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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के निजी नर्सिंग कॉलेजों पर निरंतर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सभी कॉलेजों से 16 जनवरी तक उन अस्पतालों की जानकारी मांगी है जहां विद्यार्थी प्रशिक्षण ले रहे हैं। अब सभी कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे 16 जनवरी तक उन अस्पतालों को ब्योरा दें जहां छात्र प्रशिक्षण ले रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से मेडिकल के साथ-साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा की गुणवक्ता बढ़ाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
इसके तहत कॉलेजों (colleges) में अध्यापकों की डिजिटल हाजिरी, लैब की व्यवस्था आदि सुधारी जा रही है। नर्सिंग छात्र (nursing student) अपनी विधा में पूरी तरह से पारंगत हों, इसके लिए उन्हें अस्पतालों में संबद्ध किया जाता है। उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी (medical faculty) के सचिव डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव ने सभी नर्सिंग कॉलेजों (nursing colleges) के प्रधानाचार्य एवं प्रबंधक को निर्देश दिया है कि वे कॉलेज से संबद्ध अस्पताल (hospital) का ब्यौरा दें।
साथ ही उन्होंने बताया कि इसमें कॉलेज से जुड़े कुछ के अस्पताल, संबद्ध चिकित्सालय एवं सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (Primary Health Centre) के बारे में जानकारी मांगी गई है। आनलाइन पूरा विवरण लेने के बाद संबंधित अस्पतालों में जांच कर देखा जाएगा कि कॉलेज के छात्र-छात्राएं वहां प्रशिक्षण प्राप्त करने हैं अथवा नहीं। जिन कॉलेजों के छात्र अस्पताल नहीं जाते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।







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