












































प्रतीकात्मक
लखनऊ। एराज़ लखनऊ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ने सीमेंस हेल्दिनियर्स के साथ भागीदारी में लखनऊ स्थित अपने कैम्पस में अपनी इनोवेशन थिंक टैंक (आईटीटी) लैब शुरू की है। यह लैब एक इनोवेशन हब होगी जहाँ शोधकर्ता फैकल्टी मेम्बर्स और स्टूडेंट्स समेत प्रतिभागी आम समझ से बाहर की सोचकर हेल्थएकेयर से जुड़ी समस्यातओं का हल निकाल सकते हैं। वे क्लिनिकल डेटा के विश्लेषण और रोगी की देखभाल की बेहतरी के लिये टेक्नोलॉजी के इस्तेेमाल पर केन्द्रित होंगे। लखनऊ की यह आईटीटी लैब भारत के किसी अस्पताल में पहली इनोवेशन थिंक टैंक लैब है। यह प्रोफेसर सुल्तान हैदर के नेतृत्व में सीमेंस हेल्दिनियर्स के इनोवेशन थिंक टैंक लैब्सर के वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा है।
एराज़ यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री मोहसिन अली खान ने कहा एराज़ लखनऊ मेडिकल कॉलेज (ईएलएमसी) ने ऐसी कई पहलों को प्रोत्सहित किया है, जिन्होंने मेडिकल स्टूडेंट्स के प्रशिक्षण को बेहतर बनाकर रोगी की देखभाल में सुधार किया है। इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और एक्सेलेरेटेड रिसर्च एनालीसिस का इस्ते्माल कर, हम वास्तलविक संसार की समस्याओं को हल करते आ रहे हैं। इनमें सबसे हालिया है हमारे अस्पसताल में कोविड-19 के रोगियों के लिये समुचित व्यवस्था। ईएलएमसी में चल रहे अभिनव प्रोजेक्ट्स में से कुछ हैं, जटिल रोगों के मार्गों की मैपिंग, रोगी के पूर्वसक्रिय प्रबंधन के लिये शैक्षणिक वीडियो गेम्स और टेलीमेडिसिन सॉफ्टवेयर्स का विकास। ईएलएमसी की आईटीटी लैब अर्थपूर्ण शोध एवं विकास की इस परिपाटी को निश्चित रूप से गति प्रदान करेगी। एक ओर तो, स्टूडेंट्स और पेशेवरों को अपने क्रियेटिविटी को चौनलाइज करने के लिये मार्गदर्शन और संसाधन मिलेंगे, दूसरी ओर, इनोवेशन को गति मिलने से रोगियों की सेहत बेहतर होगी। हमने ईएलएमसी में इनोवेशन थिंक टैंक की स्थापना के लिये प्रोफेसर सुल्तान को आमंत्रित किया है और उन्हें ईएलएमसी के आईटीटी में प्रोग्राम डायरेक्ट्रशिप तथा एराज़ यूनिवर्सिटी में मानद प्रोफेसरशिप भी दी है।‘’ सीमेंस हेल्दिनियर्स का इनोवेशन थिंक टैंक (आईटीटी) को-क्रियेशन लैब्स् और प्रोग्राम का एक वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज और अस्पंतालों के लिये स्थापित किया गया है। पूरे संस्थान की पहुँच वाले अंतर्विषय और आत्मनिर्भर इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत को देखते हुए आईटीटी की स्था्पना वर्ष 2005 में हुई थी।
सीमेंस हेल्दिनियर्स के वैश्विक आईटीटी इंफ्रास्ट्ररक्चर में जर्मनी, चीन, भारत, टर्की, अमेरिका, संयुक्तग अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम में कई इनोवेशन लैब्सी और आईटीटी प्रोग्राम्स शामिल हैं, जो आईटीटी के 56 एक्टिविटी लोकेशंस से प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। इस प्रोग्राम की सफलता और मान्यता के चलते प्रतिष्ठित स्वास्य्थ रक्षा संस्था नों में उनके प्रबंधन के अनुरोध पर आईटीटी लोकेशंस स्थातपित हुए हैं।
सीमेंस हेल्दिनियर्स में इनोवेशन थिंक टैंक के फाउंडर और ग्लोपबल हेड प्रोफेसर सुल्तान हैदर ने कहा, ‘’हम ईएलएमसी, लखनऊ के साथ भागीदारी करके खुश हैं और हमें विश्वोस है कि इनोवेशन थिंक टैंक लैब इस सम्मानित संस्थान को स्वास्थ्य रक्षा के क्षेत्र में भविष्य के शोध एवं इनोवेशन के लिये सहायता प्रदान करेगा। इसके द्वारा हम विभिन्न विषयों के लोगों को उनकी अलग-अलग योजनाएं साझा करने के लिये एकजुट कर सकेंगे, जिससे इनोवेशन को गति मिलेगी और अच्छेग आइडियाज को साकार होने में मदद मिलेगी।‘







हुज़ैफ़ा अबरार January 25 2026 0 3822
एस. के. राणा January 13 2026 0 3780
हुज़ैफ़ा अबरार February 07 2026 0 3689
एस. के. राणा January 20 2026 0 3640
हुज़ैफ़ा अबरार February 05 2026 0 3360
एस. के. राणा February 01 2026 0 3038
एस. के. राणा February 04 2026 0 2898
सौंदर्या राय April 11 2022 0 86301
सौंदर्या राय April 08 2022 0 33902
सौंदर्या राय April 07 2022 0 37138
सौंदर्या राय April 05 2022 0 34909
लेख विभाग March 19 2022 0 34321
सौंदर्या राय March 16 2022 0 71587
इस मौसम में भारत के कई राज्यों में डेंगू और मलेरिया का कहर बरप रहा है। यह बीमारी एडीज नामक मच्छर के
जहाँ-जहाँ आपकी त्वचा ढ़ीली है, शरीर के ऐसे हिस्सों पर फोकस करें | अपने पेट और नितम्बों को न भूलें |
शोधकर्ताओं ने बताया कि कोरोना का टीका लगाने से एंटीबाडी में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। टीके से उन मात
विभिन्न आयु वर्गों के कोविड पाजिटिव व लक्षणयुक्त व्यक्तियों के इस्तेमाल के लिए समिति द्वारा तय की गई
‘उमंग’ के माध्यम से अपोलो हॉस्पिटल्स लखनऊ ने एक बार फिर यह दोहराया कि यहां कैंसर के इलाज में बेहतरीन
डा सूर्यकान्त ने लोगों को बताया कि दुनिया में प्रतिवर्ष एक करोड़ टीबी के नये रोगी होते है, जिनमें से
पिछले कुछ दशकों से चिकित्सा, प्रौद्यौगिकी, पूंजीगत वित्त पोषण और विनियामक ढांचे में अंतरराष्ट्रीय व्
डॉ. केपी गुप्ता ने कहा कि जिला अस्पताल रीवा को कैंसर रोग का संभागीय डिपो बना दिया गया है, इसलिए अब
ज्यादातर केसेस में मरीजों में गांठ तो रहती है लेकिन दर्द नहीं होता है। कई महिलाएं अपने ब्रेस्ट में ग
नपुसंकता अब सामान्य हो चली है । तनाव या डिप्रैशन के होना इसकी प्रमुख जड़ है ।बार-बार हो रही बीमारिया

COMMENTS