देश का पहला हिंदी हेल्थ न्यूज़ पोर्टल

उत्तर प्रदेश

एसोसिएशन ऑफ स्पाइन सर्जन ने शुरू किया रीढ़ और मस्तिष्क को चोट से बचाने का जागरूकता कार्यक्रम। 

भारत में हर साल एक मिलियन लोग इंजरी की वजह से मरते हैं और 20 मिलियन लोग हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं। इंजरी की लागत भारतीय जीडीपी के 0.29% और  0.69% के बीच है।

हुज़ैफ़ा अबरार
January 29 2021 Updated: January 31 2021 17:42
0 31414
एसोसिएशन ऑफ स्पाइन सर्जन ने शुरू किया रीढ़ और मस्तिष्क को चोट से बचाने का जागरूकता कार्यक्रम।  डॉ एच एस छाबरा

लखनऊ। पूरी दुनिया के साथ भारत में स्पाइनल (रीढ़ की हड्डी) और ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी (मस्तिष्क की चोट), मृत्यु और विकलांगता का प्रमुख  कारण है। हालांकि ऐसे चोटों के बढ़ते बोझ के बावजूद इनसे बचाव के उपायों को नज़रअंदाज किया जाता रहा है । भारत में स्पाइनल सर्जनों की सर्वोच्च संस्था इस समस्या को हल करने के लिए एक बड़ी देशव्यापी पहल कर रहा है। ताकि चोटों को रोकने के लिए लोगों को शिक्षित, प्रशिक्षित और सशक्त बनाकर चोट के बोझ को कम किया जा सके।

एसोसिएशन ऑफ स्पाइन सर्जन ऑफ इंडिया ने आज देशव्यापी इंजरी प्रीवेंशन अवेयरनेस प्रोग्राम को लांच करने की घोषणा की है। इस प्रोग्राम के तहत लोगों में इंजरी को रोकने और रीढ़ को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जागरूकता फैलाई जायेगी ताकि चोट से सम्बंधित कोई विकलांगता या मृत्यु न हो। एएसएसआई पूरे भारत से 1000 स्कूलों, कॉलेज, कंपनियों और इंडस्ट्री से साझेदारी करके इस जागरूकता कार्यक्रम को बढ़ाएगा।

साल भर चलने वाले इस अभियान को देश के 20 शहरों में किया जाएगा, जिसमें प्रमुख लक्ष्य शहरों में लखनऊ शामिल है। शहर  के 50 स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थान इस अभियान का हिस्सा होंगे। प्रभावी चोट निवारण रणनीतियों को लागू करने की दिशा में नीति निर्माताओं और एनफोर्समेंट एजेंसीज को संवेदनशील बनाना अभियान का एक अन्य प्रमुख तत्व होगा।

इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर, नई दिल्ली के स्पाइन सर्विस के चीफ और एएसएसआई के अध्यक्ष डॉ एच एस छाबरा ने कहा, "दुनिया में चोट सबसे ज्यादा नज़रअंदाज की जाने वाली समस्या है। भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में सिर और रीढ़ की चोट मौत और विकलांगता होने का सबसे बड़ा कारण है। हालांकि सिर और रीढ़ की चोट को रोकने के लिए बहुत ही कम सावधानी बरती जाती है और इसे बमुश्किल ही प्राथमिकता दी जाती है। चोटों के इस बोझ को घटाने के लिए सामाजिक स्तर के चोट निवारण कार्यक्रम ज्यादा लागत प्रभावी जरिया हो सकता है। चोट को रोकने के लिए प्राथमिक उपायों की कमी को हल करने के लिए एएसएसआई ने राष्ट्रव्यापी जागरूकता कार्यक्रम चलाया है जो लोगों को जागरूक करेगा और उनकी सुरक्षा में सुधार, व्यवहार परिवर्तन और स्वस्थ रीढ़ वाली लाइफस्टाइल को अपनाने में मदद करेगा। इस जागरूकता कार्यक्रम का लक्ष्य है कि इस साल स्कूलों, कॉलेज, संस्थाओं और कंपनियों में विभिन्न पहल के जरिये  1000000 लोगों तक पहुंचा जाए।"

एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल एक मिलियन लोग इंजरी की वजह से मरते हैं और 20 मिलियन लोग हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं। इंजरी की लागत भारतीय जीडीपी के 0.29% और  0.69% के बीच है। इससे देश पर यह समस्या बड़ा बोझ बन गयी है। हालांकि  मस्कुलोस्केलेटल इंजरी, ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी (टीबीआई) और स्पाइनल कॉर्ड इंजरी एससीआई के परिणामस्वरूप होने वाली बड़ी संख्या में घटनाएं रोकी जा सकती हैं।

इस कार्यक्रम के तहत एएसएसआई देश के कई सोसाइटीज के साथ गठबंधन कर रहा है ताकि ट्रेनर की एक फौज को तैयार किया जा सके जो कंपनियों, स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में चोट के रोकने के लिए लोगों को प्रशिक्षित करेंगे।

एएसएसआई के कोषाध्यक्ष और जॉइंट सेक्रेटरी डॉ गौतम जावेरी ने कहा, " लोगों का मानना है कि रीढ़ की  चोट मात्र दुर्घटना होने से ही होती है। लेकिन यह सोच बिल्कुल गलत है। हर दिन की छोटी-छोटी आदत से भी रीढ़ की चोट पैदा हो सकती है। इन आदतों में ख़राब बैठने  की मुद्रा, भारी बैग ढोना, जिस चीज पर आप बैठते है उसका सही न होना, बिना किसी की देखरेख के एक्सरसाइज या फिजकल ट्रेनिंग करना या हेलमेट न पहनना भी शामिल होता है। इससे भी रीढ़ की चोटे हो सकती है। सीटबेल्ट लगाने और अच्छा हेलमेट पहनने, ऑफिस और स्कूलों में एर्गोनोमिक फर्नीचर इस्तेमाल करने और बैठने की सही मुद्रा को अपना कर पीठ दर्द और चोट के बोझ को काफी कम किया जा सकता है। प्रभावी सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर देने के अलावा जागरूकता कार्यक्रम से स्वस्थ रीढ़ वाली लाइफस्टाइल, सही मुद्रा की तकनीक और एक्सरसाइज करने में सुधार आयेगा।'

डॉ शंकर आचार्य ने कहा, 'प्रीवेंशन प्रोग्राम मरीजों की जिंदगी बचाने के लिय इमरजेंसी केयर के मुकाबले सस्ता है। दरअसल एससीआई में ट्रीटमेंट और प्रीवेंशन का लीडिंग आर्गेनाइजेशन 'क्रिस्टोफर रीव फाउंडडेशन' ने अनुमान लगाया है कि अमेरिका एससीआई बेस्ड प्रीवेन्टिव और थेरेपटिक हस्तक्षेप करके 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बचत कर सकता है। भारत में भी ऐसा ही किया जा सकता है क्योंकि यहाँ भी स्पाइन इंजरी और ब्रेन इंजरी का बोझ बहुत ज्यादा है।'

जागरूकता कार्यक्रम में होने वाली गतिविधियों में चोट की रोकथाम रणनीतियों और स्कूल पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में उन्हें शामिल करके पैम्फलेट बनवाना और इन पैम्फलेट को बंटवाना; पोस्टर प्रतियोगिताओं, व्याख्यान और वर्कशॉप, नुक्कड़ नाटक का आयोजन और व्यापक स्तर पर सोशल मीडिया कैम्पेन को चलाना आदि शामिल है।

WHAT'S YOUR REACTION?

