देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

लेख

सहजता देती है मनुष्य को भावनात्मक, मानसिक, शारीरिक एवं और सामाजिक रोगों से मुक्ति

व्यक्ति शारीरिक दृष्टि से ही रोगी नहीं होता, अपितु वह भावनात्मक, मानसिक एवं सामाजिक रोगी भी हो सकता है। इनमें व्यक्ति के अंदर का भाव ही उसका मूल है। अंदर से सहज, सरल, शांत भाव से समग्र स्वास्थ्य पाना सम्भव है।

लेख विभाग
April 07 2022 Updated: April 07 2022 15:30
0 41125
सहजता देती है मनुष्य को भावनात्मक, मानसिक, शारीरिक एवं और सामाजिक रोगों से मुक्ति प्रतीकात्मक

सरल, सहज जीवन में स्वास्थ्य बसता है, यह कहावत वर्षों पुरानी है, आज आयुर्वेद चिकित्सक, मनोवैज्ञानिक से लेकर आधुनिक चिकित्सा जगत भी यह मानने लगा है कि जीवन में रोग का कारण विकृत मनःस्थिति है। विकृत मनः स्थिति का आशय है व्यक्ति के भावों-विचारों व व्यवहार में असंतुलन का होना। जो व्यक्ति के व्यक्तित्व से लेकर उसके स्वास्थ्य, सम्पूर्ण जीवन तक को विकृत करता है। हमारे विशेषज्ञ कहते हैं कि जीवन की असली पहचान व्यक्ति की सहजता में होती है, असली व्यक्तित्व सहजता से मिलता है।

शांत व्यक्तित्व को कैसे जाने - How to know a calm personality

व्यक्ति शारीरिक दृष्टि से ही रोगी नहीं होता, अपितु वह भावनात्मक, मानसिक एवं सामाजिक रोगी भी हो सकता है। इनमें व्यक्ति के अंदर का भाव ही उसका मूल है। अंदर से सहज, सरल, शांत भाव से समग्र स्वास्थ्य पाना सम्भव है। ध्यान रहे सामान्य अवस्था में हर व्यक्ति सहज व शांत रहता है, लेकिन जब कोई उसे छोड़ दे, कुछ कह दे, दुर्व्यहार कर दे, तब भी वह शांत रहे, क्रोध न करें, तो समझें कि वह असल में शांत है। यदि छेड़ते ही क्रोध करने लगे, मरने-मारने पर तुल जाये, तो उसे शांत नहीं कहा जा सकता। आयोजित सहजता व शांति वाला व्यक्ति अंदर ही अंदर विकृत होता रहता है, परिणामतः एक न एक दिन उसमें रोग के लक्षण प्रकट हो ही जाते हैं।

व्यक्तित्व को आकार कैसे दें - How to shape personality

वास्तव में अशांति, द्वेष, घृणा, क्रोध, ईर्ष्या ये जब अंदर होते हैं, तो रोग के रूप में समय के साथ प्रकट होते हैं। मनोविशेषज्ञ उपचार करते समय इसी को रोगी के अंदर से बाहर लाने का प्रयास करते हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि ‘‘अंदर का विकृत भाव चेहरे, आंखों, हाव-भावों, होंठो से प्रकट हो जायेगा, यदि वह अंदर है। व्यक्ति अंदर से प्रसन्न, शांत है तो उसके हावभाव से क्रोध, ईर्ष्या आदि विकार नहीं निकलेंगे। बाहर से कोई कुछ क्यों न कहेे, तब अशांति वाली प्रतिक्रिया आयेगी ही नहीं। साधना में भी साधक को अपने अंदर को संवारने की ही प्रेरणा दी जाती है। साधक अपने को साधते हुए अंदर के क्रोध को करुणा में बदलने का प्रयास करता है। तब उसे बाहरी व्यवहार प्रभावित नहीं करता और हर परिस्थिति में वह शांत रहता है। वास्तव में अंदर के प्लेटफार्म पर खडे़ होकर ही व्यक्ति अपने सरल-सहज स्वस्थ व्यक्तित्व को आकार दे पाता है।

