












































लखनऊ। आज अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस तथा विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर हेल्थ जागरण ने बच्चों और माताओं को लेकर झलकारी बाई अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं जानी पहचानी महिला व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रंजना खरे से खास बातचीत की।
बाल दिवस तथा मिल्क डे (Children's Day and Milk Day) दोनों की बात एक साथ आने पर सहज ही बच्चों और माताओं का ध्यान आता है। आज कल फैशन की बात कहें या फीगर कांशसनेस (figure consciousness) या लाइफस्टाइल की बात हो अक्सर सुनने में आता है कि माताएं अपने नवजात को स्तनपान (breastfeed) नहीं कराती है। इससे क्या नुकसान होता है इसको लेकर हेल्थ जागरण ने डॉक्टर रंजना खरे से महत्वपूर्ण सवालों के जवाब लिए।
नवजात को शुरू के छः महीने तक नियमित स्तनपान कराने पर बल देते हुए डॉ रंजना खरे ने कहा कि मां का दूध (mother's milk) बच्चे के लिए अमृत समान है। सरकारी योजनाओं के माध्यम से जन जागरुकता अभियान चलाया जाता है जिसमें स्तनपान कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। मां जब बच्चे को जन्म देती है तो वह छः महीने तक केवल ब्रेस्ट फीडिंग ही करवाएं, यही बच्चे का सर्वोत्तम आहार माना गया है, इसे एक्सक्लूसिव ब्रेस्ट फीडिंग कहते हैं और इसी के लिए मां प्रोग्राम राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर चल रहा है।
डॉ रंजना खरे ने कहा कि मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वश्रेष्ठ दूध है और कोई भी दूध मां के दूध का मुकाबला नहीं कर सकता है। आज के इस महत्वपूर्ण दिन पर सभी स्त्रियों को यह संदेश है कि बच्चों को अपना दूध अवश्य पिलाएं। इसमें फैशन (Fashion) या लाइफस्टाइल (lifestyle) आड़े नहीं आना चाहिए। कई महिलाएं नौकरी करती है तब भी वे बच्चे को दूध पिला सकती है। कोई भी संस्थान मां को बच्चे को दूध पिलाने के लिए रोकता नहीं है। नौकरी का समय भी 6-8 घंटे होता है। आज कल क्रेच आदि की सुविधाएं भी आफिस में उपलब्ध है। मतलब कि मां को यह सुनिश्चित करना है कि उसे स्तनपान जरुर करवाना है।
दूध पिलाने से फीगर बिगड़ने के सवाल का जवाब देते हुए डॉ रंजना खरे ने कहा कि मां के लिए बच्चे से बढ़ कर कुछ भी नहीं है तो बच्चे के आगे फीगर क्या चीज है। फीगर तो मां बनने की शुरुआत में ही बिगड़ने लगता है। मां बच्चे को नौ महीने पेट में रखती है तो चेलेंजेज तो होते ही हैं लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि मां बच्चे को दूध ही ना पिलाएं। फिर भी अगर कोई बहुत ज्यादा फीगर कांशसनेस लेडी है तो वह व्यायाम (exercise) और खानपान (diet) से अपने फीगर को 90-92% दुबारा पा सकती है।
देखिए हिरोइन्स से बढ़ कर फीगर कांशसनेस कोई नहीं होता है। फिल्म अभिनेत्रियां भी मां बनती है और ब्रेस्ट फीडिंग करवाती है। तो जब ये सितारे स्तनपान करवाते हैं तो आम औरत क्यों नहीं करवा सकती है। अभिनेत्रियां ब्रेस्ट फीडिंग के बारे में जानती समझती है और मां बनने के बाद बच्चे को अपना दूध पिलाती है। मां का दूध ही बच्चे के लिए सर्वोत्तम आहार है।







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