











































प्रतीकात्मक चित्र
लखनऊ। आज कल अचानक इंसान काल के गाल में समा रहा है, आखिर इसके पीछे क्या कारण है कि लोगों की मौत की खबर सुनने को मिल रही है। शुक्रवार को वर्क आउट करते समय 45 साल के टीवी कलाकार सिद्धार्थ सूर्यवंशी (Siddharth Suryavanshi) का हार्ट अटैक (heart attack) से निधन हो गया।
गत दिनों कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव (comedian Raju Srivastava) भी कार्डियेक अरेस्ट का शिकार हुए। उनको गत 10 अगस्त को एक जिम में एक्सरसाइज के दौरान हार्ट अटैक आया। राजू को एम्स में भर्ती कराया गया, जहां उनका ब्रेन डेड हो गया, एक माह से ज्यादा अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ते हुए 21 सितम्बर को वो जिंदगी की जंग हार गए।।
राजू श्रीवास्तव की तरह सिंगर केके को भी बंगाल में एक परफॉर्मेंस के दौरान दिल का दौरा पड़ा था। जिस से उनकी मौत हो गई थी। भाभी जी घर पर हैं के मलखान सिंह की भी अचानक मौत हो गई। राम लीला के दौरान रावण का भी अचानक हार्ट अटैक से निधन हो गया फिर सलमान के डप्लीकेट का भी जिम ने हार्ट अटैक से निधन हो जाना चिंता का विषय होने के साथ हमें इस समस्या का समाधान भी खोजना होगा।
इस बारें में कार्डियक केयर में हृदय रोगियों का इलाज कर रहे कार्डियोलॉजिस्ट डॉ स्वप्निल पाठक (cardiologist Dr. Swapnil Pathak) से असमय मृत्यु के कारण की पूछा कि एक व्यक्ति जो स्वस्थ्य है, किसी प्रकार की कोई गंभीर बीमारी नहीं उसकी अचानक ही मौत हो जाती है। मेडिकली जांच में पाया गया कि कार्डियक अरेस्ट से उसकी मौत हुई। यानी हार्ट की गति रूक गई जिसकी वजह से मृत्यु हो गई।
कार्डियक अरेस्ट क्या है - what is cardiac arrest ?
कार्डियोलॉजिस्ट स्वप्निल ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य धमनी जो हृदय को रक्त की सप्लाई करती है अगर उस धमनी में अचानक ब्लाकेज आ गया जिसकी वजह से खून हृदय तक नहीं जा पा रहा तो हृदय इस स्थिति को झेल नहीं पाता। जैसे ही कोई बड़ा अटैक पड़ता है तो हृदय की गति असामन्य तरीके से बढ़ जाती है। एक से तीन मिनट के अंदर हृदय की गति इतनी ज्यादा बढ़ जाती है और हृदय के पम्पिंग की बंद हो जाती है। इस स्थिति को ही कार्डियक अरेस्ट बोला जाता है।
नॉर्मल हृदय गति (Normal heart rate) एक मिनट में 72 बार धड़कता है। लेकिन जब यह रेट 200-250 या 300 बीट प्रति मिनट हो जाती है, तो हार्ट इफेक्टिव तरीके से ब्लड पंप नहीं कर पाता है। ब्रेन में सप्लाई न पहुंचने के कारण मौत हो जाती है। एक लेवल से अधिक का एक्साइटमेंट होना भी खतरनाक हो सकता है। पोस्ट कोविड के बाद कार्डियक अरेस्ट (cardiac arrest) के मामले बढ़ रहे हैं। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका और यूरोप में भी ऐसा ही ट्रेंड बढ़ रहा है।
कार्डियक अरेस्ट आए तो क्या करें - What to do if cardiac arrest occurs ?
कार्डियक अरेस्ट आने के बाद 1 से 3 मिनट बेहद अहम होते हैं। इस दौरान डीफैब्रिलेटर के जरिए चेस्ट में डीफैब्रिलेशन हृदय को शॉक देना देना जरूरी है। कार्डियक मसाज देकर भी हार्ट को तत्काल रिवाइव किया का सकता है, अगर ऐसा न किया जाए और अस्पताल पहुंचने के बाद आपका इलाज शुरू हो तो नसों का ब्लॉकेज खोल दिए जाने से हृदय ने काम करना फिर शुरू कर दिया लेकिन जितने समय हृदय की गति रूकी हुई थी उतने समय ब्रेन को ब्लड नहीं मिला। ब्रेन आक्सीजन के बगैर ब्रेन डेड हो जाता है। इसकी वजह से देखा गया कि राजू श्रीवास्तव कई दिनों तक वैंटीलेटर पर रहे। अटैक पड़ा तो नस खोल दी गई जिससे हृदय तो काम करना शुरू कर देता है लेकिन इस दौरान जो ब्रेन को आघात लगा उससे व्यक्ति कई दिनों तक वैंटीलेटर पर रह सकता है।
जीवन शैली में बदलाव से बढ़ रहे कार्डियक अरेस्ट
बदलती जीवन शैली के कारण कार्डियक अरेस्ट के मामलों में तेजी आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2015,16 के दौर में भारत में सालाना 7 लाख कार्डियक अरेस्ट के मामले रिपोर्ट होते थे, पर अब इनका प्रोजेक्शन करीब 12 लाख हो गया है, जो चिंता का विषय भी है। भारत में कार्डियक अरेस्ट के केस में सर्वाइवल रेट महज 1 फीसदी के करीब है। हमें उपचारात्मक उपाय के अलावा बचने के उपाय पर भी ध्यान देने के जरूरत है।
जीवन शैली में बदलाव बड़ा कारण - Cardiac arrests on the rise due to lifestyle changes
भारत में हार्ट अटैक का खतरा कितना बड़ा - How big is the risk of heart attack in India ?
1. भारत में 50 फीसदी हार्ट अटैक 50 साल से कम उम्र के लोगों को आता है।
2. 25 फीसदी हार्ट अटैक के मामलों में मरीज की उम्र 40 साल से कम होती है
3. 26 से 40 एज ग्रुप के 53 फीसदी लोग हार्ट अटैक के हाई रिस्क जोन में हैं
4. कार्डियक अरेस्ट के कारण 10 में से 9 लोगों को अस्पताल तक पहुंचने का समय नहीं मिल पाता है।
5. 2030 तक कार्डियक अरेस्ट से सबसे ज्यादा मौत भारत में होगी
कार्डियेक अरेस्टः भारत में कैसे साल दर साल बढ़ती गई मौत
वर्ष कुल मृत्यु 18 साल से 45 साल
2021- 28 हजार 449 मौत 11 हजार 85 मौत
2020 - 28 हजार 680 मौत 10 हजार 750 मौत
2019 - 28 हजार 5 मौत 10 हजार 133 मौत
2018- 25 हजार 764 मौत 9 हजार 498 मौत
2017 - 23 हजार 246 मौत 8 हजार 851 मौत
स्टडी के अनुसार कोविड के दौरान 50 साल से कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक की आशंका 11 फीसदी थी लेकिन कोविड के बाद हार्ट अटैक की आशंका बढ़कर 13 फीसदी हो गई। पोस्ट कोविड हार्ट ब्लॉकेज, ब्रेन स्ट्रोक के साथ-साथ डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मामले भी बढ़े हैं।







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