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वॉशिंगटन। वैज्ञानिकों को उत्तरी अमेरिका में सफेद पूंछ वाले हिरण में सार्स-सीओवी-2 स्वरूप की मौजूदगी मिली है जो कभी मनुष्यों में व्यापक रूप से प्रसारित थे, लेकिन अब इनमें (मनुष्यों में) नहीं पाए जाते हैं। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, अमेरिका के शोधकर्ताओं ने कहा कि हिरण में इन अप्रचलित स्वरूपों की मौजूदगी लंबे समय से है या नहीं, यह अभी अज्ञात है। शोधकर्ताओं ने कहा कि इन्सानों में मिले वायरस की तुलना में हिरण में पाए गए कुछ वायरस में 80 बार बदलाव हुआ।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (Cornell University), अमेरिका के शोधकर्ताओं (researchers) ने कहा कि हिरण में इन अप्रचलित स्वरूपों की मौजूदगी लंबे समय से है या नहीं, यह अभी अज्ञात है। हालांकि और आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं। यह अध्ययन शोध पत्रिका ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ में प्रकाशित हुआ है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (Cornell University) में एसोसिएट प्रोफेसर डिएगो डिएल ने कहा, ‘‘इस अध्ययन के सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में से एक इस जंगली जानवरों में 3 चिंताजनक स्वरूपों-अल्फा, गामा (alpha, gamma) और डेल्टा के प्रसारित होने का पता लगाना था।’’
अध्ययन में कहा गया है कि महामारी के दौरान, हिरण सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) से मनुष्यों के साथ संपर्क, संभवतः शिकार, वन्यजीव पुनर्वास, जंगली जानवरों को खाना देने या अपशिष्ट जल (waste water) अथवा जल स्रोतों के माध्यम से संक्रमित हो गए। साथ ही एक वायरस (virus) जो एशिया में मनुष्यों में उभरा, अब उत्तरी अमेरिका में वन्यजीवों में इसकी मौजूदगी मिली है। अध्ययन में इस्तेमाल किए गए 5,700 नमूने 2020-22 के दौरान एकत्र किए गए।







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