देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

उत्तर प्रदेश

द अशोका फाउंडेशन प्रिवेंटेबल ब्लाइंडनेस के रोकथाम हेतु सक्रिय है।

स्क्रीन टाइम (मोबाइल के सामने बीतने वाला वक्त) बढ़ने से आंखों की समस्याओं में वृद्धि हुई है और इसलिए नियमित जांच के जरिये से आपकी आंखों की देखभाल अब और जरूरी हो गई है।

0 22445
द अशोका फाउंडेशन प्रिवेंटेबल ब्लाइंडनेस के रोकथाम हेतु सक्रिय है। डॉक्टर प्रत्युष रंजन

लखनऊ। प्रतिष्ठित नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रत्युष रंजन ने आंखों के बेहतर स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और समाज से प्रिवेंटेबल ब्लाइंडनेस यानी ऐसे अंधेपन की समस्या को खत्म करने का लक्ष्य रखा है, जिनकी रोकथाम संभव है। डॉ. रंजन सर्जरी के बाद यह सुनिश्चित करते हैं कि व्यक्ति बिना चश्मे के आसानी से जीवन बिता सके।

डॉ. रंजन द अशोका फाउंडेशन एनजीओ के माध्यम से आई केयर को सभी के लिए सुलभ बनाने के लिए प्रयासरतहैं। फाउंडेशन का उद्देश्य आंखों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देना और समाज से प्रिवेंटेबल ब्लाइंडनेस को खत्म करना है। डॉ. रंजन ने नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। उस दौरान उन्होंने यूपी और बिहार के ऐसे कई गरीब मरीजों को देखा जो पैसे की कमी के कारण साधारण मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के लिए कई रातें फर्श पर बिता देते थे। डॉ. रंजन ने गरीब लोगों को यथासंभव निशुल्क नेत्र उपचार उपलब्ध कराने के विचार से इस फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2010 किया। उन्होंने अमेरिका के एनजीओ विटामिन एंगल के साथ भी काम किया है, जो आंखों से संबंधित विभिन्न समस्याओं से पीड़ित बच्चों को मुफ्त विटामिन ए कैप्सूल प्रदान करता है।

इस अवसर पर डॉ. प्रत्युष रंजन, एमबीबीएस, डीओ एमएस, डीएनबी, एमएएमएस कंसल्टेंट नेत्र रोग विशेषज्ञ, मोतियाबिंद, रिफ्रेक्टिव और ग्लूकोमा विशेषज्ञ ने कहा, “पिछले एक साल में हम सभी ने महसूस किया है कि मानव जाति के लिए अच्छा स्वास्थ्य कितना मूल्यवान है और आपकी आंखें आपके स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वयस्कों और बच्चों दोनों के लिए स्क्रीन टाइम (मोबाइल के सामने बीतने वाला वक्त) बढ़ने से आंखों की समस्याओं में वृद्धि हुई है और इसलिए नियमित जांच के जरिये से आपकी आंखों की देखभाल अब और जरूरी हो गई है। जितनी बार आपके डॉक्टर सलाह दें या जब भी आपको आंखों से देखने में कोई भी दिक्कत महसूस हो, आपको आंखों की स्वास्थ्य जांच करा लेनी चाहिए। इससे आपकी आंखें स्वस्थ रहेंगी। 

उन्होंने आगे कहा, "आधुनिकतम रिफ्रेक्टिव लेजर करेक्शन जैसे बहुत सारे विकास कार्य आंखों की देखभाल के क्षेत्र में हो रहे हैं, जिनकी मदद से बहुत ज्यादा पावर वाली आंखों का भी इलाज किया जा सकता है। ग्लूकोमा एक ऐसी बीमारी है जो लोगों को स्थायी रूप से अंधा बना रही है। द साइलेंट थीफ ऑफ साइट कही जाने वाली यह बीमारी 40 साल की उम्र से शुरू होती है और आपको अंधा बना सकती है। यह आनुवंशिक बीमारी भी है। अगर आपके माता-पिता और निकट संबंधियों में कोई इससे प्रभावित हो, तो खतरा 7 गुना बढ़ जाता है। इसलिए 40 साल की उम्र में आंखों की व्यापक जांच की जानी चाहिए, जिससे आपकी नजर को ग्लूकोमा से बचाया जा सके। आपकी दृष्टि को बचाने के लिए 4 साल, 40 साल और 60 साल की उम्र में एक व्यापक नेत्र जांच और इसके बाद हर साल जांच की सलाह दी जाती है।''

एक नेत्र रोग विशेषज्ञ के रूप में डॉ. रंजन ने पिछले 10 वर्षों में  35500 से ज्यादा मोतियाबिंद और रिफ्रेक्टिव, 1000 से ज्यादा ग्लूकोमा, 1000 से ज्यादा  रेटिनल लेजर और इंजेक्शन एवं 1000 से ज्यादा ओक्युलोप्लास्टी सर्जरी के सफल इलाज किया है। वे एक लेखक और वक्ता भी हैं। उन्होंने महत्वपूर्ण जर्नल्स में पैंतीस से अधिक लेख भी लिखे हैं। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में वह अतिथि वक्ता और प्रशिक्षक के रूप में आमंत्रित किये जाते रहें हैं।

उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के न्यूकैसल स्थित फ्रीमैन अस्पताल, नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) व वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल तथा उत्तर प्रदेश के सीतापुर स्थित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑफ्थेल्मोलॉजी एंड सीतापुर आई हॉस्पिटल जैसे प्रमुख अस्पतालों के साथ काम किया है। वह वर्तमान में मोतियाबिंद, रिफ्रेक्टिव और ग्लूकोमा विशेषज्ञ के रूप में एएसजी सुपरस्पेशलिटी आई हॉस्पिटल के वाराणसी केंद्र का नेतृत्व कर रहे हैं। एएसजी आई हॉस्पिटल्स पूरे भारत में 34 शाखाओं और कंपाला (युगांडा) और काठमांडू (नेपाल) में नेत्र अस्पतालों की अग्रणी श्रृंखला है।  

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने गर्भवती महिला और नवजात शिशुओं पर संक्रमण प्रभाव के बारे में जानने के लिए अध्ययन शुरू किया

आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने गर्भवती महिला और नवजात शिशुओं पर संक्रमण प्रभाव के बारे में जानने के लिए अध्ययन शुरू किया

एस. के. राणा March 29 2022 41443

गर्भवती महिला और नवजात शिशुओं में कोरोना संक्रमण के जोखिम को लेकर अब तक कई वैज्ञानिक दस्तावेज सामने

कोरोना संक्रमित डॉक्टर ने निभायी ज़िम्मेदारी।

कोरोना संक्रमित डॉक्टर ने निभायी ज़िम्मेदारी।

हुज़ैफ़ा अबरार July 01 2021 36126

एरा मेडिकल कॉलेज की डॉ जलीस फात्मा का पूरा परिवार कोविड-19 संक्रमण की चपेट में था फिर भी वे परिवार

उपमुख्यमंत्री से नर्सेज, फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन संघ ने की अपील

रंजीव ठाकुर May 25 2022 36964

नर्सेज को चिकित्सा स्वास्थ्य की रीढ़ की हड्डी कहा जाता है लेकिन जब साढ़े छः हजार पद रिक्त हैं तो कैस

आलू से करें फेशियल और पाएं शानदार ग्लो

आलू से करें फेशियल और पाएं शानदार ग्लो

श्वेता सिंह September 18 2022 42717

आलू का स्टार्च स्किन केयर में बेस्ट रिजल्ट दे सकता है और इसी वजह से आज कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इसका

अगले माह शुरू होगा पीजीआई का ट्रामा सेंटर।

अगले माह शुरू होगा पीजीआई का ट्रामा सेंटर।

हुज़ैफ़ा अबरार October 25 2021 26175

पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमन बताते हैं कि ट्रामा सेंटर के संचालन की मंजूरी दे दी गई है। यहां बने कोवि

टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए चाय है लाभदायक, स्टडी में हुआ खुलासा

टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए चाय है लाभदायक, स्टडी में हुआ खुलासा

विशेष संवाददाता September 20 2022 26092

शोधकर्ताओं ने बताया कि चाय पीने से डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने

जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लापरवाही का अम्बार

जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लापरवाही का अम्बार

विशेष संवाददाता May 28 2023 33861

सीएमए डॉ. एमएमएस आर्या ने मामले में संज्ञान लेते हुए उन्होंने कहा कि ने तत्काल इमरजेंसी में फोन कर ड

नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के संभावित खतरे पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं: केंद्र सरकार

नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के संभावित खतरे पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं: केंद्र सरकार

हे.जा.स. December 25 2021 31086

इस समय देश के 17 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में 358 ओमिक्रॉन के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से

लोहिया अस्पताल में मरीजों को नि:शुल्क स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की सेवा देगा सम्राट विक्रमादित्य सेवा संस्थान

लोहिया अस्पताल में मरीजों को नि:शुल्क स्ट्रेचर और व्हीलचेयर की सेवा देगा सम्राट विक्रमादित्य सेवा संस्थान

रंजीव ठाकुर September 03 2022 41275

डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में सेवा भारती द्वारा प्रेरित सेवा प्रकल्प सम्राट विक्रमादि

शोध: पांच गुना तेज होगी जीन एडिटिंग, कैंसर व एचआइवी तथा अनुवांशिक बीमारियों में कारगर

शोध: पांच गुना तेज होगी जीन एडिटिंग, कैंसर व एचआइवी तथा अनुवांशिक बीमारियों में कारगर

विशेष संवाददाता September 01 2022 32885

भोपाल के भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइसर) ने जीनोम एडिटिंग तकनीक का नया प्रयोग किया

Login Panel