्भावना बढ़ जाती है । ऐसे में कोरोना के साथ ही अन्य संक्रामक बीमारियों के प्रति सतर्कता बरतना जरूरी है |
राष्ट्रीय वेक्टर जनित नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. के.पी. त्रिपाठी का कहना है कि बरसात में पानी के भराव के कारण मच्छर अधिक पनपते हैं। ऐसे में लोग जागरूक रहें। डेंगू का लार्वा साफ ठहरे हुए पानी में पनपता है, इसलिए घर व् आस-पास साफ-सफाई रखें, पानी न इकठ्ठा होने दें, पूरी बांह के कपड़े पहने, मच्छररोधी क्रीम लगायें, घर के ताजा व अच्छे से पका हुआ खाना खाएं, साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले फल व सब्जियों का सेवन करें। इन सबके साथ इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि बेवजह घर से बाहर न निकलें। अगर घर से निकलते हैं तो मास्क अवश्य लगायें। सार्वजनिक स्थानों पर दो गज की दूरी बनाकर रखें व बार-बार चेहरे को न छुएं।

डा. त्रिपाठी ने बताया- जिले मे डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए लगातार व्यापक सर्वे और परीक्षण अभियान चलाया जा रहा है | इसके साथ ही फैमिली हेल्थ इण्डिया-गोदरेज द्वारा जिला स्वास्थ्य समिति के समन्वय से संचालित एम्बेड परियोजना के अन्तर्गत मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 संजय भटनागर के निर्देशन में डेंगू और मलेरिया उन्मूलन हेतु अत्यधिक संवेदनशील चिन्हित100 बस्तियों की आशा कार्यकर्ताओं को ई-माड्यूल के माध्यम से प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसमें बस्ती करेहटा से आशा सुमन, संजय नगर से प्रियंका, पूर्वीदीन खेडा से शिवकुमारी, लवकुश नगर से ज्योती, अनीता, सुमन पाण्डे, नजमा खातून, मदेयगंज से शबली एवं हेमा, केशव नगर से अनीता, नया पुरवा से रजनी गुप्ता, अनीता, हाजरा, झरियन तालाब से अंजली निगम, खरियाही से अर्चना एवं नूरबाडी से संगीता आदि आशा कार्यकर्ता शामिल हैं ।

जिला मलेरिया अधिकारी डी0एन0शुक्ला ने बताया कि कोरोना से बचाव, टीकाकरण एवं जांच के लिए लोगों को प्रेरित करने के साथ ही साथ मलेरिया एवं डेंगू की रोकथाम आदि का कार्य व्यापक स्तर पर किया जा रहा हैं।
एम्बेडर समन्वयक धर्मेन्द्र त्रिपाठी ने बताया कि अगर हमें डेंगू से बचना है तो हमारे घरों में अथवा घरों की छतों पर पल रहें लार्वा को सबसे पहले नष्ट करना होगा एवं घर के अन्दर सभी जल स्रोतों को साफ रखना होगा। उन्होंने बताया कि शहर के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों, मलिन बस्तियों में डेगू लार्वा की पहचान के साथ ही साथ इनसे बचाव एवं सावधानियो की जानकारी क्षेत्रीय स्तर पर बी0सी0सी0एफ0 कार्यकर्ताओ द्वारा घर-घर भ्रमण कर उपलब्ध माड्यूल, सिचुएशन कार्ड्स आदि के माध्यम से कोविड उपयुक्त व्यवहारों को ध्यान मे रखते हुए प्रदान की जा रही हैं।
डा. त्रिपाठी ने बताया- पिछले तीन सालों में हमने डेंगू पर लगाम लगायी है । वर्ष 2019 में जिले में जहाँ डेंगू के 2,162 मरीज मिले थे, वहीँ 2020 में 882 और 2021 में जनवरी से अभी तक कुल 36 केस मिले हैं।







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