











































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। घर-परिवार से सैकड़ों मील दूर अकेले रहकर काम धंधे के साथ अपने को बीमारी से सुरक्षित बनाना कठिन बहुत है लेकिन असम्भव नहीं है। यह कहना है टीबी को मात देने वाले 32 वर्षीय बलिराम कुमार खैरवार का। मूलत: जौनपुर के रहने वाले बलिराम एक निजी संस्थान में लाइब्रेरी अटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं।
नौकरी के दौरान खान-पान का सही से ख्याल न रख पाने और बिना रोशनी वाले छोटे से कमरे में गुजर-बसर करने वाले बलिराम कब टीबी (TB) की चपेट में आ गए उन्हें पता ही नहीं चला। टीबी को मात देने के बाद बलिराम कहते हैं कि अगर बीमारी (disease) के बारे में सही जानकारी हो तो उस पर सतर्कता बरतकर आसानी से विजय पायी जा सकती है।
बलिराम ने बतायाकि जुलाई-20 में कोविड-19 (covid-19) का एक अनजाना भय चारों तरफ व्याप्त था। डाक्टर (doctors) भी मरीज को हाथ लगाने से कतरा रहे थे, ऐसे में खांसी आनी शुरू हो गयी। इस दौरान कोई अपना साथ भी नहीं था जो कि कोई सही सलाह देता। स्थानीय प्राइवेट डाक्टर (private doctor) को समस्या बताई तो कुछ दवाएं और कफ सीरप थमा दिया। रात को अधिक खांसी (cough ) आने पर सीरप पी लेता था, एक-दो घंटे आराम मिल जाता था और फिर खांसी शुरू हो जाती थी। यह सिलसिला दो महीने चला होगा लेकिन आराम नहीं मिला। परिवार के एक बुजुर्ग ने फ़ोन पर बातचीत के दौरान बार-बार खांसी आने पर पूरी बात जानी और कहा कि यह तो टीबी का लक्षण (symptom of TB) लग रहा है।
सरकारी अस्पताल (government hospital) के डाक्टर से सम्पर्क करने की बात कही। केजीएमयू (KGMU) के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग (Department of Respiratory Medicine) में जांच में रिपोर्ट पाजिटिव आने फेफड़े की टीबी (pulmonary tuberculosis) पर सीएचसी चिनहट (CHC Chinhat) से इलाज शुरू हो गया। वहां से दवा मिलने लगी और सही पोषण (nutrition) के लिए इलाज के दौरान हर माह 500 रुपये भी मिले। कुछ दिन के इलाज में ही खांसी आनी बंद हो गयी। पूरे मनोयोग से चिकित्सक के बताये अनुसार दवा का सेवन करते रहे और खानपान का भी पूरा ख्याल रखा जिसका नतीजा रहा कि छह माह के इलाज में पूरी तरह से स्वस्थ हो गया।
टीबी को मात देने के बाद ठान लिया कि जानकारी के अभाव में जिन दिक्कतों से मुझे गुजरना पड़ा है उसका सामना किसी और प्रवासी कामगार को न करना पड़े। यही सोचकर वल्र्ड विजन इण्डिया संस्था के रैपिड रेस्पांस टीम (Rapid Response Team) से जुड़कर चैम्पियन (champion) बनकर दूसरे टीबी मरीजों की मदद में जुट गए। जनवरी से बाकायदा टीबी मरीजों को फोनकर उनका हालचाल लेते हैं और समस्याओं का समाधान करते हैं। कोविड से बचाव के लिए जरूरी सावधानी बरतने के बारे में भी जागरूक करते और बताते हैं कि मास्क कोविड ही नहीं बल्कि टीबी समेत कई अन्य संक्रामक बीमारियों से भी रक्षा करता है।
घर-परिवार या किसी भी जान-पहचान वाले को दो हफ्ते या अधिक समय से खांसी आ रही हो, दो सप्ताह या अधिक समय से बुखार आ रहा हो, वजन गिर (loss of weight) रहा हो या भूख न लगती (loss of appetite) हो और बलगम से खून आ रहा हो तो जल्द से जल्द टीबी की जांच (TB test) सरकारी अस्पताल में कराएँ।
टीबी की पुष्टि होती है तो नियमित दवा का सेवन (regular medicine) करें और पोषण का ध्यान रखें। बलिराम आपबीती बताकर हर माह करीब 50-60 टीबी मरीजों को यह एहसास दिलाने का काम करते हैं कि टीबी के खिलाफ इस लड़ाई में वह अपने को अकेला न महसूस करें, कोई भी दिक्कत हो तो नि:संकोच फोन करें। इनमें से कई ऐसे भी हैं जो रोजगार के चक्कर में घर-परिवार से दूर यहाँ अकेले रहते हैं। ऐसे मरीजों को भावनात्मक सहयोग भी प्रदान करते हैं ताकि वह आसानी से इलाज पूरा कर सकें।
प्रवासी कामगारों (Migrant workers) के स्वास्थ्य व सामाजिक सुरक्षा पर कार्य कर रही संस्था वाईआरजी केयर (YRG Care) के प्रोजेक्ट लीड कवीश्वर कृष्णन का कहना है कि काम-धंधे के लिए घर से दूर रहने वाले सेहत का ठीक से ख्याल नहीं रख पाते। कार्यस्थल पर साफ़-सफाई और पर्याप्त रोशनी के अभाव में उन्हें बीमारियाँ आसानी से घेर लेती हैं। ऐसी ही फैक्ट्रियों और संस्थानों में उनकी संस्था स्वास्थ्य विभाग (Health Department) के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती है और टीबी व अन्य बीमारियों के संभावित लक्षण वालों की जांच कराती है।
टीबी की पुष्टि वाले प्रवासी कामगारों को डॉट सेंटर (DOT centre) से जोड़ दिया जाता है, जहाँ से दवाएं और अन्य सरकारी सुविधाएँ मिलने लगती हैं। ऐसे लोगों का फालोअप भी संस्था करती है। गौतमबुद्ध नगर, मेरठ और मुरादाबाद जहाँ बड़ी तादाद में कामगार रहते हैं वहां संस्था स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में ग्लोबल फंड (Global Fund) की मदद से वन स्टॉप सेंटर (one stop center) बनाने जा रही है, जहाँ पर एक ही छत के नीचे इन लोगों के स्वास्थ्य की जाँच, सामाजिक सुरक्षा, भ्रांतियों को दूर करने और मानसिक स्वास्थ्य पर परामर्श भी मिलेगा। इन सेंटर पर चिकित्सक, एएनएम (ANM) और काउंसलर (counselors) की भी व्यवस्था होगी।







