











































प्रतीकात्मक
नयी दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रोगाणुरोधी प्रतिरोध की मौन महामारी से निपटने के लिए ज्यादा वैक्सीन डेवलेप करने पर बल दिया है। और साथ ही कहा कि सभी देश उपलब्ध टीकों का बेहतर इस्तेमाल करें जिससे कि स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
युनाइटेड नेशन्स स्वास्थ्य एजेंसी (United Nations Health Agency) ने हाल ही में विकसित किए गए टीकों (recently developed vaccines) पर पहली रिपोर्ट पेश की है। इस अध्ययन के अनुसार आगामी अनुसंधान और निवेश प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि जब वायरस (viruses), वैक्टीरिया (bacteria), फंगस या परिजीवी (fungi or parasites) समय के साथ अपना रुप बदलते हैं तब इन पर दवाओं का असर होना बंद होता जाता है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता है और इलाज नामुमकिन (treatment impossible) हो जाता है।

रिपोर्ट में सार्वजनिक स्वास्थ्य (public health) को लेकर चिंता जताते हुए कहा गया कि दुनिया में मौन महामारी (silent epidemic) बढ़ती जा रही है और यह मामला प्रतिवर्ष 50 लाख मृत्यु तक पहुंच गया है। इनमें से लगभग 12 लाख मौतें सीधे प्रतिरोधी जीवाणु संक्रमण (resistant bacterial infections) से जुड़ी हुई है। रिपोर्ट में 61 वैक्सीन्स का जिक्र किया गया है जिनमें से बहुत सारी विकसित होने के अंतिम चरण में है जो जल्दी दुनिया को मिलने वाली नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सहायक महानिदेशक डॉ हनान बाल्खी (Dr Hanan Balkhi, Assistant Director-General of the World Health Organization) ने कहा कि टीकाकरण के जरिए संक्रमण रोकने में (prevention of infection through vaccination) एंटीबायोटिक (antibiotics) दवाओं का इस्तेमाल कम होता है जो एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोधक रोगजनक बैक्टीरिया (antimicrobial resistance pathogenic bacteria) को बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि शीर्ष 6 जीवाणु रोगजनकों में से केवल न्यूमोकोकल रोग (pneumococcal disease) के लिए टीका उपलब्ध है जबकि अन्य 5 जीवाणु से दुनिया को बचाने के लिए सस्ते टीकों की आवश्यकता है।
डॉ केट ओ ब्रायन, निदेशक, टीकाकरण एवं जैविक विभाग, विश्व स्वास्थ्य संगठन (Dr Kate O'Brien, Director, Department of Immunization and Biology, World Health Organization) ने कहा कि वैक्सीन की नवीनीकरण और विकास (vaccine innovation and development) एक महंगा प्रयास है और अधिकांशतः इसमें असफलता हाथ लगती है तथा समय भी बहुत खराब होता है। लेकिन एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोधक रोगजनक बैक्टीरिया से लड़ने के लिए टीके की खोज बहुत जरूरी है।







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