











































लखनऊ। आम तौर पर खर्राटे लेना सुखदाई नींद की निशानी माना जाता है लेकिन ये तब दुखदाई हो जाता है जब परिवार को इससे दिक्कत होने लगती है। क्या आप जानते हैं कि खर्राटे तो संकेत मात्र है कि आप गम्भीर बीमारियों का सामना करने वाले हैं। खर्राटों के कारण मशहूर गायक व संगीतकार बप्पी लहरी की जान चली गई थी।
रविवार को राजधानी के आईएमए भवन में ईएनटी (ENT) पर सीएमई (CME) आयोजित की गई जहां लोहिया अस्पताल में ईएनटी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर (Department of ENT Lohia Hospital) डॉ मोहित सिन्हा ने हेल्थ जागरण से खास बातचीत करते हुए खर्राटों की वजह, इससे होने वाली बीमारियाँ (diseases) और बचाव की अमूल्य जानकारी दी।

हेल्थ जागरण - डॉ साहब खर्राटे (sleep apnea) आने की वजह क्या है और इससे क्या नुकसान हो सकता है?
डॉ मोहित सिन्हा - खर्राटे लेना एक गम्भीर त्रासदी बन गई है और इसे हिडेन एपीडेमिक (Hidden Epidemic) कहा जाने लगा है। कोविड-19 के दौरान लोग घरों में कैद रहें जिससे व्यायाम बंद हो गया और मोटापा बढ़ने लगा जिसके कारण खर्राटों की गम्भीरता बढ़ती गई।
अगर कोई व्यक्ति 40 वर्ष से अधिक का है, उसको ब्लडप्रेशर (blood pressure) की समस्या है और तेज खर्राटे लगभग हफ्ते में चार दिनों तक आते हैं तो वह स्लीप एपनिया का शिकार हो सकता है। उनको डायबिटीज (diabetes), कार्डियक अटैक (cardiac attack), हाइपरटेंशन (hypertension), हार्ट फेलियर (heart failure) और कैंसर (cancer) तक हो सकता है। दुःख की बात यह है कि इनको जानकारी नहीं होती कि ऐसा क्यों हो रहा है। ऐसे लोग बीपी इत्यादि का इलाज करवाने आते हैं लेकिन मुख्य बीमारी के विषय में नहीं जानते हैं। इसके लिए जनजागृति (public awareness) बहुत जरूरी है।
हेल्थ जागरण - मशहूर संगीतकार बप्पी लहरी की जान खर्राटों के कारण चली गई थी। क्या कहना चाहेंगे?
डॉ मोहित सिन्हा - जी बिल्कुल सही कहा, ज्यादा वेट गेन करना, एक्सरसाइज ना करने से इस छुपी हुई बीमारी की गिरफ्त में लोग आते जा रहें हैं। खर्राटों को लेकर समाज में कोई जानकारी नहीं थी और यहां तक कि मेडिकल कॉरिकुलम में भी इसका खास जिक्र नहीं था लेकिन अब इसको लेकर काफी काम हो रहा है।
हेल्थ जागरण - समाज में स्लीप एपनिया को लेकर कैसी जागरूकता होनी चाहिए?
डॉ मोहित सिन्हा - देखिए खर्राटे सबको आते हैं। कोई गहरी नींद में है तब आ सकता है या मदिरापान किया है तब आ सकते हैं। लेकिन उम्र 50 के आसपास है, खर्राटे तेज आते हैं और हफ्ते में चार दिनों से ज्यादा आते हैं तथा गरदन मोटी है, ब्लडप्रेशर की बिमारी है तो उसको स्लीप एपनिया की बिमारी होना सम्भव हो सकता है। खर्राटे तो एक संकेत है कि आपको यह बीमारी हो सकती है। खर्राटे लेने का मतलब आपकी हवा लेने का रास्ता बंद हो गया है। इससे मस्तिष्क में आक्सीजन नहीं पहुंच पाती जिसके कारण गंभीर बीमारियां जैसे डायबिटीज, कार्डियक अटैक, हाइपरटेंशन, हार्ट फेलियर और कैंसर तक हो सकता है।
हेल्थ जागरण - जीवनशैली में बदलाव करके क्या इस बीमारी से बचा जा सकता है?
डॉ मोहित सिन्हा - जी बिल्कुल, यह भी एक तरीका है क्योंकि यह लाइफस्टाइल डिज़ीज़ है इसलिए जीवनशैली में बदलाव कर इससे बचा जा सकता है। ये जरुरी नहीं कि मोटे व्यक्ति को ही यह बिमारी हो बल्कि पतले व्यक्ति भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। इसके लिए संतुलित आहार, व्यायाम, फास्ट फूड का सेवन ना करना बहुत जरूरी है। जिन लोगों को नाक की एलर्जी होती है उनमें यह समस्या बढ़ जाती है।
हेल्थ जागरण - खर्राटों को लेकर क्या उपचार है और लोहिया अस्पताल में इसके लिए क्या इलाज उपलब्ध है?
डॉ मोहित सिन्हा - इसके लिए डॉक्टर से परामर्श लेकर दवा खाए। लोहिया अस्पताल में इसका इलाज शुरू होने जा रहा है और प्रत्येक सोमवार को ईएनटी विभाग में ओपीडी होती है जहां दिखाया जा सकता है। हम इसके इलाज के लिए आगे बढ़ रहें हैं और आने वाले समय में इसका अच्छा इलाज कर लेंगे।
तो दोस्तों देखा आपने कि खर्राटे लेना कितना गम्भीर हो सकता है। स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियां देखने के लिए हेल्थ जागरण को जरुर फॉलो करें।







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