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नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी ने आज मन की बात में मोटे अनाज और कुपोषण का खास जिक्र किया है। 92वीं बार रेडियो के मासिक कार्यक्रम में बोलते हुए किसानों को मोटा अनाज और ज्यादा उगाने तथा असम के प्रोजेक्ट संपूर्णा का उल्लेख करते हुए कुपोषण दूर करने की बात कही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) ने कहा कि भारत पूरी दुनिया में मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को मोटा अनाज वर्ष (International Year of Millets) के रूप में मानने का फैसला किया है। भारत की बात का 70 देशों ने समर्थन किया है और अब हम सबकी जिम्मेदारी है इसका उत्पादन बढ़ाया जाए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा (Mann Ki Baat) पूरी दुनिया में मोटे अनाज (Millets) का चलन तेजी से आगे बढ़ रहा है जिसका फायदा हमें समय रहते उठाना है। प्राचीन काल से हम लोग मोटे अनाज की खेती कर रहे है और इसका उपयोग (cultivating and using Millets) भी करते है, ये सीधे हमारे स्वास्थ्य से जुड़ा है। वेदों और पुराण (Vedas and Puranas) में भी इसका उल्लेख मिलता है।
मोटे अनाज को जन-आंदोलन (mass movement) बनाना है और इसके लिए जागरूकता बढ़ानी है। किसान भाई-बहनों आग्रह है कि मोटे अनाज को अधिक-से-अधिक अपनाएं और इसका फायदा उठाएं। यह खेती आपको दुनिया की अगली पंक्ति में स्थान दिलवा सकती है। गौरतलब है कि ज्वार, बाजरा, मक्का, चना, मूंग और रागी जैसे मोटे अनाज अपने देश में काफी समय पहले से ही खाए और बोए जाते रहें हैं।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने असम के प्रोजेक्ट संपूर्णा (project Sampoorna) का उल्लेख करते हुए कुपोषण दूर करने की बात कही। असम के बोंगई गांव (Bongai in Assam) में चल रही यह योजना दिलचस्प है और कुपोषण के खिलाफ लड़ाई तथा इस लड़ाई का तरीका भी बहुत यूनिक है। सामाजिक जागरूकता के प्रयास कुपोषण (malnutrition) की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुपोषण दूर करने का आवाह्न करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आगामी पोषण माह में कुपोषण उन्मूलन (malnutrition eradication) के प्रयासों में आप सब जरूर हिस्सा लें। तो इस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी ने आज मन की बात में मोटे अनाज और कुपोषण की बात कही है जो सीधे-सीधे स्वास्थ्य से जुडी है।
Updated by Rajeev Thakur







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