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मंकीपॉक्स के मरीजों को लेकर विशेषज्ञों का बढ़ा सिरदर्द, नए-नए लक्षणों ने बढ़ाई चुनौती

कई मरीजों में तो बुखार, दर्द और कमजोरी जैसा कोई लक्षण ही नहीं दिखा। यहां तक उन्हें संक्रमित होने का बारे में भी नहीं पता क्योंकि न तो वह किसी घाव वाले व्यक्ति के संपर्क में आए थे और न ही किसी से शारीरिक संबंध बनाया था।

श्वेता सिंह
August 29 2022 Updated: August 29 2022 22:46
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मंकीपॉक्स के मरीजों को लेकर विशेषज्ञों का बढ़ा सिरदर्द, नए-नए लक्षणों ने बढ़ाई चुनौती प्रतीकात्मक चित्र

वाशिंगटन। भारत सहित दुनिया के ज्यादातर देशों में मंकीपॉक्स का संक्रमण पिछले कुछ महीनों से जारी है। कोरोना की करीब ढाई साल से अधिक समय से जारी महामारी के बीच मंकीपॉक्स के मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ाने वाले थे। हालांकि संक्रमण की रफ्तार में अब थोड़ी कमी आती देखी जा रही है। दुनियाभर में मिले 47 हजार मरीजों में अलग-अलग तरह के संक्रमण ने विशेषज्ञों का  सिरदर्द बढ़ा दिया है।

 

अमेरिका और यूरोप (US and Europe) में क्लीनिकों पर पहुंचे कई संक्रमितों में परंपरागत लक्षणों के उलट मच्छर के काटने का निशान, मुंहासे नजर आए तो कुछ के शरीर पर स्पष्ट घाव न होने के बावजूद उन्हें निगलने और मल-मूत्र त्यागने में बहुत तेज दर्ज हो रहा था। इसके अलावा आंखों में संक्रमण या हृदय की मांसपेशियों में सूजन, कुछ संक्रमितों में सिरदर्द, अवसाद, भ्रम और सीजर जैसी तकलीफें भी उभरी हैं।

 

कई मरीजों में तो बुखार, दर्द और कमजोरी जैसा कोई लक्षण (symptoms) ही नहीं दिखा। यहां तक उन्हें संक्रमित होने का बारे में भी नहीं पता क्योंकि न तो वह किसी घाव वाले व्यक्ति के संपर्क में आए थे और न ही किसी से शारीरिक संबंध बनाया था। मंकीपॉक्स (Monkeypox) के पुराने लक्षणों के एकदम उलट इन नई परिस्थितियों ने विशेषज्ञों के सामने बड़ी चुनौती पैदा कर दी है।

 

मंकीपॉक्स (Monkeypox) पर ताजा रिपोर्ट लिखने वाले डॉ अबरार करन ने कैलिफोर्निया (California) के कुछ मरीजों का हवाला देते हुए कहा है कि उनके गले में वायरस पाया गया पर उन्हें कोई भी श्वसन संबंधी तकलीफ नहीं थी। उनका कहना है यह वायरस का प्रसार भी लक्षण रहित लोगों के जरिए हो सकता है। अब वैज्ञानिक मानने लगे हैं कि मंकीपॉक्स वायरस संक्रमित के ठीक होने के कई हफ्तों के बाद भी लार, सीमन और अन्य शारीरिक तरल में मौजूद रहता है। लेकिन कई विशेषज्ञ इस बात पर कायम हैं कि इस बीमारी का संक्रमण यौन संबंधों से होता है।

 

Edited by Shweta Singh

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