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डॉ. सूर्यकान्त (Dr. Suryakant) ने विभाग के 75 वर्षों की यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी दी एवं बताया कि विभाग में फेफड़े की बीमारियों के निदान एवं चिकित्सा की सर्वोत्तम सुविधा उपलब्ध है एवं टीबी एवं अन्य बीमारियों में प्रदेश के सभी मेडिकल कालेज को सहयोग प्रदान कर रहा है।
रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने कहा कि विभाग ने कोविड काल (covid period) में दिन-रात सक्रिय रहकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को वायरस से बचाने का काम किया। अपने विभाग की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखते हुए विश्वविद्यालय के अन्य विभागों को भी सहयोग प्रदान किया। इसका नतीजा रहा कि विभागों के आंतरिक मूल्यांकन में रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग दूसरे स्थान पर रहा। डॉ. सूर्यकान्त ने कहा कि केजीएमयू से शिक्षा ग्रहण कर आज देश ही नहीं विदेश में भी लोग अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. सूर्यकान्त ने विभाग के पुरातन चिकित्सकों (अल्युमिनाई) को अवगत कराया कि भविष्य में सभी को विभाग की तरफ से चिकित्सा जगत के नए शोध एवं जानकारियों से अवगत कराया जायेगा एवं हर पांच साल पर ऐसा आयोजन किया जायेगा।







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