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जयपुर। अंतिम स्टेज में कैंसर मरीजों के दर्द को कम करने के लिए मोर्फिन टैबलेट मिलेगी। कैंसर का असहनीय दर्द झेल रहे मरीजों को आने वाले दिनों में पीड़ा से नहीं लड़ना पड़ेगा। इसके लिए जिला अस्पतालों को लाइसेंस और डॉक्टरों को प्रशिक्षण लेना अनिवार्य है। अंतरराष्ट्रीय औषधि नीति आयोग की ओर से जारी रिपोर्ट में राजस्थान समेत देश के सभी राज्यों को कैंसर (cancer) व एड़स (AIDS) के मरीजों को दर्द से मुक्ति दिलाने की सिफारिश की गई है।
डॉ. संदीप जसूजा, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के अधीक्षक ने बताया कि मौजूदा स्थिति में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल या सरकारी बड़े कैंसर सेंटरों (cancer centres) पर दवा (medicines) मिल जाती है। जिला अस्पतालों में टर्मिनल स्टेज वाले मरीजों को मोर्फिन दवा (morphine medicine) मिल सकेगी।

असहनीय दर्द को कम करने के साथ ही प्रीएनेस्थेटिक - Preanesthetic as well as reducing intolerable pain
आखिरी स्टेज (last stage) में कैंसर लाइलाज (incurable) हो जाता है। अमूमन ऐसे मरीजों को डॉक्टर घर भेज देते हैं। लाचार घरवाले भी दर्द से तड़पते मरीज (patient) के आखिरी सांसें गिनने का इंतजार करते रहते हैं।
दर्द को कम (reduce pain) करने के लिए आमतौर पर मॉर्फिन का उपयोग किया जाता है। यह मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन (myocardial infarction) और असहनीय दर्द को कम करने में भी मदद कर सकता है। यह तीव्र बाएं निलय विफलता और पल्मोनरी एडिमा (pulmonary edema) के डिस्पेनिया से राहत देने में भी सहायक होती है।
डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य - Doctor's prescription required
डॉक्टर की पर्ची पर मिलेगी दवा। जिला अस्पतालों (District hospitals) को नियमानुसार लाइसेंस लेने के साथ ही डॉक्टरों को प्रशिक्षण लेना होगा। मोर्फिन लेने वाले मरीजों का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा।
निर्धारित स्टैंडर्ड प्रोसीजर (prescribed standard procedure) के तहत मरीजों को मोर्फिन टैबलेट दी जाएगी। मरीजों को दी जाने वाली दवा का पूरा रिकार्ड रखना होगा। -सुधीर कुमार शर्मा, मिशन निदेशक (नेशनल हैल्थ मिशन)







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