











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। ठंड का मौसम न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है क्योंकि तापमान में गिरावट होने से मिर्गी के दौरे पड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इस स्थिति में मस्तिष्क में अचानक और अत्यधिक विद्युत निर्वहन बार-बार दौरे या 'फिट' को बढ़ा सकता है। लोगों में मिर्गी चौथा सबसे ज्यादा होने वाला सामान्य न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, और यह किसी भी आयु वर्ग के लोगों को हो सकता है। यह एक केंद्रीय न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जिससे मस्तिष्क में असामान्य गतिविधियां होती है, इस वजह से पीड़ित व्यक्ति कभी-कभी बेहोश और अचेत रहने के अलावा असामान्य व्यवहार भी करने लगता है।

रीजेंसी हॉस्पिटल, लखनऊ के डॉक्टर सलाह देतें है कि जिन मरीज़ों में पहले से न्यूरोलॉजिकल समस्या मौजूद है और वे लोग उन क्षेत्रों में रह रहे हैं जहां तापमान में भारी गिरावट आई है, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें डॉक्टरी मदद आसानी से मिल जाए। ऐसे मरीजों के परिवार के सदस्यों को अतिरिक्त सतर्क रहना चाहिए। 2018 के एक अध्ययन के अनुसार सर्दियों के दौरान मिर्गी के दौरे ज्यादा पड़ते हैं।
रीजेंसी सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के न्यूरोलॉजिस्ट- कंसल्टेंट ,डॉ रोहित राव पुष्कर ने कहा, "कुछ फैक्टर हैं जो मिर्गी के दौरे को बढ़ा सकते हैं, ये फैक्टर है जिसे कि भारी शराब का सेवन, नींद की कमी, पीरियड्स, उपवास, बहुत ठंडा या बहुत गर्म शावर, प्रकाश की तेज चमक और मिर्गी-रोधी दवाओं को न खाना आदि। जो लोग पहले से ही पीड़ित हैं, वे नर्वस
सिस्टम डिसऑर्डर जैसी गंभीर समस्याओं से बचने के लिए अत्यधिक शराब न पीने और पर्याप्त नींद लेकर इस समस्या से कुछ हद तक राहत पा सकते हैं। कोविड19 महामारी के कारण मिर्गी के रोगी न्यूरोलॉजिस्ट के पास जाने और परामर्श लेने में झिझकते हैं, इससे दौरे पड़ सकते हैं, गंभीर चोट लग सकती है और बार-बार दौरे पड़ना बच्चों में विकासात्मक देरी का सामान्य कारण है और वयस्कों में संज्ञानात्मक असामान्यताएं और एस्पिरेशन प्यूमोनिया के साथ, अचानक
झटका लगना हड्डियों का टूटना, सिर में चोट लगना, पास में किसी नुकीली चीज से चोट लगना या मौत से कारण बन सकता है । मिर्गी में मरीजों की अचानक अप्रत्याशित मौत भी हो सकती है"
कुछ ओवर-द-काउंटर दवाएं जैसे एंटीडिप्रेसेंट और स्टिमुलेंट्स भी कुछ लोगों में दौरे को बढ़ाने के जिम्मेदार हैं। मिर्गी के लक्षणों में हाथ, पैर या चेहरे की मांसपेशियों में अकड़न, अचेत होने, पैरों या बाहों में मरोड़ होने, हाथ या पैर में पिन चुभने जैसी संवेदनाएं शामिल हो सकती हैं।मिर्गी का पता आमतौर पर तब चलता है जब किसी व्यक्ति को एक से ज्यादा दौरे पड़ चुके होंते हैं। हालांकि यह देखा गया है कि सभी दौरे मिर्गी के कारण नहीं होते हैं। कुछ कम ब्लड शुगर और बेहोशी के कारण भी हो सकते हैं। यह बीमारी ज्यादातर बच्चो और 65 से ऊपर वाले लोगो में होती है।
मिर्गी का इलाज संभव है लेकिन इस बीमारी से पीड़ित कई लोगों को उचित इलाज नहीं मिल पाता है, खासकर भारत जैसे विकासशील देशों में कई लोग मिर्गी का इलाज बेहतर ढंग से नहीं करा पाते हैं। मिर्गी का इलाज उम्र और बीमारी के मूल कारण के हिसाब से अलग-अलग होता है। इसमें डोज बदलना, फिर डोज बंद करना, फिर देना या विशेष दवा देना भी शामिल हो सकता है।
डॉ रोहित राव पुष्कर ने आगे कहा, "मिर्गी के दौरे को बढ़ाने वाले संभावित ट्रिगर्स से परिचित होने से दौरे को होने से रोकने में मदद मिल सकती है। अस्थिर मौसम की स्थिति में दौरे बार-बार आते हैं, लेकिन हमें ठंड के मौसम में मौजूदा न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से पीड़ित लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। बच्चों का विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए क्योंकि सर्दियों के दौरान उन्हें खांसी, सर्दी और छाती में संक्रमण होने की ज्यादा संभावना होती है और साथ में होने वाले बुखार से मिर्गी वाले बच्चे में दौरे पड़ सकते हैं।"







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