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अलीगढ़ (लखनऊ ब्यूरो)। 21वीं सदी में मेडिकल साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है। किसी भी बीमारी का इलाज अब आसानी से किया जा सकता है। एएमयू के हकीम अजमल खान तिब्बिया कॉलेज में लीच थेरेपी से इलाज के साथ जोंक की पैदावार भी होगी। अधिक पैदावार होने पर उसे जोंक थेरेपी करने वाले अन्य चिकित्सकों को बेचा जाएगा। तिब्बिया कॉलेज इस पुरातन उपचार के तरीके को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए तिब्बिया कॉलेज में 15 गुणा 15 फुट के आकार का तालाब बनाया गया है, जिसमें 150 जोंकें डाली गई हैं।
जोंक थेरेपी (leech therapy) से शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस थेरेपी को 30-40 मिनट तक लिया जाता है। जोंक की लार गैंगरीन सहित अन्य बीमारियों (diseases) के लिए फायदेमंद है। इसकी लार में एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व (anti inflammatory agent) पाए जाते हैं, जो सूजन को कम करने में मददगार होता है। इसके अलावा जोंक शरीर के हानिकारक कीटाणुओं (germs) को चूसकर खत्म कर देती है। एक जोंक की औसत उम्र 4 से 5 साल होती है। एक जोंक 40-50 अंडे देती है। इनके प्रजनन का मुफीद समय मार्च और मई होता है।
जोंक थेरेपी के फायदे - Benefits of leech therapy







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