











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। फाइलेरिया दुनिया की दूसरे नंबर की ऐसी बीमारी है जो बड़े पैमाने पर लोगों को विकलांग बना रही है। यह जान तो नहीं लेती है, लेकिन जिंदा आदमी को मृत के समान बना देती है।
इस बीमारी को हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है। रोग के शुरू होने पर फाइलेरिया की पहचान आसान नहीं है एवं इस बीमारी के लक्षण बीमारी के कीटाणुओं (microfilaria) के शरीर में प्रवेश के कई वर्षों बाद दिखाई देते हैं जो हाथी पांव, हाइड्रोसील का यूरिया आदि के रूप में प्रकट होते हैं l हाथी पांव का कोई इलाज नहीं है l लिंफेटिक फाइलेरियासिस को ही आम बोलचाल की भाषा में फाइलेरिया कहा जाता है।
फाइलेरिया के कारण:
अपर निदेशक, मलेरिया एवं वेक्टर बोर्न डिजीजेज़ डॉ. विन्दु प्रकाश सिंह के मुताबिक यह बीमारी मच्छरों द्वारा फैलती है, खासकर परजीवी क्यूलेक्स फैंटीगंस मादा मच्छर के जरिए। जब यह मच्छर किसी फाइलेरिया से ग्रस्त व्यक्ति को काटता है तो वह संक्रमित हो जाता है। फिर जब यह मच्छर किसी स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो फाइलेरिया के कीटाणु रक्त के जरिए उसके शरीर में प्रवेश कर उसे भी फाइलेरिया से ग्रसित कर देते हैं लेकिन ज्यादातर संक्रमण अज्ञात या मौन रहते हैं और लंबे समय बाद इनका पता चल पाता है। इस बीमारी का कारगर इलाज नहीं है। इसकी रोकथाम ही इसका समाधान है।
डॉ. सिंह ने बताया कि इसीलिए सभी को दवा खिलाई जाती है और साल में एक बार पांच साल तक अगर कोई व्यक्ति दवा खा ले तो उसे फाइलेरिया नहीं होगा । उन्होंने बताया कि इस बार भी 12 जुलाई से विशेष अभियान शुरू किया गया है जिसमें स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर लोगों को दवा अपने सामने खिला रहे हैं।
लक्षण:
आमतौर पर फाइलेरिया के कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन बुखार, बदन में खुजली और पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन की समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाइड्रोसिल (अंडकोषों की सूजन) भी फाइलेरिया के लक्षण हैं। चूंकि इस बीमारी में हाथ और पैर हाथी के पांव जितने सूज जाते हैं इसलिए इस बीमारी को हाथीपांव कहा जाता है। वैसे तो फाइलेरिया का संक्रमण बचपन में ही आ जाता है, लेकिन कई सालों तक इसके लक्षण नजर नहीं आते। फाइलेरिया न सिर्फ व्यक्ति को विकलांग बना देती है बल्कि इससे मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
फाइलेरिया से बचाव
• फाइलेरिया चूंकि मच्छर के काटने से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि मच्छरों से बचाव किया जाए। इसके लिए घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई रखें
• पानी जमा न होने दें और समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें। फुल आस्तीन के कपड़े पहनकर रहें।
• सोते वक्त हाथों और पैरों पर व अन्य खुले भागों पर सरसों या नीम का तेल लगा लें
• हाथ या पैर में कही चोट लगी हो या घाव हो तो फिर उसे साफ रखें। साबुन से धोएं और फिर पानी सुखाकर दवाई लगा लें







हुज़ैफ़ा अबरार April 07 2026 0 462
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 3556
एस. के. राणा January 13 2026 0 3549
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 3381
एस. के. राणा January 20 2026 0 3346
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3101
एस. के. राणा February 01 2026 0 2786
एस. के. राणा February 04 2026 0 2583
उत्तर प्रदेश
सौंदर्या राय May 06 2023 0 102418
सौंदर्या राय March 09 2023 0 106946
सौंदर्या राय March 03 2023 0 107199
admin January 04 2023 0 107054
सौंदर्या राय December 27 2022 0 97530
सौंदर्या राय December 08 2022 0 85925
आयशा खातून December 05 2022 0 140525
लेख विभाग November 15 2022 0 109596
श्वेता सिंह November 10 2022 0 158834
श्वेता सिंह November 07 2022 0 109788
लेख विभाग October 23 2022 0 94674
लेख विभाग October 24 2022 0 98055
लेख विभाग October 22 2022 0 103778
श्वेता सिंह October 15 2022 0 106718
हल्दी पाचन तन्त्र की समस्याओं, गठिया, रक्त-प्रवाह की समस्याओं, कैंसर, जीवाणुओं के संक्रमण, उच्च रक्त
Menopausal hormone therapy was positively associated with development of all cause dementia and Alzh
बलरामपुर अस्पताल में ओपीडी में जब अयांश आया था तो वह बुखार और डायरिया के साथ निर्जलीकरण व कुपोषण से
ई-अस्पताल सिस्टम के जरिये देशभर के दिल्ली एम्स, चंडीगढ़ पीजीआई समेत सरकारी चिकित्सा संस्थानों और प्र
केंद्र द्वारा संचालित तीन अस्पतालों और दिल्ली सरकार के कुछ अस्पतालों के रेजीडेंट डॉक्टरों ने आपातकाल
सीएमओ डॉ. वाइके राय ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। बता दें कि 23
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी कि पिछले 24 घंटों में देश भर में संक्रमण से 43,938 लोग ठीक भी हुए ह
गर्मियों के तपते मौसम में गर्भस्थ और नवजात शिशुओं की देखभाल एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे गर्म मौसम मे
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि एमबीबीएस डॉक्टरों की कमी को पूरा करने की दिशा में लगातार प्रयास कि
“लाल जी टण्डन फ़ाउण्डेशन” के अध्यक्ष आशुतोष टण्डन गोपाल जी ने ‘एक कोशिश ऐसी भी’ संस्था की अध्यक्ष श्

COMMENTS