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स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत का बजट पर्याप्त नहीं - वी के पॉल

स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत का कुल खर्च कम है। इसे ठीक किया जाना चाहिए। यह कठिन  संसाधनों से आता है और कई प्रतिस्पर्धी प्राथमिकताएं भी हैं। फिर भी यह कम है। 

हे.जा.स.
November 20 2020 Updated: January 13 2021 02:43
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स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत का बजट पर्याप्त नहीं - वी के पॉल प्रतीकात्मक फोटो

- पीटीआई

भारत समग्र स्वास्थ्य क्षेत्र पर कम खर्च करता है,  इस स्थिति में सुधार होना चाहिए। उक्त बातें नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने गुरुवार को कहा।  पॉल कोरोनो वायरस महामारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों के समन्वय में एक प्रमुख अधिकारी हैं।

उन्होंने कहा कि कोविड -19 का अनुभव बताता है कि स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च में वृद्धि करने की ज़रुरत है इसके लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें उचित कदम उठाएंगी।

उद्योग मंडल CII द्वारा आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत का कुल खर्च कम है। इसे ठीक किया जाना चाहिए। यह कठिन  संसाधनों से आता है और कई प्रतिस्पर्धी प्राथमिकताएं भी हैं। फिर भी यह कम है। 

पॉल ने बताया कि वर्ष 2018-19 में स्वास्थ्य क्षेत्र पर भारत का खर्च जीडीपी का 1.5 प्रतिशत था। यह इंगित करता है कि पिछले दशक की अपेक्षा इस दिशा में कुछ सुधार हुआ है।

उन्होंने जोड़ा कि स्वास्थ्य सेवाओं पर सकल घरेलू उत्पाद का 1.5 प्रतिशत व्यय स्वीकार्य नहीं है। अच्छा भी नहीं है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय देशों में स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च सकल घरेलू उत्पाद का 7 से 8 प्रतिशत है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) दस्तावेज का हवाला देते हुए, पॉल ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र पर भारत का खर्च 2025 तक 3 प्रतिशत होना चाहिए।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने के लिए अनुरोध करने की ज़रुरत बताया।  उन्होंने कहा कि कोविड़ -19 के बाद स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

पॉल ने कहा कि सरकार को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को लक्षित करना चाहिए और निजी क्षेत्र को द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पर ध्यान देना चाहिए। द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवा में, विस्तार की बहुत बड़ी गुंजाइश है।

पॉल ने बताया की पिछले छह वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। स्नातक चिकित्सा सीटों की संख्या में 48 प्रतिशत की वृद्धि और स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों में 79 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अगले तीन वर्षों में 114 नए सरकारी अस्पताल सामने आएंगे।

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