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बांदा (लखनऊ ब्यूरो)। यूपी के जनपद बांदा में डिप्थीरिया (गलाघोंटू) संक्रमण के प्रकोप के बीच बुखार से ग्रसित बच्चों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इस बीमारी ने अब तक 5 मासूमों को निगल लिया है जिससे लोगों में भय का माहौल व्याप्त है।
जिले में डिप्थीरिया (diphtheria) का कहर इस कदर है कि बच्चों के अलावा युवा और बुजुर्ग भी बुखार से ग्रसित होकर सरकारी और गैर सरकारी अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें कई महिलाएं भी शामिल हैं। बांदा के त्रिवेणी और पून गांव में 5 बच्चों की मौत इस बीमारी के चलते हो चुकी है। जिला हॉस्पिटल पहुंचने वाले बच्चों (children) में प्रतिदिन 2 से 3 बच्चों में इस बीमारी के लक्षण पाए जा रहे हैं।
बच्चों की मौतों से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। इसके लिए टीकाकरण (vaccination) अभियान शुरू किया गया है। लेकिन अभी भी त्रिवेणी गांव में यह बीमारी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यहां अभी भी कई बच्चे बीमार हैं। जिनमें इस बीमारी के लक्षण (symptoms) पाए गए हैं।
जिला अस्पताल (hospital) में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ आर के गुप्ता ने बताया कि यहां बुखार से पीड़ित आ रहे बच्चों में कुछ ऐसे भी बच्चे हैं, जिनमें डिप्थीरिया (dyptheria) के लक्षण मिलते हैं। उन्हें अलग वार्ड में शिफ्ट किया गया है। उन्होंने बताया कि डिप्थीरिया बैक्टीरिया जनित बीमारी है। रोगी के खांसने, छींकने के दौरान एक से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच कर दूसरे को भी संक्रमित (infection) कर देती है। इस बीमारी में तेज बुखार गले में खराश, गले में सूजन, भोजन निगलने में व सांस लेने में तकलीफ होती है। इस बचाव के लिए बच्चों को डिप्थीरिया के तीन टीके लगते हैं।







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