











































डॉ एच एस छाबरा
लखनऊ। पूरी दुनिया के साथ भारत में स्पाइनल (रीढ़ की हड्डी) और ट्रॉमेटिक ब्रेन इंजरी (मस्तिष्क की चोट), मृत्यु और विकलांगता का प्रमुख कारण है। हालांकि ऐसे चोटों के बढ़ते बोझ के बावजूद इनसे बचाव के उपायों को नज़रअंदाज किया जाता रहा है । भारत में स्पाइनल सर्जनों की सर्वोच्च संस्था इस समस्या को हल करने के लिए एक बड़ी देशव्यापी पहल कर रहा है। ताकि चोटों को रोकने के लिए लोगों को शिक्षित, प्रशिक्षित और सशक्त बनाकर चोट के बोझ को कम किया जा सके।
एसोसिएशन ऑफ स्पाइन सर्जन ऑफ इंडिया ने आज देशव्यापी इंजरी प्रीवेंशन अवेयरनेस प्रोग्राम को लांच करने की घोषणा की है। इस प्रोग्राम के तहत लोगों में इंजरी को रोकने और रीढ़ को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जागरूकता फैलाई जायेगी ताकि चोट से सम्बंधित कोई विकलांगता या मृत्यु न हो। एएसएसआई पूरे भारत से 1000 स्कूलों, कॉलेज, कंपनियों और इंडस्ट्री से साझेदारी करके इस जागरूकता कार्यक्रम को बढ़ाएगा।
साल भर चलने वाले इस अभियान को देश के 20 शहरों में किया जाएगा, जिसमें प्रमुख लक्ष्य शहरों में लखनऊ शामिल है। शहर के 50 स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थान इस अभियान का हिस्सा होंगे। प्रभावी चोट निवारण रणनीतियों को लागू करने की दिशा में नीति निर्माताओं और एनफोर्समेंट एजेंसीज को संवेदनशील बनाना अभियान का एक अन्य प्रमुख तत्व होगा।
इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर, नई दिल्ली के स्पाइन सर्विस के चीफ और एएसएसआई के अध्यक्ष डॉ एच एस छाबरा ने कहा, "दुनिया में चोट सबसे ज्यादा नज़रअंदाज की जाने वाली समस्या है। भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में सिर और रीढ़ की चोट मौत और विकलांगता होने का सबसे बड़ा कारण है। हालांकि सिर और रीढ़ की चोट को रोकने के लिए बहुत ही कम सावधानी बरती जाती है और इसे बमुश्किल ही प्राथमिकता दी जाती है। चोटों के इस बोझ को घटाने के लिए सामाजिक स्तर के चोट निवारण कार्यक्रम ज्यादा लागत प्रभावी जरिया हो सकता है। चोट को रोकने के लिए प्राथमिक उपायों की कमी को हल करने के लिए एएसएसआई ने राष्ट्रव्यापी जागरूकता कार्यक्रम चलाया है जो लोगों को जागरूक करेगा और उनकी सुरक्षा में सुधार, व्यवहार परिवर्तन और स्वस्थ रीढ़ वाली लाइफस्टाइल को अपनाने में मदद करेगा। इस जागरूकता कार्यक्रम का लक्ष्य है कि इस साल स्कूलों, कॉलेज, संस्थाओं और कंपनियों में विभिन्न पहल के जरिये 1000000 लोगों तक पहुंचा जाए।"
एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल एक मिलियन लोग इंजरी की वजह से मरते हैं और 20 मिलियन लोग हॉस्पिटल में भर्ती होते हैं। इंजरी की लागत भारतीय जीडीपी के 0.29% और 0.69% के बीच है। इससे देश पर यह समस्या बड़ा बोझ बन गयी है। हालांकि मस्कुलोस्केलेटल इंजरी, ट्रॉमैटिक ब्रेन इंजरी (टीबीआई) और स्पाइनल कॉर्ड इंजरी एससीआई के परिणामस्वरूप होने वाली बड़ी संख्या में घटनाएं रोकी जा सकती हैं।
इस कार्यक्रम के तहत एएसएसआई देश के कई सोसाइटीज के साथ गठबंधन कर रहा है ताकि ट्रेनर की एक फौज को तैयार किया जा सके जो कंपनियों, स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में चोट के रोकने के लिए लोगों को प्रशिक्षित करेंगे।
एएसएसआई के कोषाध्यक्ष और जॉइंट सेक्रेटरी डॉ गौतम जावेरी ने कहा, " लोगों का मानना है कि रीढ़ की चोट मात्र दुर्घटना होने से ही होती है। लेकिन यह सोच बिल्कुल गलत है। हर दिन की छोटी-छोटी आदत से भी रीढ़ की चोट पैदा हो सकती है। इन आदतों में ख़राब बैठने की मुद्रा, भारी बैग ढोना, जिस चीज पर आप बैठते है उसका सही न होना, बिना किसी की देखरेख के एक्सरसाइज या फिजकल ट्रेनिंग करना या हेलमेट न पहनना भी शामिल होता है। इससे भी रीढ़ की चोटे हो सकती है। सीटबेल्ट लगाने और अच्छा हेलमेट पहनने, ऑफिस और स्कूलों में एर्गोनोमिक फर्नीचर इस्तेमाल करने और बैठने की सही मुद्रा को अपना कर पीठ दर्द और चोट के बोझ को काफी कम किया जा सकता है। प्रभावी सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर देने के अलावा जागरूकता कार्यक्रम से स्वस्थ रीढ़ वाली लाइफस्टाइल, सही मुद्रा की तकनीक और एक्सरसाइज करने में सुधार आयेगा।'
डॉ शंकर आचार्य ने कहा, 'प्रीवेंशन प्रोग्राम मरीजों की जिंदगी बचाने के लिय इमरजेंसी केयर के मुकाबले सस्ता है। दरअसल एससीआई में ट्रीटमेंट और प्रीवेंशन का लीडिंग आर्गेनाइजेशन 'क्रिस्टोफर रीव फाउंडडेशन' ने अनुमान लगाया है कि अमेरिका एससीआई बेस्ड प्रीवेन्टिव और थेरेपटिक हस्तक्षेप करके 400 बिलियन अमेरिकी डॉलर की बचत कर सकता है। भारत में भी ऐसा ही किया जा सकता है क्योंकि यहाँ भी स्पाइन इंजरी और ब्रेन इंजरी का बोझ बहुत ज्यादा है।'
जागरूकता कार्यक्रम में होने वाली गतिविधियों में चोट की रोकथाम रणनीतियों और स्कूल पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में उन्हें शामिल करके पैम्फलेट बनवाना और इन पैम्फलेट को बंटवाना; पोस्टर प्रतियोगिताओं, व्याख्यान और वर्कशॉप, नुक्कड़ नाटक का आयोजन और व्यापक स्तर पर सोशल मीडिया कैम्पेन को चलाना आदि शामिल है।







हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 7980
हुज़ैफ़ा अबरार August 04 2026 0 1939
हुज़ैफ़ा अबरार August 01 2026 0 1694
हुज़ैफ़ा अबरार August 08 2026 0 1582
हुज़ैफ़ा अबरार August 14 2026 0 7980
एस. के. राणा January 20 2026 0 5271
हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 5173
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 5082
एस. के. राणा February 01 2026 0 4907
एस. के. राणा January 13 2026 0 4781
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 4725
सौंदर्या राय April 11 2022 0 87183
सौंदर्या राय April 08 2022 0 35169
सौंदर्या राय April 07 2022 0 38272
सौंदर्या राय April 05 2022 0 35763
लेख विभाग March 19 2022 0 35392
सौंदर्या राय March 16 2022 0 73001
बेसन का इस्तेमाल करने से चेहरे की टैनिंग दूर होती है। बेसन त्वचा की रंगत में सुधार लाने के साथ पिंपल
17 सितंबर से 01 अक्टूबर तक चलने वाले स्वैच्छिक रक्तदान अभियान का आगाज आज से शुरू हो चुका है। लखनऊ के
बदलते मौसम में आप महीने में दो बार इस हेयर क्रीम को जरूर लगाएं। सबसे खास बात यह है कि आप इस नेचुरल ह
कई माता-पिता जब अपने बच्चें में कम वजन या कम भूख के लक्षणों को देखते हैं तो वह पास के क्लीनिक में जा
समारोह में पद्म भूषण प्रो. के. श्रीनाथ रेडडी का प्रो देवेंद्र गुप्ता रिसर्च ओरेशन अवार्ड के अंतर्गत
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन आठ से 10 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमे
राजधानी में मंकीपॉक्स वायरल का 7वां मरीज संक्रमित मिला है। रविवार को एक 24 वर्षीय अफ्रीकी महिला में
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि देश में 18 जिले ऐसे हैं जहां पिछले
शहर में अभियान के दौरान समस्त जोनो में नगर निगम के अपर नगर आयुक्त की जिम्मेदारी तय की गयी थी। स्थलीय
मुख्यमंत्री तमांग ने कहा कि सिक्किम में अब सभी को मिनरल वाटर की बोतलों से दूर रहना होगा और प्राकृतिक

COMMENTS