











































डॉ प्रियंका वर्मा
कानपुर। भारत में हर साल लगभग पचास हज़ार बच्चों में कैंसर डायग्नोज किया जाता है। एक्यूट ल्यूकेमिया, लिंफोमा, विल्म्स ट्यूमर, रेटिनोब्लास्टोमा, ब्रेन ट्यूमर, बोन ट्यूमर, न्यूरोब्लास्टोमा आदि कॉमन पीडियाट्रिक कैंसर हैं। रीजेंसी सुपरस्पेसलिटी हॉस्पिटल, कानपुर के हीमटो-आंकोलोजिस्ट, डॉ प्रियंका वर्मा ने इस बीमारी के बारे में बताया की पीडियाट्रिक कैंसर में क्योर रेट लगभग 85% है जो की बड़ों लोगों के मुकाबलें काफी अच्छा है।बच्चों में कैंसर सेल्स बहुत तेजी से बढ़ते हैं लेकिन बच्चे कीमोथेरेपी ट्रीटमेंट के लिए बहुत संवेदनशील होते हैं लेकिन चिंताजनक आंकड़ा यह है कि हमारे देश में पीडियाट्रिक कैंसर का क्योर रेट काफी कम है क्यूंकि ये पेशेंट्स हमारे देश में बहुत एडवांस स्टेज में डायग्नोज किये जाते हैं। इसकी मुख्य वजह इस बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी है जिसकी वजह से डायग्नोसिस बहुत देर में हो पाता है और कभी-कभी इसका सफल इलाज संभव नहीं हो पाता है।
रीजेंसी सुपरस्पेसलिटी हॉस्पिटल, कानपुर की हीमटो-आंकोलोजिस्ट-कंसल्टेंट डॉ प्रियंका वर्मा ने कहा, "हर महीने हमेइस कैंसर के 4 से 5 केसेस मिलते हैं जो कानपुर और आसपास के क्षेत्र जैसे बांदा, हमीरपुर, महोबा से होते है और जहाँ बच्चों के माता-पिता को कोई अंदाजा नहीं होता है कि उनका बच्चा कैंसर से पीड़ित है। कई माता-पिता जब अपने बच्चें में कम वजन या कम भूख के लक्षणों को देखते हैं तो वह पास के क्लीनिक में जाते हैं या तो वे खुद से बिना डाक्टर से चर्चा किये केमिस्ट से पूछ कर दवाई दे देते हैं। "
डॉ प्रियंका वर्मा ने आगे बताया कि हर कैंसर के लक्षण अलग-अलग होते हैं। लेकिन पीडियाट्रिक कैंसर में जो मुख्य लक्षण होते हैं उनमे कम वजन, कम भूख लगना, शरीर में गांठ और फीवर होता है। लक्षण दिखने पर माता-पिता को अपने बच्चे की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। यह संक्रमण वाली बीमारी नहीं होती है और यह एक बच्चे से दूसरे बच्चे में नहीं फैलती है। बेहतर इलाज के लिए जरूरी है कि इसका डायग्नोज जल्दी हो और इलाज भी जल्दी शुरू हो। इसका इलाज काफी लम्बा होता है इसलिए बच्चों की घर में भी उचित देखभाल बहुत आवश्यक है। ऐसे केस में यह बहुत महत्वपूर्ण है कि घर पर साफ़-सफाई रखी जाए और बच्चे को सम्पूर्ण पोषण वाली डाईट खिलाई जाए। इलाज वास्तविक और व्यावहारिक रूप से प्राप्त करने योग्य हमारा लक्ष्य होता है। इलाज के बाद बच्चा अन्य बच्चों की तरह सामान्य जिंदगी जी सकता है।







हुज़ैफ़ा अबरार September 29 2026 0 1246
हुज़ैफ़ा अबरार September 30 2026 0 1050
हुज़ैफ़ा अबरार September 29 2026 0 539
हुज़ैफ़ा अबरार October 01 2026 0 511
हुज़ैफ़ा अबरार September 27 2026 0 490
हुज़ैफ़ा अबरार September 28 2026 0 483
हुज़ैफ़ा अबरार September 29 2026 0 427
हुज़ैफ़ा अबरार September 30 2026 0 406
हुज़ैफ़ा अबरार October 01 2026 0 378
हुज़ैफ़ा अबरार October 01 2026 0 511
हुज़ैफ़ा अबरार October 01 2026 0 378
हुज़ैफ़ा अबरार October 04 2026 0 98
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 9695
एस. के. राणा January 20 2026 0 5929
एस. के. राणा February 01 2026 0 5901
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5565
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5544
एस. के. राणा January 13 2026 0 5110
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 5054
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87449
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35617
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38608
सौंदर्या राय April 05 2022 0 36099
लेख विभाग March 19 2022 0 35679
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73477
सीएम योगी ने कहा है कि, स्वास्थ्य विभाग इस बात का ध्यान रखें कि उनके द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का प
कोरोना के कहर के बाद मंकीपॉक्स ने देश की चिंता को बढ़ा दी है। वहीं मंकीपॉक्स से संक्रमित ठीक हुए मरी
अपने महीने भर के अभियान के दौरान, हॉर्लिक्स डायबिटीज प्लस और अपोलो शुगर क्लीनिक लोगों की मुफ्त शुगर
कार्यक्रम का उद्देश्य औषधि विज्ञान एवं नवीन औषधि खोज की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में महत्वपूर
हमारा एजेंडा कैंसर की रोकथाम के बारे में जागरूकता पैदा करना है। भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़
विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को हेपेटाइटिस के लिए जागरूक करना है । जागरुक
प्राकृतिक सौंदर्य वाले होंठ, महिलाओं के चेहरे की सुंदरता को दोगुना बढ़ाने का काम करते हैं। जिनके हों
उक्त मामले में जब अधीक्षक डॉ रजनीश प्रियदर्शी से जानकारी ली गयी तो उनको भी नही पता था कि अजगरा सामुद
विदेश मंत्रालय ने 19 जनवरी को भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और सेशेल्स के लिए वैक्सीन प
आरोग्य मेले के मौके पर 78 स्वास्थ्य केंद्रों पर मेले का आयोजन किया गया। मेले में 4,648 मरीजों के स

COMMENTS