  • 1
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0
  • 0

RELATED POSTS

COMMENTS

कोरोना पर स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने की हाई लेवल बैठक

कोरोना पर स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने की हाई लेवल बैठक

एस. के. राणा December 24 2022 29649

बैठक के बाद शुक्रवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी की। इसमें केंद्रीय स्वास्थ्य सच

जागरुकता ही कैंसर से सबसे बड़ा बचाव है:डॉ. डेमियन कोहल 

जागरुकता ही कैंसर से सबसे बड़ा बचाव है:डॉ. डेमियन कोहल 

हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 9695

कैंसर: बुनियादी तौर पर जागरूकता की भारी कमी है। भारत की आबादी दुनिया में सबसे अधिक है। हमारे यहां अ

स्वास्थ्य सेवा का प्रबंधन करने के लिए IAS की तर्ज पर मेडिकल कैडर के स्थापना की मांग। 

स्वास्थ्य सेवा का प्रबंधन करने के लिए IAS की तर्ज पर मेडिकल कैडर के स्थापना की मांग। 

हे.जा.स. January 26 2021 23840

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को प्रशासनिक कार्य का एक अतिरिक्त प्रभार दिया जाता है, जबकि निजी क्षेत

कोरोना के इलाज के लिए डब्ल्यूएचओ ने दो नई दवाओं को दी मंजूरी

कोरोना के इलाज के लिए डब्ल्यूएचओ ने दो नई दवाओं को दी मंजूरी

हे.जा.स. January 15 2022 31586

गंभीर कोविड रोगियों के इलाज के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स के साथ इस्तेमाल की जाने वाली गठिया की दवा बारि

लिपिस्टिक खरीदनें में बरतें यें सावधानियाँ।

लिपिस्टिक खरीदनें में बरतें यें सावधानियाँ।

सौंदर्या राय September 22 2021 30781

आमतौर पर हम लिपस्टिक के ऐड्स, इन्हे प्रमोट करने वाले सेलेब्स और कई बार दोस्तों और जानने वालों की सिफ

लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित किया गया ‘राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस’

लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित किया गया ‘राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस’

आरती तिवारी October 01 2022 34846

17 सितंबर से 01 अक्टूबर तक चलने वाले स्वैच्छिक रक्तदान अभियान का आगाज आज से शुरू हो चुका है। लखनऊ के

वैश्विक महामारी कोरोना को हराने के लिये असामनता को हरा दें: डब्ल्यूएचओ प्रमुख

वैश्विक महामारी कोरोना को हराने के लिये असामनता को हरा दें: डब्ल्यूएचओ प्रमुख

हे.जा.स. January 01 2022 28712

कोविड-19 ने ना सिर्फ लोगों के स्वास्थ्य की चिंता बढ़ाई है बल्कि कई लोगों का रूटीन टीकाकरण, परिवार की

वन पर्यावरण मंत्री ने जिला अस्पताल का किया निरीक्षण

वन पर्यावरण मंत्री ने जिला अस्पताल का किया निरीक्षण

आरती तिवारी September 03 2022 36847

वन पर्यवारण जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री डॉ. अरुण कुमार औरैया दौरे

12-14 वर्ष के बच्चों को लगी 1.80 करोड़ से अधिक टीके की खुराक, कुल टीकाकरण 184.49 करोड़ के पार

12-14 वर्ष के बच्चों को लगी 1.80 करोड़ से अधिक टीके की खुराक, कुल टीकाकरण 184.49 करोड़ के पार

एस. के. राणा April 02 2022 29040

देश में लगातार कोरोना वायरस के मामले कम हो रहे हैं। वहीं टीकाकरण अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत

देश में बढ़ते कोरोना के मामलो पर डब्ल्यूएचओ चितिंत

देश में बढ़ते कोरोना के मामलो पर डब्ल्यूएचओ चितिंत

हे.जा.स. April 01 2023 28323

पिछले 28 दिनों में भारत में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में 114 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है।

Login Panel