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लखनऊ। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश सरकार की तमाम योजनाओं के बावजूद जमीनी हकीकत अच्छी नहीं है। हालत यह है कि सुबह 11 बजे तक इटौंजा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर नाममाञ के डाक्टरों की मौजूदगी दिखी। रेडियोलोजी में अल्ट्रासाउंड बंद होने से मरीजों को जांच के लिए बाहर के महंगे अस्पतालों में जाना पड़ रहा है।
नहीं हो रहा है।
नहीं होता है अल्ट्रासाउंड।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इंटौजा पर अल्ट्रासाउंड करवाने आईं सुशीला देवी (29 वर्ष) बताती हैं, “हम यहां पर अपने पेट का अल्ट्रासाउंड करवाने आए थे, लेकिन अल्ट्रासाउंड वाले कमरे में ताला पडा हुआ है। अब हम मजबूरी में प्राइवेट अल्ट्रासाउंड करवाएंगे।”
चिकित्साधिकारी डॉ अखिलेश के अनुसार अल्ट्रासाउंड करने वाले डाक्टर का जब से स्थानान्तरण हुआ है तब से यहां अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा। यहां हर दिन कम से कम 30 से 40 लोगों का अल्ट्रासाउंड होता था। अब करीब इतने ही मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर लगाने पडते हैं।
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शौचालय की दुर्दशा महिला वार्ड में भर्ती मरीजों ने बताया कि रात को पानी की सप्लाई रोक दी जाती है जिससे शौचालय का प्रयोग में बहुत परेशानी होती है। इस बारे में जब हेल्थ जागरण ने यहां के कर्मचारी से शौचालय |
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की बात पूछी तो उसने टीम को बिल्डिंग के बाहर बने एक और शौचालय के बारे में बताया। जब टीम वहां गई तो गंदगी का अंबार दिखाई दिया। यह शौचालय अपने आप में बीमारियों का घर बना हुआ है। यहां पर टीम को शौचालय बडी समस्या जान पडी।
पान-मसालों की पीक से लाल दीवारों-सीढियों के कोने जगह जगह सीढियों और अस्पताल की दीवारों के कोनों पर पान-मसाला थूकने की वजह से गंदगी दिख जाएगी। यह हाल तब है जब आए दिन अधिकारी यहां का निरीक्षण करने आ जाते हैं।
दवाओं की कमी
दवा काउंटर पर मरीजों को दवा दे रहे कर्मचारी ने हिचकिचाते हुए कुछ जरूरी दवा की कमी की बात कही लेकिन उन दवाओ के नाम बताने को टाल गया।
डाक्टरों की भारी कमी
इस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महज कुल जमा 11 डाक्टर हैं जिनमें से चार इमरजेंसी में मरीजों को देख रहे। चिकित्साधिकारी अखिलेश ने बताया कि वर्तमान में सात डाक्टर कोरोना की ड्यूटी में लगे है। इसलिए कुछ डाक्टरों के कमरे में ताले दिख रहे होंगे। जबकि यहां के चिकित्सा अधीक्षक एके दीक्षित स्वयं ही यहां से नदारद थे। पूछने पर डाक्टर नवीन ने बताया कि अधीक्षक साहब कहीं बाहर मीटिंग में गए हुए हैं। जबकि अधीक्षक ने बताया कि उनकी तबीयत बिगडी हुई है। इसलिए आज वे छुट्टी पर हैं। एनेस्थीसिया के डाक्टर भी अस्पताल में नहीं हैं। अल्ट्रासाउंड और एनेस्थीसिया में डाक्टर की तत्काल जरूरत है।
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| पानी की टंकी के पास गंदगी महिला वार्ड में पीने के पानी की टंकी के आस पास गंदगी बीमारी को न्यौता दे रहीं थी। यहां के मरीजों और तीमारदारों ने बताया कि इस गंदगी के बीच पानी लेना मजबूरी हैं। और किसी जगह पर पानी की व्यसस्था नहीं। |
तीमारदारों की सुनवाई नहीं
बख्शी का तालाब के बुजुर्ग परशुराम करीब 1 साल से जच्चा बच्चा को दी जाने वाली धनराशि के लिए अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है अधीक्षक उन्हें सिर्फ दौड़ा रहे हैं बाकी उनका काम नहीं किया जा रहा है 1 साल पहले उनकी बहू ने इसी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया था और सरकारी सुविधा पाने के लिए 1 साल से अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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डॉ एके दीक्षित, चिकित्सा अधीक्षक का स्पष्टीकरण शौचालय को लेकर आपने जो शिकायत की है उसे देखा जाएगा और जल्द ही साफ करवा लिया जाएगा। अस्पताल के अंदर के शौचालय में गंदगी की बात निराधार है फिर भी मैं सफाई कर्मचारी से इस बारे में बात करूंगा। |







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