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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग, यूपी चैप्टर ऑफ़ इण्डियन चेस्ट सोसायटी व आईएमए- एएमएस के संयुक्त तत्वावधान में मल्टी ड्रग रजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी पर कलाम सेंटर में हाइब्रिड मोड में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गयी।
इस अवसर पर राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (National Tuberculosis Eradication Program) के नेशनल टास्क फ़ोर्स के राष्ट्रीय सलाहकार पद्मश्री डॉ. दिगम्बर बेहरा ने कहा कि दुनिया में मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (MDR) टीबी से निजात दिलाने के लिए 10 नई दवाओं पर शोध चल रहा है। इन दवाओं के आ जाने से एमडीआर टीबी मरीजों का इलाज और आसान हो जाएगा। डॉ. बेहरा ने टंडन माथुर मेमोरियल व्याख्यान के तहत भारत में एमडीआर टीबी (MDR TB) की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों व तैयारियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए चलाया जा रहा राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम दुनिया के बड़े और प्रमुख कार्यक्रमों में अपनी जगह बना चुका है।
कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए कुलपति डॉ. पुरी ने कहा कि देश में टीबी के कुल मरीजों में से 25 प्रतिशत उत्तर प्रदेश के हैं, जो चिंताजनक है। इसलिए हमें पूरी मुस्तैदी के साथ यूपी से टीबी को ख़त्म करना होगा तभी देश से टीबी का खात्मा हो सकेगा। उत्तर भारत के नौ राज्यों में क्षय उन्मूलन के लिए केजीएमयू (KGMU) नेतृत्व देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि केजीएमयू के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग में डीआर टीबी मरीजों के बेहतर उपचार के लिए 20 बेड की व्यवस्था है, जो कि प्रदेश का सबसे बड़ा एमडीआर टीबी सेंटर है। हमारा प्रयास है कि डीआर टीबी मरीजों (TB patients) को किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े, इसके लिए रेस्परेटरी मेडिसिन के साथ ही माइक्रोबायोलाजी और बाल रोग विभाग हर वक्त पूरी सक्रियता से तैयार रहते हैं।
कार्यशाला में नेशनल टीबी टास्क फ़ोर्स के चेयरमैन डॉ. ए. के. भारद्वाज ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की टीबी मरीजों को गोद लेने और उन्हें पोषक आहार (nutritious food) प्रदान कराने के साथ ही भावनात्मक सहयोग प्रदान करने की पहल को सराहा । उन्होंने कहा कि उनकी इस पहल से टीबी मरीजों को कम समय में बीमारी से छुटकारा पाने में मदद मिल रही है । इसके तहत वयस्कों को 1100 रुपये की पोषण पोटली और बच्चों को 750 रुपये की पोषण पोटली प्रदान की जा रही है । इसके अलावा मरीजों को इलाज के दौरान निक्षय पोषण योजना (Nikshay Poshan Yojana) के तहत हर माह 500 रुपये सीधे बैंक खाते में दिए जाते हैं ।
इस अवसर पर नेशनल टीबी टास्क फ़ोर्स (National TB Task Force) - नार्थ जोन के प्रमुख और रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी चिकित्सकों व अन्य के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा - टीबी केवल एक बीमारी ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक समस्या के रूप में भी है। जो महिलाएं टीबी ग्रसित हो जाती हैं उनका तलाक तक हो जाता है। टीबी ग्रसित छोटे बच्चे खेलकूद से वंचित रह जाते हैं और अगर घर के युवा को टीबी हो जाती है तो कमाई का जरिया बंद हो जाता है। इसलिए टीबी के लक्षण (दो हफ्ते से अधिक खांसी-बुखार आने, वजन कम होने) नजर आयें तो तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर मुफ्त जांच और इलाज कराएं। इसमें देरी करना भारी पड़ सकता है।







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