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ऑर्थराइटिस- संभव है होम्योपैथी से उपचार।     

रुमेटॉयड आर्थराइटिस एक ऑटो-इम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का प्रतिरोधी तंत्र स्वयं की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। ऐसा खासतौर पर प्रमुख जोड़ वाले हिस्से में होता है।

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June 12 2021 Updated: June 12 2021 22:52
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ऑर्थराइटिस- संभव है होम्योपैथी से उपचार।      प्रतीकात्मक

ऑर्थराइटिस रोग की गंभीरता का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि विश्व के करोड़ों लोग इससे प्रभावित हैं । देश की जनसंख्या के लगभग 14 प्रतिशत लोग इससे प्रभावित हैं इसका  मतलब यह है कि देश के 50 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 15 करोड़ लोग किसी न प्रकार की गठिया से ग्रषित हैं।

गठिया जोड़ों की सूजन व दर्द से जुड़ा रोग है। यह रोग आमतौर पर ओस्टियो आर्थराइटिस  और रुमेटॉयड आर्थराइटिस के रूप में होता है। बढ़ती उम्र के साथ रोग की आशंका भी बढ़ती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस रोग की चपेट में ज्यादा आती हैं।  इससे लगभग दो करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं।

रुमेटॉयड आर्थराइटिस के लक्षण: 
रुमेटॉयड आर्थराइटिस एक ऑटो-इम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का प्रतिरोधी तंत्र स्वयं की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। ऐसा खासतौर पर प्रमुख जोड़ वाले हिस्से में होता है जिसके कारण उसमें दर्द, सूजन व लालिमा  आ जाती है। साथ ही सुबह उठते ही अंगुलियां मुड़ जाती हैं कमजोरी, जकड़न, थकावट व बुखार जैसा महसूस होता है ।

आर्थराइटिस के कारण : 
 रुमेटॉयड आर्थराइटिस के लिए कुछ वायरस, बैक्टीरिया व फंगस भी जिम्मेदार हैं। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार यह वंशानुगत होने के अलावा किसी प्रकार के इंफेक्शन, वातावरण संबंधी तथ्य के प्रभाव से इम्यून सिस्टम पर हुए प्रभाव से भी ऐसा हो सकता है। कई शोध ऐसे भी हुए जिसमें रुमेटॉयड आर्थराइटिस के मामले ज्यादातर धूम्रपान करने वालों में पाए गए। जोड़ों में लगी पहले कोई ऐसी चोट जो पूरी तरह से ठीक न हुई हो वह भी वजह बन सकती है।

 यह एक ऑटो-इम्यून बीमारी है। इसमें शरीर का प्रतिरोधी तंत्र स्वयं की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। ऐसा खासतौर पर प्रमुख जोड़ वाले हिस्से में होता है जिसके कारण उसमें दर्द, सूजन व लालिमा आ जाती है। साथ ही सुबह उठते ही अंगुलियां मुड़ जाती हैं, कमजोरी,  जकड़न, थकावट व बुखार जैसा महसूस होता है। वहीं जुवेनाइल आर्थराइटिस (बच्चों ) में रुमेटॉइड जैसे लक्षण 16 वर्ष की उम्र से पहले दिखाई देने लगते हैं। यह आनुवांशिक कारण से हो सकता है। आर्थराइटिस से होने वाली जटिलताएं :  आर्थराइटिस के कारण जोड़ों मेँ गंभीर खराबी, आंखों में तकलीफ, हड्डियों मेँ टेढ़ापन, विकलांगता जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। 

आर्थराइटिस से कैसे बचें: 
इससे बचने के लिए पौष्टिक भोजन लें। वजन नियंत्रित रखें, खूब पानी पिएं, योग, प्राणायाम, कसरत आदि करते रहें। 

आर्थराइटिस का उपचार: 
आर्थराइटिस में जहां आधुनिक चिकित्सा पद्धति में दर्द निवारक  दवाइयाँ, घुटनों को बदला जाना होता हैं । होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में अनेक दवाइयाँ हैं जो रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों के आधार पर दी जा सकती हैं। इसके उपचार में प्रयुक्त होने वाली औषधियों में ब्रायोनिया, रस टॉक्स, कॉलचिकम, लीडम  पॉल, रुफा, रोडोडेंड्रॉन, अर्टिका यूरेन्स आदि का प्रयोग रोगी के सम्पूर्ण लक्षणों के आधार पर किया जाना चाहिए परंतु होम्योपेथिक दवाईंयां प्रशिक्षित चिकित्सक की सलाह से ही लेनी होगी। डॉ अनुरूद्व वर्मा, वरिष्ठ  होम्योपैथिक चिकित्सक  मोबाइल नम्बर 9415075558

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