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भारत में घट रही प्रजनन क्षमता, पितृसत्तात्मक मानसिकता जिम्मेदार 

भारत में लगभग 10.14 प्रतिशत जोड़े इंफरटाइल हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि इनफर्टिलिटी न केवल महिलाओं में बढ़ रही है बल्कि पुरुषों में इनफर्टिलिटी की संख्या और भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही है।

हुज़ैफ़ा अबरार
July 30 2022 Updated: July 30 2022 13:43
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भारत में घट रही प्रजनन क्षमता, पितृसत्तात्मक मानसिकता जिम्मेदार  प्रतीकात्मक चित्र

लखनऊ। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की रिपोर्ट में पाया गया है कि देश की 10 से 15 प्रतिशत आबादी, प्रजनन क्षमता से संबंधित जटिलताओं से जूझ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार भारत में 15 से 20 प्रतिशत इनफर्टिलिटी मौजूद है तथा मेल इनफर्टिलिटी इसमें लगभग 40 प्रतिशत का योगदान देता है। 


इंडियन सोसाइटी ऑफ असिस्टेड रिप्रोडक्शन (Indian Society of Assisted Reproduction) के अनुसार भारत में लगभग 10.14 प्रतिशत जोड़े इंफरटाइल हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि इनफर्टिलिटी (infertile) न केवल महिलाओं में बढ़ रही है बल्कि पुरुषों में इनफर्टिलिटी की संख्या और भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। इन सभी बातों से यह स्पष्ट होता है कि मेल इनफर्टिलिटी (male infertile) आज के समय में एक बहुत बड़ा मेडिकल मुददा (medical issue) बन चुका है। देश की आबादी 1,3 बिलियन है और हर 7 व्यक्तिओं में से एक व्यक्ति को इस समस्या से जूझना पड़ रहा है। 


डॉ शिप्रा बागची इन्फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट (Infertility Specialist) बागची आईवीएफ सेंटर लखनऊ ने कहा हमारे यहां आने वाले रोगियों की संख्या में 14 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 


डॉ वरादा अरोड़ा डायरेक्टर एवं कंसल्टैंट वैलेंसिया आईवीएफ लखनऊ (Valencia IVF Lucknow) ने कहा पुरुषों में इन्फर्टिलिटी के मामले बढ़े हैं, जो महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के मामलों के बराबर हैं। इनफर्टिलिटी के मुददों के लगातार बढऩे के बावजूद भी विशेषकर पुरुषों में अभी भी जागरूकता की कमी है और वह इस बात को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि समस्या उनके अंदर भी है। यदि गर्भधारण (pregnancy) में देरी होती है या फि र गर्भधारण नहीं हो पाता है तो ऐसे बहुत ही कम पुरुष हैं जो अपनी स्वेच्छा से जांच के लिए आगे आते हैं।


इस तरह की मानसिकता के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं जिनमें मुख्य रुप से पितृसत्तात्मक मानसिकता, गलत धारणाएं तथा फर्टिलिटी के मामले में पुरुषों का अहंकार आदि शामिल हैं। कुछ सामान्य मिथक इस प्रकार हैं। इनफर्टिलिटी केवल महिलाओं में होती है, उम्र बढऩे से केवल महिलाओं की प्रजनन (fertility of women) क्षमता कम होती है, न कि पुरुष की, मोटापे का प्रजनन क्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, यही सारे कारण हैं कि पुरुषों में इनफर्टिलिटी का निदान देर से होता है बल्कि कुछ मामलों में बिल्कुल भी नहीं होता है। हालांकि एक सकारात्मक बात यह है कि कुछ विशेष क्षेत्रों में जागरूकता बढऩे के कारण कई जोड़े गर्भधारण की समस्याओं के विषय में अपने विशेषज्ञों से परामर्ष ले रहे हैं।


मेल इनफर्टिलिटी का अर्थ है कि पुरुषों में स्पर्म काउंट (low sperm count) काफी कम है, स्पर्म की क्वालिटी ठीक नहीं है, कोई जेनेटिक मुद्दा है या फिर कोई स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं हैं जैसे कि डायबिटीज (diabetes), ओबेसिटी (obesity), मालनूट्रिशन (malnutrition), स्ट्रेस, अत्यधिक शराब का सेवन या तंबाकू का सेवन। इसके अलावा तापमान में वृद्धि तथा बहुत टाइट कपड़े पहनना भी अन्य कारक हैं जिससे मेल इनफर्टिलिटी हो सकती है।

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