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आईआईटी कानपुर और एम्स पटना ने कान की बीमारियों का पता लगाने वाली डिवाइस बनाई

आईआईटी कानपुर के केमिकल इंजीनियरिंग के प्रो. जयंत कुमार सिंह और उनकी टीम थर्मामीटर, ग्लूकोमीटर, थर्मल गन, ब्लड प्रेशर मॉनीटर की तरह कान की डिवाइस तैयार की है। 

विशेष संवाददाता
July 13 2022 Updated: July 13 2022 23:51
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आईआईटी कानपुर और एम्स पटना ने कान की बीमारियों का पता लगाने वाली डिवाइस बनाई प्रतीकात्मक चित्र

कानपुर। कान की बीमारी का पता लगाने के लिए, आईआईटी के प्रोफेसर ने एम्स पटना के डॉक्टरों के साथ मिलकर एक  प्रोटोटाइप बनाया है। इस प्रोटोटाइप (prototype) से निकलने वाली रोशनी कान में जाएगी और बीमारियों की सारी जानकारी डिवाइस में स्टोर की गई मेमोरी में आ जाएगी। इसका प्रिंटआउट निकाला जा सकेगा। अक्सर बच्चों से लेकर बड़ों में कान बहने, फंगस, सूजन सहित अन्य बीमारियां होती हैं। 


अभी कान (ear) से जुड़ी बीमारियों का पता लगाने के लिए उपकरणों को कान में डालना पड़ता है। इस प्रक्रिया में मरीज़ को दिक्कत का सामना करना पड़ता  है। इस समस्या को दूर करने के लिए आईआईटी (IIT) के केमिकल इंजीनियरिंग के प्रो. जयंत कुमार सिंह और उनकी टीम थर्मामीटर, ग्लूकोमीटर, थर्मल गन, ब्लड प्रेशर मॉनीटर की तरह कान की डिवाइस तैयार की है। 


आईआईटी की टीम व एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों ने अब तक पांच हजार से अधिक मरीजों की कान की बीमारियों संबंधित रिपोर्ट तैयार की है। इनमें प्रमुख बीमारियों की जांच करने की सुविधा डिवाइस में दी जाएगी। डिवाइस आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (artificial intelligence) और मशीन लर्निंग पर आधारित है। 


प्रो. जयंत कुमार सिंह ने बताया कि डिवाइस से ग्रामीण क्षेत्रों में कान के मरीजों की जांच करना आसान हो जाएगी। आशा वर्कर और एएनएम घर-घर जाकर परीक्षण कर सकेंगी। यह डिवाइस जल्द ही उपयोग के लिए उपलब्ध होगा।

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