











































गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज में आयोजित दीक्षा पाठ्यचर्या महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह।
गोरखपुर। महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके सिंह ने कहा कि विश्व की अति प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद एक बार फिर वैश्विक पुनर्स्थापना की ओर अग्रसर है। संकटकाल में ही हितैषी की पहचान होती है और कोरोना के संकट में पूरी दुनिया में संक्रमितों के इलाज व रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि हेतु आयुर्वेद की उपयोगिता सच्चे हितैषी के रूप में प्रमाणित हुई है। आयुर्वेद के विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है कि वह समयानुकूल शोध व अनुसंधान के जरिये समूचे विश्व की आयुर्वेद से जुड़ी उम्मीदों को पूरा करें।
प्रो. एके सिंह शुक्रवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम की संस्था गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आयुर्वेद कॉलेज) में बीएएमएस प्रथम वर्ष के नवागत विद्यार्थियों के दीक्षा पाठ्यचर्या (ट्रांजिशनल करिकुलम) समारोह के पांचवें दिन आयुर्वेद (Ayurved) के इतिहास, दर्शन व अवधारणा पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हजारों वर्ष पूर्व महर्षि चरक ने आयुर्वेद के विषय में जो शोध किए, उसे आज विश्वविद्यालयों और मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाया जा रहा है। यह चिकित्सा पद्धति त्रिदोष कफ, वात व पित्त के प्रबंधन के माध्यम से समग्र आरोग्यता प्राप्त करने की पद्धति है। त्रिदोषों के प्रबंधन के लिए पंचमहाभूतों के बारे में विश्लेषणात्मक जानकारी आवश्यक है इसलिए आयुर्वेद के छात्रों को अपने विषय के प्रति एकाग्रचित्त और मननशील होना चाहिए। उन्होंने गुरु गोरखनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में उपलब्ध अद्यानुतन संसाधन, वातावरण, फैकल्टी की सराहना करते हुए कहा कि इन सबके समन्वय में यहां के विद्यार्थी आयुर्वेद के क्षेत्र में स्वर्णिम सफलता हासिल कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें कड़ी मेहनत, दूर दृष्टि व पक्का इरादा को अपना मूल मंत्र बनाना होगा।
एक अन्य सत्र में गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के संहिता सिद्धांत विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुमिथ कुमार एम ने विद्यार्थियों को अंतरवैयक्तिक संबंधों पर जरूरी टिप्स दिए। उन्होंने बताया कि एक योग्य चिकित्सक बनने के लिए कम्युनिकेशन स्किल पर भी ध्यान देने की जरूरत है। बेहतर कम्युनिकेशन स्किल होने पर ही हम मरीज की परेशानी को बेहतर तरीके से समझ कर उसे सन्तोषप्रद इलाज दे सकेंगे। एनेस्थीसिया विभाग के डॉ अभिनीत वाजपेयी ने "बेसिक लाइफ सपोर्ट और फर्स्ट एड" विषय पर जानकारी साझा की।
चरक व सुश्रुत के सिद्धांतों को पुनः प्रयोगात्मक रूप से सिद्ध करना है: डॉ राव
दीक्षा पाठ्यचर्या समारोह में शुक्रवार के पहले सत्र में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, आरोग्यधाम के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव ने गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आयुर्वेद कॉलेज) की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के दौर का बीएएमएस विद्यार्थी आयुर्वेद, मॉडर्न मेडिसिन और योग तीनों का ज्ञाता होता है। विद्यार्थी को स्व मूल्यांकन के आलोक में आत्मविश्वास से भरा होना चाहिए। एमबीबीएस के छात्र जहां सिर्फ दो भाषाओं की जानकारी रखते हैं जबकि बीएएमएस के विद्यार्थी इसके साथ ही देवभाषा संस्कृत में भी दक्ष हो जाते हैं। आज नासा ने भी संस्कृत की वैज्ञानिकता को अंगीकार किया है। डॉ. राव ने कहा कि महर्षि चरक और महर्षि सुश्रुत के आयुर्वेद के सिद्धांतों को हमें एक बार फिर प्रयोगात्मक रूप से सिद्ध करके दुनिया के सामने रखना है। इस आयुर्वेद कॉलेज की स्थापना का यह एक प्रमुख उद्देश्य है। छात्रों को भी इस उद्देश्य के साथ जुड़ना होगा।
वक्ताओं का स्वागत गुरु गोरक्षनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्राचार्य डॉ. पी. सुरेश ने किया। कार्यक्रमों में प्रो. (डॉ) एसएन सिंह, प्रो. (डॉ) गणेश पाटिल, डॉ प्रज्ञा सिंह, एसोसिएट प्रो. डॉ पीयूष वर्सा, डॉ प्रिया नायर आदि की सक्रिय सहभागिता रही।







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