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भारतीय दर्शन में संभोग सामान्य आनंद के बजाय पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने का मार्ग है 

भारत का सार्वजनिक रूप से ज्ञात यौन साहित्य कामसूत्र ग्रंथ हैं। भारत में प्रेम-जुनून-सुख की चौंसठ कलाओं की शुरुआत हुई। कला के कई अलग-अलग संस्करण हैं जो संस्कृत में शुरू हुए और अन्य भाषाओं में अनुवाद किए गए।

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August 18 2022 Updated: August 18 2022 03:43
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भारतीय दर्शन में संभोग सामान्य आनंद के बजाय पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने का मार्ग है  प्रतीकात्मक चित्र

प्राचीन काल में भारत ने कला और साहित्य के माध्यम से यौन शिक्षा के उपयोग का बीड़ा उठाया था। सेक्स के इतिहास में भारत की भूमिका अति महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में ही सबसे पहले ऐसे ग्रन्थ (कामसूत्र ) की रचना हुई जिसमें संभोग को विज्ञान के रूप में देखा गया। यह भी कहा जा सकता है कि कला और साहित्य के माध्यम से यौन शिक्षा का अग्रदूत भारत ही था। 


सेक्स (sex) के प्रति दृष्टिकोण का पहला प्रमाण हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म के प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। जो दुनिया का पहला और सबसे पुराना जीवित साहित्य है। ये प्राचीन ग्रंथ कामुकता, विवाह और प्रजनन प्रार्थना पर नैतिक दृष्टिकोण प्रकट करते हैं। यौन जादू कई वैदिक अनुष्ठानों (Vedic rituals) में चित्रित किया गया है। प्रजनन संस्कार का उद्देश्य राज्य की उत्पादकता और युद्ध कौशल की रक्षा करना और उसे बढ़ाना था। 


प्राचीन भारत (ancient India) के महाकाव्य, रामायण (Ramayana) और महाभारत (Mahabharata) का एशिया की संस्कृति पर बहुत प्रभाव पड़ा। इसके इन ग्रंथों ने चीनी, जापानी, तिब्बती और दक्षिण पूर्व एशियाई संस्कृति को प्रभावित किया। ये ग्रंथ इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं कि प्राचीन भारत में, एक विवाहित जोड़े के बीच सेक्स को एक पारस्परिक कर्तव्य माना जाता था, जहां पति और पत्नी एक-दूसरे को समान रूप से आनंदित करते थे। इनमें सेक्स को एक निजी मामला माना जाता है।  


भारतीय पौराणिक और ऐतिहासिक पुस्तकों से पता चलता है कि प्राचीन काल में बहुविवाह (polygamy) की अनुमति थी। व्यवहारिक रूप से यह केवल शासकों और कुलीन वर्गों में  ही प्रचलित था। आम लोग एक विवाह से बंधें रहतें थें। कई संस्कृतियों में शासक वर्ग के लिए वंशवादी उत्तराधिकार को संरक्षित करने के लिए बहुविवाह की प्रथा आम बात थी।


भारत का सार्वजनिक रूप से ज्ञात यौन साहित्य कामसूत्र (Kamasutra) ग्रंथ हैं। भारत में प्रेम-जुनून-सुख की चौंसठ कलाओं की शुरुआत हुई। कला के कई अलग-अलग संस्करण हैं जो संस्कृत में शुरू हुए और अन्य भाषाओं में अनुवाद किए गए। कई मूल ग्रंथ गायब हैं और उनके अस्तित्व का एकमात्र सुराग अन्य ग्रंथों में है। महर्षि वात्स्यायन का कामसूत्र बचे हुए ग्रंथों में से एक है और इसका पहली बार सर रिचर्ड बर्टन और एफएफ अर्बुथनॉट द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किया गया था। कामसूत्र अब दुनियाभर में सबसे व्यापक रूप से पढ़ा जाता है। यह उन तरीकों का विवरण देता है जिसमें स्त्री और पुरुष को वैवाहिक संबंधों (marital relationship) में एक-दूसरे का आनंद लेना चाहिए।


जब इस्लामी और अंग्रेजी संस्कृति भारत में आई, तो भारत के यौन उदारवाद (sexual liberalism) पर उनका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। भारतीय धर्मों, जैसे कि हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म में सेक्स को आमतौर पर दीर्घकालिक विवाह संबंध के रूप में देखा जाता है। आधुनिक भारत में, सुशिक्षित शहरी आबादी के बीच यौन उदारवाद का पुनर्जागरण हुआ है। 


भारतीय दर्शन (Indian philosophy) के तांत्रिक विचारधारा में भी सेक्स को एक पवित्र कर्तव्य के रूप में  महत्त्व दिया गया है। ऐसा माना जाता है कि तांत्रिक सेक्स (tantric sex) के दौरान सच्चा आनंद प्राप्त किया जा सकता है, जिसका उद्देश्य संभोग सुख प्राप्त करना नहीं है बल्कि अपनी भावनाओं पर ध्यान केंद्रित करना है। संभोग तांत्रिक साधना के हर रूप का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह बाएं हाथ के तंत्र का अभिन्न अंग है। भारतीय परम्परा में यौन अभ्यास (sexual practice) का मुख्य लक्ष्य सामान्य आनंद के बजाय पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए यौन ऊर्जा (sexual energy) का उपयोग करना है। तंत्र दर्शन में तांत्रिक सेक्स को एक सुखद अनुभव माना गया है।

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