











































लखनऊ। गत दिनों उपमुख्यमंत्री तथा चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने बलरामपुर अस्पताल में चार नवीन भवनों का शिलान्यास किया था जब वह 150 टीबी मरीजों को गोद लेने के कार्यक्रम में आए थे। आज हेल्थ जागरण ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ जी पी गुप्ता से मिल कर अस्पताल में शुरू हुई चार नयी सुविधाओं की जानकारी ली।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (Chief Medical Superintendent) डॉ जी पी गुप्ता ने बताया कि पहले की बात करें तो हिस्टोपैथोलॉजी (histopathology) का उद्घाटन मंत्री जी ने किया। पूरे उत्तर प्रदेश में यह प्रांतीय चिकित्सा सेवा का पहला अस्पताल हो गया है जिसका स्टैंडर्ड नेशनल लेवल का हो गया है। इस पर हम लोग काफी दिनों से काम कर रहे थे कि बलरामपुर अस्पताल की रिपोर्ट्स मेडिकल कॉलेज के बराबर हो जाएं। यहां गांठ की सम्पूर्ण जांच की जाती है कि कहीं कैंसर तो नहीं, है तो किस स्थिति में है।
दूसरे माइक्रोबायोलॉजी लैब (microbiology lab) का उद्घाटन मंत्री बृजेश पाठक ने किया। यहां वैक्टीरिया की सम्पूर्ण जांच की जाती है। मरीज के शरीर से पस, मूत्र, ब्लड इत्यादि लेकर उसका कल्चर करते हैं जिससे वैक्टीरिया की पूरी जानकारी मिल जाती है। इस लैब में पता किया जाता है कि किस तरह का वैक्टीरिया है और किस दवा से रिस्पांस करता है। इससे फायदा यह होगा कि तीन दिनों में पता चल जाता है कि कौन सा कीटाणु है और किस दवा से रिस्पांस करेगा।
तीसरे मल्टी टीबी ड्रग रजिस्टेंस वार्ड (Multi TB Drug Resistance Ward) का लोकार्पण किया गया। कई बार क्षय रोगी थोड़ा ठीक होने पर दवा खाना बंद कर देते हैं और तकलीफ होने पर दुबारा दवा लेने लगते हैं। इससे टीबी का कीटाणु ड्रग रजिस्टेंस (drug resistance) क्रीएट कर लेता है और मरीज पर दवा का असर होना बंद हो जाता है। ऐसे मरीज डॉक्टर के लिए भी ख़तरनाक सिद्ध हो सकते हैं इसलिए उनके उपचार की व्यवस्था अलग से करनी होती है।एमडीआर टीबी का यहां इलाज किया जाता है।
चौथे अस्पताल में विज्ञान भवन (Vigyan Bhawan) काफी रुग्ण हो गया था जिसको रेनोवेट कर के उसका उद्घाटन करवाया गया है। विज्ञान भवन में डॉक्टर्स, नर्सेज और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए सेमीनार इत्यादि का आयोजन किया जाता है।
हेल्थ जागरण ने डॉक्टर जी पी गुप्ता से पूछा कि टीबी के मरीजों को इलाज के दौरान पुष्टाहार भत्ता नहीं मिल रहा है? उन्होंने बताया कि यह हमारे हाथ में नहीं है और उच्चाधिकारियों को जानकारी है। जैसे ही बजट आएगा उनके एकाउंट में पैसे जमा हो जाएंगे।
तो देखा आपने, अब बलरामपुर अस्पताल में ये नयी सुविधाएं उपलब्ध हैं जिनके लिए अभी तक पीजीआई, केजीएमयू या लोहिया अस्पताल जाना पड़ता था।







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