











































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन सैंकड़ों की संख्या में मरीज आते है लेकिन खाली बेड ना मिलने की वजह से उन्हें दिक्क़ते उठाते हुए अन्य सरकारी या प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। कई बार इस चक्कर में देर हो जाने से मरीजों की जान पर भी बन आती है। हालाँकि स्क्रीन पर खाली बेड की सूचना दी जाती है लेकिन इसके लिए ट्रॉमा सेंटर आना पड़ता है।
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर (trauma center KGMU) में विभिन्न विभागों के लगभग 400 बेड हैं। यहाँ प्रतिदिन सैंकड़ों की संख्या में मरीज आते हैं। मरीजों (patients) को लौटाने की शिकायतों को देखते हुए ट्रॉमा सेंटर में स्क्रीन लगाकर उपलब्ध बेड की संख्या प्रदर्शित करने की व्यवस्था शुरू की गई है। इसे हर आठ घंटे में अपडेट किया जाता है। दिक्कत यह है कि खाली बेड (vacant beds) की सूचना ट्रॉमा आने पर ही पता चल पाती है। इसे वेबसाइट पर लिंक के माध्यम से उपलब्ध कराने के लिए पहल की गई है पर इसमें अभी तक सफलता नहीं मिली है।
जबकि लोहिया अस्पताल (Lohia Hospital) में एक से दूसरे विभाग में मरीज शिफ्ट करने के लिए मोबाइल एप की व्यवस्था शुरू हुई है। इसमें एप पर मरीज का ब्योरा अपलोड कर दिया जाता है। इससे तुरंत सूचना अपडेट हो जाती है और भागदौड़ बचती है।
केजीएमयू, प्रवक्ता, डॉ सुधीर सिंह (KGMU, Spokesperson, Dr Sudhir Singh) का कहना है कि ट्रॉमा सेंटर में ई-हॉस्पिटल की सुविधा के तहत खाली बेडों की संख्या स्क्रीन पर प्रदर्शित की जा रही है। इसे ऑनलाइन अपडेट करने के लिए आईटी सेल के साथ बैठक की गई है। इसके लिए कुछ अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होगी। इस पर विचार किया जा रहा है। व्यवस्था होने पर यह प्रणाली व्यवहार में आ जाएगी।
प्रो संदीप तिवारी, चिकित्सा अधीक्षक, ट्रॉमा सेंटर (Prof Sandeep Tiwari, Medical Superintendent, Trauma Center) कहते है कि हर वार्ड में खाली बेड का विवरण अपडेट करने की जिम्मेदारी रेजीडेंट पर डालना सही नहीं होगा। मरीज के एक से दूसरे वार्ड में शिफ्ट (patients shifted from ward) होने पर उसका विवरण तुरंत अपडेट होना जरूरी है। ऐसा न होने पर बेड की सही सूचना नहीं मिल पाएगी। इसके लिए हर वार्ड में एक-एक कंप्यूटर सिस्टम और सूचना अपलोड करने के लिए 24 घंटे ऑपरेटर चाहिए। इसके बिना यह प्रणाली काम नहीं कर सकती है।







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