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गोरखपुर। सोमवार को पूरे देश में राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के रूम में मनाया गया। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त सुविधा और देखभाल मिलने के लिए जागरूकता फैलाना है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गोरखपुर के तत्वावधान में इस उपलक्ष्य में एक कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला के माध्यम से एमबीबीएस के विद्यार्थियों को मातृ मृत्यु के सबसे बड़े कारण पोस्टपार्टम हैमरेज यानी डिलीवरी के बाद होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव का समय से निदान और उपचार करने का प्रशिक्षण दिया गया। वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित "बंडल एप्रोच" द्वारा इस खतरनाक जटिल बीमारी का प्रारंभिक इलाज करने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एम्स की कार्यकारी निदेशक डा सुरेखा किशोर ने कहा कि सभी महिलाओं को सुरक्षित व सम्मानपूर्ण मातृत्व का अनुभव होना चाहिए। पीपीएच का समय पर सटीक इलाज कई माताओं की जिंदगी बचा सकता है और असमय परिवारों को बिखरने से बचा सकता है।
कार्यशाला में मॉडल आधारित व्यावहारिक व क्रियाशील प्रशिक्षण पर जोर दिया गया। स्त्री एवम् प्रसूति विभाग की अध्यक्ष डा. शिखा सेठ ने विद्यार्थियों को पीपीएच से बचाव के तरीकों के बारे में बताया। डा. प्रीति डीडवानिया ने पीपीएच होने के बाद तुरंत किए जाने वाले उपायों पर चर्चा की और डा विभा रानी पिपल ने दवाइयों से ना रुक रहे रक्तस्राव के उपायों के बारे में बताया।
डा प्रीति प्रियदर्शनी ने अपातकालीन स्थिति में भी प्रसूता महिलाओं के सम्मानजनक इलाज पर जोर दिया। सभी विद्यार्थियों ने एम्स में उपलब्ध मॉडल पर स्वयं यूटरिन बैलून टैंपोनेड विधि, रक्तस्राव रोकने के लिया कंप्रेशन देने, Anti shock garment एनएएसजी के इस्तेमाल का अभ्यास किया। कार्यक्रम का संचालन डा प्रीति प्रियदर्शनी ने किया।







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