हुज़ैफ़ा अबरार June 07 2026 0 1526
हुज़ैफ़ा अबरार June 01 2026 0 1204
हुज़ैफ़ा अबरार June 04 2026 0 987
हुज़ैफ़ा अबरार June 10 2026 0 826
हुज़ैफ़ा अबरार June 12 2026 0 784
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 4438
एस. के. राणा January 20 2026 0 4305
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 4284
एस. के. राणा January 13 2026 0 4193
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3955
एस. के. राणा February 01 2026 0 3605
एस. के. राणा February 04 2026 0 3521
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86623
सौंदर्या राय April 08 2022 0 34441
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37642
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35217
लेख विभाग March 19 2022 0 34720
सौंदर्या राय March 16 2022 0 72098
जम्मू में डेंगू का कहर जारी है। स्टेट मलेरिया विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वीरवार को कुल 336 संदि
कोरोना के कहर के बाद मंकीपॉक्स ने देश की चिंता को बढ़ा दी है। वहीं मंकीपॉक्स से संक्रमित ठीक हुए मरी
डायरेक्टर डॉ मजहर हुसैन ने नर्सों का योगदान को महत्वपूर्ण योगदान बताते हुए कहा कि चिकित्सक दवा लिखते
अंडों में बहुत सारा प्रोटीन पाया जाता है। अंडा खाने तथा लगाने दोनों में उपयोग कर सकते है। अंडा लगान
पीएम मोदी के जन्मदिन पर डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में 17 सितंबर से 01 अक्टूबर 2022 तक
The findings from this large scale prospective cohort study suggest a potential direct association b
उक्त मामले में जब अधीक्षक डॉ रजनीश प्रियदर्शी से जानकारी ली गयी तो उनको भी नही पता था कि अजगरा सामुद
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे आंखों की रोशनी को लेकर समस्याएं आने लगती हैं। आयुर्वेद में कुछ ऐसी
बैरिएट्रिक सर्जरी से कई सारे लाभ मिलते है। यह सर्जरी दूरबीन विधि से की जाती है जिस वजह से मरीज 2 या
उत्तर प्रदेश में अधोमानक दवा सप्लाई होने के बाद महंगी दवाओं को लेकर सनसनीखेज नया मामला सामने आया है।

COMMENTS