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राजस्थान की लेडी डाक्टर ने की खुदकुशी, आईएमए गोरखपुर करेगा विरोध

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, अगर अस्पताल में मौत हुई है तो इलाज में लापरवाही की धारा 304 लगाकर और कमेटी बनाकर जांच कर सकते हैं। यहां तो उस अस्पताल के सभी चिकित्सकों पर ही धारा 302 लगा कर नया कानून लिखने की कोशिश हो रही है। आईएमए इस घटना की पुरजोर निंदा करती है।

हे.जा.स.
March 30 2022 Updated: March 31 2022 01:34
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राजस्थान की लेडी डाक्टर ने की खुदकुशी, आईएमए गोरखपुर करेगा विरोध प्रतीकात्मक

जयपुर/गोरखपुर। राजनीति जो न कराए, कम है। इस राजनीति का जहर इतना फैल गया है कि अब लेडी डाक्टर तक डिप्रेशन में जाकर आत्महत्या (suicide) कर रही हैं। आज का मामला राजस्थान के दौसा जिले का है जहां डा. अर्चना शर्मा ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। वह डिप्रेशन में थी और कांग्रेस नेताओं के उकसावे पर पीड़ित पक्ष द्वारा प्रताड़ित किये जाने पर तथा पूरे अस्पताल पर धारा 302 लगाने से बेहद ही आहत थी।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, गोरखपुर (IMA Gorakhpur) के अध्यक्ष डा. शिव शंकर शाही ने इस घटना पर

तीव्र नाराजगी जताई है और कहा है कि राजस्थान में तो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के आदेश के अनुसार, अगर अस्पताल में मौत हुई है तो इलाज में लापरवाही की धारा 304 लगाकर और कमेटी बनाकर जांच कर सकते हैं। यहां तो उस अस्पताल के सभी चिकित्सकों पर ही धारा 302 लगा कर नया कानून लिखने की कोशिश हो रही है। आईएमए इस घटना की पुरजोर निंदा करती है। इस संबंध में जल्द ही एक आपातकालीन बैठक कर दो मिनट का शोक रखा जाएगा और आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। इस बीच राजस्थान में आज डाक्टरों ने हड़ताल किया। दिल्ली में भी डाक्टरों ने काली पट्टी बांध कर अपने रोष का इजहार किया। 

मामला क्या है

दौसा अस्पताल के प्रबंधक डॉक्टर सुनीत उपाध्याय ने बताया कि 22 साल की महिला आशा प्रसव के लिए अस्पताल आई थी। उसकी हालत पहले से ही बहुत ज्यादा खराब थी। उसे लगातार ब्लीडिंग हो रही थी। अंततः उसे काफी प्रयास करने के बावजूद बचाया नहीं जा सका। स्थानीय कांग्रेस नेताओं की वजह से डॉक्टर अर्चना शर्मा पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया था, जबकि उनकी कोई गलती थी नहीं। ब्लीडिंग बहुत ज्यादा हो चुकी थी। डा. अर्चना ने पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। डा. अर्चना लगातार अस्पताल के बाहर प्रसूता और नेताओं के धरने से भी परेशान थी। उन्होंने इस संबंध में कई बार पुलिस से कहा मगर पुलिस उल्टे उन्हीं को परेशान कर रही थी। इससे आजिज आकर उन्होंने खुदकुशी कर ली। खुदकुशी के पूर्व उन्होंने एक सुसाइड नोट भी लिख छोड़ा है। 

सुसाइड नोट में लिखा- डॉक्टरों को प्रताड़ित करना बंद करो 

(लेडी डॉक्टर की फाइल फोटो) 

दौसा जिले के लालसोट में लेडी डॉक्टर अर्चना शर्मा सुसाइड केस में सुसाइड नोट भी सामने आया है। इस सुसाइड नोट में घटना से पहले डॉक्टर अर्चना शर्मा ने लिखा, 'मैंने कोई गलती नहीं की है, किसी को नहीं मारा। मैं क्यों मारूंगी किसी को। पीपीएच एक कॉम्प्लिकेशन है। इसके लिए डॉक्टरों को प्रताड़ित करना बंद करो। प्लीज मेरे बच्चे को मां की कमी महसूस नहीं होने देना। 

मुख्यमंत्री बोले- दोषी बख्शे नहीं जाएंगे 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि दौसा में डॉ. अर्चना शर्मा की आत्महत्या की घटना बेहद दुखद है। हम सभी डॉक्टरों को भगवान का दर्जा देते हैं। हर डॉक्टर मरीज की जान बचाने के लिए अपना पूरा प्रयास करता है परन्तु कोई भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना होते ही डॉक्टर पर आरोप लगाना न्यायोचित नहीं है। अगर इस तरह डॉक्टरों को डराया जाएगा तो वे निश्चिन्त होकर अपना काम कैसे कर पाएंगे। हम सभी को सोचना चाहिए है कि कोविड महामारी या अन्य दूसरी बीमारियों के समय अपनी जान का खतरा मोल लेकर सभी के सेवा करने वाले डॉक्टरों से ऐसा बर्ताव कैसे किया जा सकता है। इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। 

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