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लखनऊ। दन्त चिकित्सा में गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया ने बड़ा कदम उठाया है। काउंसिल ने बीडीएस के पाठ्यक्रम में बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजा है।
देश में विदेशों की भांति दन्त चिकित्सा (dentistry) के सुनहरे अवसर नहीं है और यह विभाग लगभग उपेक्षित सा रहता था। लोग केवल दांतों में तकलीफ होने पर ही डेंटिस्ट (dentist) के पास जाते थे लेकिन अब माहौल बदल रहा है। अब लोग दांतों तथा मुंह की सुन्दरता और ओरल डिजीज के लिए भी डेन्टल क्लिनिक (dental clinic) जाते हैं।
बढ़ते बाजार के साथ चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं और अब पहले की अपेक्षा दन्त चिकित्सा कहीं आगे बढ़ चुकी है। लोगों का रुझान भी इस ओर बढ़ा है और लगातार नयी तकनीकें भी आ रही है। डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (Dental Council of India) ने दन्त चिकित्सा में गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से बीडीएस के पाठ्यक्रम में बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजा है।
काउंसिल ने प्रस्ताव में सुझाव दिया है कि एमबीबीएस (MBBS) की तरह बीडीएस कोर्स भी साढ़े पांच साल का हो। इसके अलावा एक साल की इंटर्नशिप (BDS internship) के बाद छात्रों को फिर से एक परीक्षा पास करनी होगी। उत्तीर्ण छात्रों को डिग्री मिल जाएगी और फेल होने पर दुबारा परीक्षा पास करनी होगी।
इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद बीडीएस की डिग्री (BDS degree) प्राप्त करने में 6 माह अतिरिक्त लगेंगे। इंटर्नशिप के बाद होने वाली परीक्षा में बीडीएस पाठ्यक्रम से जुड़े सवाल ही पूछे जाएंगे और उत्तीर्ण छात्र प्रैक्टिस कर सकेंगे।
जानकारों का मानना है कि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से एक तो बीडीएस पाठ्यक्रम (BDS curriculum) में एकरूपता आएगी दूसरे दन्त चिकित्सा की गुणवत्ता में वृद्धि होंगे। देश को बेहतर डेंटिस्ट मिल सकेंगे और जनता को भी स्तरीय इलाज (quality treatment) प्राप्त हो सकेगा।







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