सद्गुरु बताते हैं साधनायें - Sadhguru explains the sadhna

आध्यात्मिक प्रगति में भी व्यक्ति जहां पर खड़ा है, वहीं से उसका उत्थान निर्भर करता है, इसीलिए सद्गुरु शिष्य को बाहरी व्यवहार से नहीं, अपितु उसे अंदर से पकड़ते हैं, उसी आधार पर साधनायें बताते हैं और साधक सफल होता है। आयुर्वेद चिकित्सक भी यही प्रयोग अपनाते हैं, आधुनिक चिकित्सक भी अब व्यक्ति के व्यक्तित्व के तल में उतर कर उपचार करने पर विचार करने लगे हैं। साइकोलोजिस्ट उपचार के समय व्यक्ति को गहरे तक कुरेदते हैं, वह बाहर से जो कह रहा है, उसकी अपेक्षा उसकी कल्पनायें, भावों व कथन के पीछे छिपे भावों, सपनों को पकड़कर अपना कार्य करते हैं। क्योंकि व्यक्ति अपने भीतर की परतों में खोया होता है, जो व्यक्ति की वास्तविकता के बारे में बताते हैं।

शोध के बाद लोक व्यवहार में देखने को मिला है कि जो व्यक्ति सहज है, सरल है, सेवा, प्रेम से जुड़ा है, अपना संतुलन बनाकर चलता है, वह अपनी वास्तविकता में जीता है। ऐसा व्यक्ति अपनी दुविधा, संशय, असमंजस से निकल चुकता है। जबकि दुविधा वाला व्यक्ति खाना कुछ चाहता है, खा कुछ और लेता है, कहना कुछ चाहता है, कह कुछ जाता है। ऐसे व्यक्ति का मन आधा- अधूरा काम करता है, इससे आधा-अधूरा व्यक्तित्व बनता है, अंततः व्यक्तित्व में विकृत आती है, जो रोग का कारण बनता है। साइकोलोजिस्ट कहते हैं जब तक व्यक्ति अपने अंदर-बाहर से एक नहीं हो लेेता, वह न तो स्वस्थ रह सकता है, न सही ढंग से लोगों के साथ व्यवहार कर पाता है। न ही उसे जिन्दगी में सुख संतोष मिल सकता है।

इम्प्रेस करने के प्रयास से भी व्यक्तित्व होता है कमजोर - Personality weakens by trying to impress

दूसरों को इम्प्रेस करने के प्रयास से भी व्यक्तित्व कमजोर होता है। अक्सर किसी व्यक्ति से सभा में कुछ बोलने के लिए कहें, तो वह असहज हो जाता है, क्योकिं उसे लगता है हम लोगों को इम्प्रेस करने के लिए बोल रहे हैं। ऐसे में बोलेगा कुछ और निकलेगा कुछ। पर जब वह अंदर बाहर से एक होता है, तो सहज होता है और इस सहजता में वास्तविक व्यक्तित्व व्यक्त होता है। ये सहजता के गुण आत्मा से निकलते हैं, शांति, प्रसन्नता, प्रेम, करुणा आदि आत्मा के गुण हैं, हमें जीवन को इन्हीं भावों के साथ जीना चाहिए। तब व्यक्ति हृदय से जियेगा, संतोष से जियेगा और वह विकृत होने से बचा रहेगा, फिर वह रोगी भी नहीं होगा। इसीलिए संत, चिकित्सक आदि व्यक्ति को अपने असली व्यक्तित्व के खोज की प्रेरणा देते हैं, जिससे व्यक्तित्व विकृत होने से बचे, सहज रहे और व्यक्ति सदा निरोगी जीवन जिये।

लेखक - डॉ आर्चिका दीदी 

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

COMMENTS

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के साथ कि  बैठक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के साथ कि बैठक

