











































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। हर साल 28 मई को हम सेक्सुअल एंड रीप्रोडक्टिव हेल्थ एंड राइट्स के विषय में जागरूकता बढ़ाने तथा इसका समर्थन करने के लिए इंटरनेशनल डे ऑफ एक्शन फॉर विमेन हेल्थ मनाते हैं । भारत के शहरों में विशेष रुप से टियर 2 और टियर 3 शहरों में महिलाओं के लिए उचित गुणवत्तापूर्ण हेल्थ केयर समाधानों की कमी है, इसलिए यह दिन विशेष रूप से हमें इस मुद्दे पर जरूरी कार्यवाही करने के लिए प्रेरित करता है। बच्चे को जन्म देने के दौरान महिलाओं को सर्जिकल साइट इन्फेक्शन विकसित होने का अत्यधिक खतरा रहता है, जिसका मुख्य कारण है असुरक्षित तरीके से सर्जिकल ऑपरेशन करना ।
सर्जिकल साइट इन्फेक्शन (Surgical site infection) महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय है । सर्जिकल साइट इन्फेक्शन एक पोस्ट-ऑपरेटिव इन्फेक्शन होता है जो शरीर के उस हिस्से में हो सकता है जिसकी अभी हाल में ही सर्जरी हुई है। कभी-कभी, ये इन्फ़ेक्शन सतही होते हैं, जो मात्र त्वचा की बाहरी परत को प्रभावित करते हैं। अन्य सर्जिकल साइट इन्फेक्शन जो अधिक गंभीर हैं, उनमें त्वचा, अंगों के नीचे टिश्यू या इम्प्लांट की गई सामग्री शामिल हो सकती है । जॉनसन एंड जॉनसन जो कि प्रोफेशनल शिक्षा के क्षेत्र में एक वैश्विक लीडर है, मातृ रुग्णता और मृत्यु दर को कम करने के लिए लगातार सर्जिकल प्रक्रियाओं में सुधार करने का प्रयास कर रहा है।
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, रोग और मृत्यु दर का एक बड़ा कारण सर्जिकल साइट इन्फेक्शन है । इसके अलावा, यह सर्जरी करा रहे रोगियों के लिए चिकित्सा खर्च को अत्यधिक बढ़ा देता है, क्योंकि सर्जिकल साइट इन्फेक्शन होने के बाद अक्सर लंबे समय तक हॉस्पिटल में रहना पड़ता है, यहां तक कि कुछ मामलों में दोबारा सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। काम पर ना पहुंचने के कारण रोगी पर और भी ज्यादा आर्थिक बोझ आ जाता है।
डॉ.वंदिता गुप्ता, हेड, एथिकॉन वुंड क्लोज़र, जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) मेडिकल इंडिया ने कहा, “ हमारा मानना है कि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और मेडटेक कंपनियों के बीच एक मजबूत सहयोग द्वारा हमारे देश में सर्जिकल साईट इन्फ़ेक्शन को रोकने में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। जॉनसन एंड जॉनसन हमारे साझेदारों के साथ मिलकर भारत में मरीजों को सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थकेयर इम्प्रूवमेंट के अध्ययन के अनुसार, एंटीबायोटिक दवाओं (antibiotics), एंटी-बैक्टीरियल चिकित्सा उपकरणों और इन्फेक्शन होने की अवस्था में समय पर उसका इलाज करने से लगभग 40 से 60 प्रतिशत तक सर्जिकल साइट इन्फेक्शन के मामलों को रोका जा सकता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि सर्जिकल साइट इन्फेक्शन को कई कारण प्रभावित कर सकते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
प्रसव प्रक्रिया (delivery process) के दौरान इन्फ़ेक्शन को रोकने के लिए हॉस्पिटल्स को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। इन्फ़ेक्शन को रोकने के लिए हॉस्पिटल्स को 24 से 48 घंटे के भीतर उपाय करने चाहिए जैसे कि स्टेराइल ड्रेसिंग का इस्तेमाल, रोगी की साफ सफाई करने के लिए एंटीसेप्टिक साबुन का इस्तेमाल, मास्क पहनना, सर्जरी के पहले उचित एजेंटों के साथ त्वचा को तैयार करना, तथा स्टेराइल मेडिकल उपकरणों (sterile medical equipment) का इस्तेमाल करना आदि।
डॉ.नीलम गुप्ता, डायरेक्टर,ऑब्सटीट्रिक्स एवं गायनेकोलॉजी (Obstetrics & Gynecology), मेदांता (Medanta), लखनऊ ने कहा, “डबलूएचओ चेकलिस्ट का इस्तेमाल, नाईस के क्रियान्वयन के दिशानिर्देश, सर्जिकल केयर बंडलों, रिस्क स्ट्रेटिफिकेशन टूल्स और मानकीकृत ट्रेनिंग प्रोटोकॉल्स का इस्तेमाल करके एसएसआई को रोकने में काफी मदद मिल सकती है। शिक्षा, एवं सक्रिय सहभागिता द्वारा मूल्यांकन, फीडबैक, सर्वियलेंस एवं अंशधारकों के साथ संलग्न होना भी जरूरी है, ताकि देश के टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी एसएसआई के बारे में जागरुकता बढ़ाई जा सके।”
इंटरनेशनल डे ऑफ एक्शन फॉर विमेन हेल्थ (International Day of Action for Women's Health) के दिन हम महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देकर यह सुनिश्चित सकते हैं, कि प्रसव की प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित हो एवं शिशु व मां, दोनों स्वस्थ रहें।







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