











































प्रतीकात्मक
टॉन्सिल अंडाकार आकृति में ऊतकों (tissues) का पैड होता है जो कि गले के पीछे के हिस्से में कानों के नीचे की तरफ लार ग्रंथियों (salivary glands) के रूप में मौजूद रहता है। टॉन्सिल्स (Tonsil) वैसे तो हर इंसान के गले में मौजूद रहते हैं, लेकिन जब किसी कारण से इनका आकार बढ़ जाता है या इनमें सूजन आ जाती है तो इस स्थिति को टॉन्सिलाइटिस (Tonsillitis) कहा जाता है। इस हालत में गले में दर्द और कुछ भी निगलने में काफी तकलीफ होती है। सूजन हो जाने से बहुत ज्यादा दर्द होने लगता है और खाना खाने में ही नहीं पानी तक निगलने में भी दिक्कत होती है।
ये हमारी बॉडी में सफेद रक्त कोशिकाओं (white blood cells) को बनाने में मदद करता है, जिससे शरीर को इंफेक्शन (infection) से लड़ने की ताकत मिलती है। कई बार वायरस (virus) और बैक्टीरिया (bacteria) से लड़ते-लड़ते ये खुद ही प्रभावित हो जाता है, ऐसी स्थिति को भी टॉन्सिलाइटिस कहते हैं। समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो ये घातक रूप ले लेता है, जिसे क्रॉनिक टॉन्सिलाइटिस कहा जाता है। टॉन्सिल बढ़ जाने पर खाने-पीने का खास ख्याल रखना जरूरी है। यदि आप बिना सोचे समझे कुछ भी खा लेते हैं तो टॉन्सिल की समस्या बढ़ सकती है।
सर्दियों में टॉन्सिल्स पर जो वायरस हमला करता है, वो हैं एडीनो वायरस। इसकी शुरुआत साधारण सर्दी और बुखार से होती है। वहीं स्ट्रेप्टोकोकस पाइजेंस (streptococcus pyogenes) नामक बैक्टिरिया भी इसका कारण होता है। इसी बैक्टिरिया के कारण निमोनिया होता है।

टॉन्सिलाइटिस के आम लक्षण - Symptom of Tonsilitis
गले में खराश और निगलने पर दर्द, टॉन्सिल में सूजन, मवाद की आशंका, बुखार, सिरदर्द, कान और गर्दन में दर्द, लगातार थकान, नींद नहीं आना, लगातार खांसी बने रहना, ठंड लगना, ग्रंथियों में सूजन, पेट में दर्द और उल्टी, जी मिचलाना, आवाज में बदलाव, सांसों की बदबू, मुंह खोलने में कठिनाई
सर्दियों में टॉन्सिलाइटिस से बचना है तो बरतें ये सावधानी - Precautions
सर्दी के मौसम में गले में इन्फेक्शन का खतरा अधिक रहता है। कई बार टॉन्सिलाइटिस को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके संक्रमण को फ़ैलने से रोकने के उपाय जरूर किए जा सकते हैं।
1. हाथों को गर्म पानी और साबुन से साफ करें।
2. पानी उपलब्ध न हो तो हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. ठंडी चीजों खाने-पीने से बचें।
4. गले में खराश है तो गर्म पानी के गरारे करें।
5. खाँसी बनी हुई है तो तेल-घी का सेवन कम कर दें।
6. गले के दर्द को कम करने के लिए दवा लें।
7. गले को नम रखने के लिए लगातार पानी पीते रहें।
8. सिगरेट के धुएं और गले में जलन पैदा करने वाली चीज़ों से बचें।
9. आराम करें।







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