











































प्रतीकात्मक
नयी दिल्ली। ओमीक्रोन के खतरे के बीच इस बात पर भी बहस चल रही है कि पूर्व में हुआ संक्रमण और टीका कितने समय तक असरदार रहेगा। इस पर स्थिति साफ करते हुए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने दावा किया है कि संक्रमण से उत्पन्न प्रतिरोधकता नौ महीने, टीके से छह महीने और हाइब्रिड इम्यूनिटी दस महीने तक असरदार पाई गई है।
आईसीएमआर के महानिदेशक डा. बलराम भार्गव ने गुरुवार को कहा कि संक्रमण से तीन प्रकार से प्रतिरोधकता पैदा होती है। एक एंडीबॉडीज, दूसरी सेल मिडिएटेड तथा तीसरी इम्यूनोलॉजिक मेमोरी के जरिये।
सिर्फ एंटीबॉडीज जांच से प्रतिरोधकता का आकलन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि तीन वैश्विक अध्ययनों में पाया गया है कि संक्रमण के बाद 8-13 महीने तक प्रतिरोधकता रही है। ये अध्ययन अमेरिका एवं चीन में हुए थे। जबकि भारत में हुए तीन अध्ययन बताते हैं कि इम्यनिटी 6-8 महीने तक रहती है।
ये अध्ययन पुणे एवं चेन्नई में आईसीएमआर ने किए थे तथा एक अध्ययन मुंबई में हुआ है। इन अध्ययनों से यह नतीजा निकलता है कि संक्रमण से उत्पन्न प्रतिरोधकता औसतन नौ महीने तक कारगर है।
भागर्व ने कहा कि इस सिलसिले में टीके से उत्पन्न इम्यूनिटी को लेकर देश-विदेश में हुए अध्ययन बताते हैं कि वह छह महीने या इससे अधिक समय तक कायम रहती है। हालांकि एक अध्ययन में संक्रमण के बाद कोविशील्ड लेने वालों में 10 महीने तक प्रतिरोधकता मौजूद रहती है।
भार्गव ने इस सिलसिले में नेचर में प्रकाशित एक शोध का भी जिक्र किया, जिसमें दावा किया गया है कि हाइब्रिड इम्यूनिटी ज्यादा असरदार पाई गई है।







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