











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। ब्लड प्रेशर की दवा बनाने में अग्रणी जेबी केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड ने अब नेफ्रोलॉजी के क्षेत्र में प्रवेश करने की घोषणा की है। गंभीर किडनी बिमारियों पर इलाज ले रहे मरीज़ों की सेवा के लिए कंपनी ने "रेनोवा" यह नया, समर्पित डिवीज़न शुरू किया है।

नया डिवीज़न किडनी की गंभीर बिमारियों में व्यापक देखभाल पर ध्यान केंद्रित करेगा। किडनी की गंभीर बिमारियों में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के प्रबंधन से लेकर गुर्दे की आखरी स्टेज पर पहुंच चुकी बीमारी तक व्यापक देखभाल के लिए यह डिवीज़न प्रयासशील रहेगा।
सिलाकर और निकार्डिया जैसे ब्रांड्स लाकर उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) क्षेत्र की अग्रसर कंपनियों में स्थान हासिल करने के बाद अब जेबीसीपीएल ने किडनी की गंभीर बिमारियों से पीड़ित मरीज़ों की मदद करने पर भी ध्यान केंद्रित करना शुरू किया है। किडनी की गंभीर बीमारी (क्रोनिक किडनी डिजीज - सीकेडी) दुनिया भर में होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है।
2015 की ग्लोबल डिसीज बर्डन रिपोर्ट के अनुसार सीकेडी को मृत्यु के सबसे सामान्य कारणों में से एक माना गया है। पिछले दस सालों में मृत्यु दर में 37.1 प्रतिशत से बढ़ा है। भारत में, सीकेडी के बोझ का सही तरीके से आकलन नहीं किया गया है, लेकिन यह अनुमान लगाया गया है कि हर एक मिलियन (दस लाख) आबादी में सीकेडी के 800 रोगी हैं। गुर्दे की बीमारी से पीड़ित अंतिम चरण के रोगियों की संख्या हर एक मिलियन आबादी में 150-200 रोगी है। दुर्भाग्य से, इनमें से काफी कम सीकेडी मरीज़ नेफ्रोलॉजिस्ट के पास जा पाते हैं और ज्यादातर मरीज़ बीमारी बहुत ज़्यादा बढ़ने पर, आखरी चरण में डॉक्टर के पास जाते हैं। इसलिए, इस क्षेत्र में विशेष ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
जे. बी. केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के सीईओ और पूर्णकालिक निदेशक श्री. निखिल चोपड़ा ने बताया, "उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) क्षेत्र में अग्रसर कंपनियों में से एक कंपनी के रूप में काम करते हुए हमने देखा कि किडनी की गंभीर बिमारियों की समस्या देश में बढ़ती जा रही है और मरीज़ों की संख्या भारी मात्रा में बढ़ती जा रही है। सीकेडी से जुड़े उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के मामले बढ़ रहे हैं और हमें विश्वास है कि यह पहल हमें सीकेडी रोगियों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाएगी।”







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