अबुज़र शेख़ October 27 2022 19703

मुख्यमंत्री ने आला अधिकारियों को डेंगू समेत अन्य संचारी रोगों के प्रति सावधानी बरतने के निर्देश दिए

अपनी बारी आने पर ज़रूर  लगवाए कोविड-19 वैक्सीन का टीका- डॉ अवंतिका पांडेय

अपनी बारी आने पर ज़रूर  लगवाए कोविड-19 वैक्सीन का टीका- डॉ अवंतिका पांडेय

February 14 2021 22122

संपूर्ण विश्व इस संक्रमण से ग्रसित है किंतु हमारे वैज्ञानिकों ने जो भरोसा दिलाया था, उसको समयानुसार

 जानिये हींग के औषधीय गुण और प्रयोग।

 जानिये हींग के औषधीय गुण और प्रयोग।

लेख विभाग July 02 2021 35393

शुद्ध हींग , पानी में घुलने पर सफेद हो जाती है। हींग में एंटी इन्फ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जा

अब वायरस की चपेट में गायें और भैंसें, लंपी त्वचा रोग से मर रहें दुधारू पशु

अब वायरस की चपेट में गायें और भैंसें, लंपी त्वचा रोग से मर रहें दुधारू पशु

एस. के. राणा August 08 2022 38120

लंपी त्वचा रोग कैप्रीपोक्स वायरस के कारण होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी दुनिया भर में प

मैक्स अस्पताल ने रोबोटिक सर्जरी शुरू की

मैक्स अस्पताल ने रोबोटिक सर्जरी शुरू की

विशेष संवाददाता November 14 2022 29974

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में द विंसी रोबोट के जरिए सर्जरी की गई। यह तकनीक चिकित्सकों को बेहद सट

वायरल फीवर के उपचार एवं बचाव में कारगर है होम्योपैथिक दवाइयाँ। 

वायरल फीवर के उपचार एवं बचाव में कारगर है होम्योपैथिक दवाइयाँ। 

हुज़ैफ़ा अबरार September 05 2021 45870

यदि आप या आपके घर में कोई वायरल से पीड़ित हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं हैं क्योंकि होम्योपैथी में

बचपन के टीके कोरोना के घातक असर में प्रभावी सुरक्षा देतें है: शोध

बचपन के टीके कोरोना के घातक असर में प्रभावी सुरक्षा देतें है: शोध

एस. के. राणा September 02 2021 22747

अध्यनयकर्ताओं ने बताया कि आमतौर पर बचपन में मीजल्स-मंम्प्स-रूबेला (एमएमआर) के टीके दिए जाते हैं। इसक

उच्च रक्तचाप व मोटापा से पीड़ित गर्भवती को कोविड संक्रमण का खतरा अधिक।

उच्च रक्तचाप व मोटापा से पीड़ित गर्भवती को कोविड संक्रमण का खतरा अधिक।

हुज़ैफ़ा अबरार July 02 2021 30455

मंत्रालय ने गाइडबुक के जरिये बताया है कि गर्भवती को भी कोविड संक्रमण का खतरा है। अधिकतर गर्भवती में

वर्ष 2020 के दौरान क़रीब डेढ़ लाख बच्चे एचआईवी संक्रमण के शिकार हुए 

वर्ष 2020 के दौरान क़रीब डेढ़ लाख बच्चे एचआईवी संक्रमण के शिकार हुए 

हे.जा.स. February 02 2022 24790

एचआईवी संक्रमण का फ़िलहाल कोई उपचार उपलब्ध नहीं है मगर कारगर एचआईवी रोकथाम उपायों, निदान, उपचार व दे

सीएम आरोग्य स्वास्थ्य मेला में लाभान्वित हुए मरीज

सीएम आरोग्य स्वास्थ्य मेला में लाभान्वित हुए मरीज

आरती तिवारी September 26 2022 24485

यूपी के कई जिलों के सभी ग्रामीण व नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर रविवार को मुख्यमंत्री आरोग्य

Login Panel