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नयी दिल्ली। देश में 10,500 दवा फैक्टरियों (pharmaceutical factories) में 8,500 फैक्टरियां के पास यह प्रमाणपत्र एमएसएमई श्रेणी (MSME Category) के तहत आती हैं, लेकिन इनमें से केवल 2000 फैक्टरियों के पास ही डब्ल्यूएचओ का अच्छी विनिर्माण प्रथाएं प्रमाणपत्र मौजूद है। 6,500 दवा फैक्टरियों के पास यह प्रमाण पत्र नहीं है। इसकी जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) के शीर्ष अधिकारियों ने बुधवार को दी।
अधिकारियों का कहना है कि विश्व स्तर पर स्वीकार्य गुणवक्ता वाली दवा का उत्पाद (drug product) सुनिश्चित करने के लिए जीएमपी अधिनियम में संशोधन करने का फैसला लिया। मंत्रालय ने बताया कि नियमों में संशोधन के बाद अब दो श्रेणी में दवा कारोबार (drug trade) को रखा गया है। इममें से एक श्रेणी 250 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने वाली कंपनियों का है, जिन्हें छह माह और 250 करोड़ से कम का कारोबार करने वाली कंपनियों की श्रेणी में 12 माह बाद फिर से जीएमपी प्रमाणपत्र लेने का नियम बनाया गया है।







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