












































प्रतीकात्मक
गोरखपुर। कोरोना के केस भले कम हो गए हों लेकिन संक्रमण का असर लोगों को तरह-तरह की बीमारियां दे रहा है। यह शरीर के कई अंगों को अपनी चपेट में ले रहा है। दिल, दिमाग, आंख के अलावा कान पर भी असर कर रहा है। इसके कारण कान की बीमारी हो रही है। सुनने की क्षमता कम हो रही है। कान में दर्द, भारीपन, सनसनाहट, घंटी या सीटी बजने जैसी आवाज महसूस हो रही है। वायरल फीवर से जूझ रहे मरीजों में भी यह बीमारी नजर आ रही है। अस्पतालों के नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ के पास बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं।
नसों पर वार कर रहा है वायरस
नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष शंकर रे बताते हैं कि यह दिक्कत वायरल इंफेक्शन की वजह से होती है। कोरोना भी वायरस है। सामान्य वायरल फीवर में भी वायरस का ही इंफेक्शन होता है। इन दोनों तरह के मामलों में मरीजों में सेंसेरी न्यूरल हियरिंग लॉस के मामले बढ़ रहे हैं। बड़ी संख्या में इसके मरीज आ रहे हैं।
60 फीसदी खुद हो जाते हैं ठीक
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अर्पित श्रीवास्तव ने बताया कि यह कोरोना या सामान्य वायरस न्यूरोपैथी क्रिएट करता है। इसके संक्रमण से कान की नसों को नुकसान होता है। 60 फीसदी मामलों में यह बीमारी स्वत: ठीक हो जाती है। 40 फीसदी को इलाज की जरूरत पड़ती है। इनमें से 20 फीसदी में इस बीमारी का व्यापक असर पड़ता है। ऐसे मरीजों को सुनाई देना कम हो जाता है
कोरोना तो ठीक हो गया अब कान में सीटी बजा रहा वायरस? गोरखपुर। कोरोना के केस भले कम हो गए हों लेकिन संक्रमण का असर लोगों को तरह-तरह की बीमारियां दे रहा है। यह शरीर के कई अंगों को अपनी चपेट में ले रहा है। दिल, दिमाग, आंख के अलावा कान पर भी असर कर रहा है। इसके कारण कान की बीमारी हो रही है। सुनने की क्षमता कम हो रही है। कान में दर्द, भारीपन, सनसनाहट, घंटी या सीटी बजने जैसी आवाज महसूस हो रही है। वायरल फीवर से जूझ रहे मरीजों में भी यह बीमारी नजर आ रही है। अस्पतालों के नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ के पास बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं।
नसों पर वार कर रहा है वायरस
नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष शंकर रे बताते हैं कि यह दिक्कत वायरल इंफेक्शन की वजह से होती है। कोरोना भी वायरस है। सामान्य वायरल फीवर में भी वायरस का ही इंफेक्शन होता है। इन दोनों तरह के मामलों में मरीजों में सेंसेरी न्यूरल हियरिंग लॉस के मामले बढ़ रहे हैं। बड़ी संख्या में इसके मरीज आ रहे हैं।
60 फीसदी खुद हो जाते हैं ठीक
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अर्पित श्रीवास्तव ने बताया कि यह कोरोना या सामान्य वायरस न्यूरोपैथी क्रिएट करता है। इसके संक्रमण से कान की नसों को नुकसान होता है। 60 फीसदी मामलों में यह बीमारी स्वत: ठीक हो जाती है। 40 फीसदी को इलाज की जरूरत पड़ती है। इनमें से 20 फीसदी में इस बीमारी का व्यापक असर पड़ता है। ऐसे मरीजों को सुनाई देना कम हो जाता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ. आदित्य पाठक के मुताबिक इसे टीनीटस कहते हैं। मरीज कान में सनसनाहट, आवाज सुनाई देने, सीटी या घंटी बजने, कान में भारीपन जैसी शिकायत लेकर ओपीडी में आ रहे हैं। इनकी जांच की जा रही है। इन मरीजों में वायरस के संक्रमण के कारण कान की नस सूखती हुई मिलती है।
डॉक्टर से करें तत्काल संपर्क
डॉ. संतोष शंकर रे कहते हैं कि समय से इलाज मिलने पर यह बीमारी काफी हद तक ठीक हो सकती है। इस मामले में मरीज को लापरवाही नहीं करनी चाहिए। आमतौर पर मरीज कान की सनसनाहट या भारीपन को नजरअंदाज करते हैं। यह लापरवाही उन्हें उम्रभर की बीमारी दे सकती है। लक्षण होने पर नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।







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