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नयी दिल्ली। महिलाओं को प्रजनन की स्वायत्ता और गर्भपात का अधिकार देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले को परिवार स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ऐतिहासिक बताया है। एक निजी चैनल की ओर से कराए गए सर्वे में चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। वहीं असुरक्षित गर्भपात से रोजाना 8 मौतें होती है, और डाटा के अनुसार 47.6 प्रतिशत गर्भपात इसलिए होता है क्योंकि ये अनप्लान्ड था। 11.03 फीसदी गर्भपात स्वास्थ्य से जुड़े कारणों से होता है। 9.7 प्रतिशत अबॉर्शन की वजह आखिरी बच्चे का काफी छोटा होना है।
सर्वें में ये भी पता चला कि 9.1 प्रतिशत गर्भपात (abortion) दूसरी जटिलताओं की वजह से होता है। 4.1 प्रतिशत गर्भपात की वजह पति या सास की अनिच्छा है। भारत में 3.4 प्रतिशत अबॉर्शन आर्थिक कारणों से होता है। नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (Lohia Hospital) की निदेशक डॉ. नंदिनी दुग्गल बताती हैं कि महिलाओं की सुरक्षित गर्भपात सेवाओं पर सीमित पहुंच और उनके परिवारों को गर्भपात की कानूनी मान्यता (legal recognition) के बारे में जानकारी के अभाव के चलते असुरक्षित गर्भपात (unsafe abortion) एक गंभीर समस्या बना हुआ है।
बता दें कि तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh) और पश्चिम बंगाल ऐसे राज्य है जहां आर्थिक कारणों की वजह से गर्भपात सबसे ज्यादा होता है। 2.1 प्रतिशत अबॉर्शन इस वजह से होता है क्योंकि गर्भ में पल रहा भ्रूण लड़की थी। ये स्थिति तब है जब भारत में गर्भ में पल रहे भ्रूण का सेक्स (fetal sex) जानना कानूनन जुर्म है। 12.7 प्रतिशत गर्भपात अन्य कारणों से होता है।







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