











































प्रतीकात्मक चित्र
प्रत्येक महिला की जिंदगी में प्रेग्नेंसी बहुत महत्वपूर्ण और नाजुक समय होता है और इस दौरान महिलाओं को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना होता है क्योंकि उनके शिशु को उनके आहार से ही पोषण मिलता है जिससे वो विकास कर पाता है। कई महिलाओं नॉन वेजिटेरियन होती हैं लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि उन्हें अपनी प्रेग्नेंसी डाइट में मछली को शामिल करना चाहिए या नहीं।
हेल्थ विशेषज्ञों का कहना है कि मछली बहुत पौष्टिक होती है और अगर आप नॉन वेजिटेरियन हैं, तो आपको अपनी डाइट में फिश को अवश्य शामिल करना चाहिए। आप प्रेग्नेंसी (Pregnancy) में फिश खा सकती हैं लेकिन आपको इसका चयन बहुत सावधानी से करना होगा और इसकी मात्रा का भी ध्यान रखना होगा। शुरुआती विकास के दौरान शिशु को कई तरह के पोषक तत्वों की जरूरत होती है जो फिश (fish) में प्रचुर मात्रा में होते हैं।
विशेषज्ञों (experts) के अनुसार मछली के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं जो कार्डियोवस्कुलर (cardiovascular) बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद करते हैं। प्रेग्नेंसी के आखिर में सीएनएस ग्रोथ और भ्रूण (fetal) के मस्तिष्क के विकास के लिए ओमेगा-3 आवश्यक होता है। ये शिशु को मां के आहार से ही मिलते हैं। प्रेग्नेंसी (pregnancy) में ऑयली फिश खाने से शिशु के बर्थ वेट और प्रेग्नेंसी के पूरे होने पर हल्का सा पॉजिटिव असर देखा गया है।
मछली में लीन प्रोटीन होता है जो कि भ्रूण के विकास के लिए एक अहम एमीनो (amino acid) एसिड है। यह शिशु के बालों, हड्डियों, स्किन और मांसपेशियों के लिए कोशिकाएं बनाने में मदद करता है। सैल्मन में डीएचए नाम का ओमेगा-3 होता है जो शिशु के मस्तिष्क के विकास को बढ़ावा देता है। ओमेगा-3 से शिशु की याद्दाश्त (memory) के विकास को बढ़ावा मिलता है। मछली खाने से ब्लड प्रेशर (blood pressure) भी कंट्रोल में रहता है और प्रीटर्म बर्थ का खतरा कम होता है।
ज्यादा फिश खाना हो सकता है नुकसान दायक - Eating more fish can be harmful
फिश में मर्करी (mercury) होता है इसलिए गर्भवती महिलाओं को कम मात्रा में ही इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है। फिश में मौजूद मेथाइल मर्करी हमारे शरीर से प्लेसेंटा (placenta) के जरिए भ्रूण तक पहुंचता है। यहां तक कि लो लेवल मेथाइल मर्करी का भी शिशु के मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम पर असर पड़ सकता है। इससे बच्चे की विजन, लैंग्वेज, मोटर स्किल्स और कॉग्नीटिव स्किल्स प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए प्रेगनेंट महिलाओं को अपने खाने में फिश की मात्रा का ख्याल रखना चाहिए।
Edited by Shweta Singh







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