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बढ़ती आबादी और बढ़ती उम्र दृष्टि दोष का सबसे बड़ा कारण।

कम दृष्टि के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मधुमेह, आंखों में चोट लग जाना, उम्र के साथ आंखे कमजोर होना. कॉर्निया और ट्रेकोमा आदि रोग शामिल हैं।

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October 20 2021 Updated: October 20 2021 21:17
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बढ़ती आबादी और बढ़ती उम्र दृष्टि दोष का सबसे बड़ा कारण। प्रतीकात्मक

आंख की बीमारी आज के दौर में एक सामान्य समस्या बन गई है। WHO की एक रिपोर्ट की मानें तो विश्व भर में कम से कम 2.2 अरब लोगों को निकट या दूर का दृष्टि दोष है। इनमें से कम से कम आधे मामलों में दृष्टि हानि को रोका जा सकता था पर अभी तक इसका समाधान नहीं हो पाया है। लोगों में जानकारी का अभाव इस समस्या का मूल कारण हैं। दृष्टिबाधित लोग ज्यादातर 50 वर्ष से अधिक आयु के हैं परंतु आजकल दृष्टि हानि सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है।

आखें कमजोर होने का मूल कारण
विश्व की बढ़ती आबादी और बढ़ती उम्र दृष्टि दोष का सबसे बड़ा कारण है। आंखों की रोशनी कम होने के पीछे Genetic वजह भी हो सकती है। कम दृष्टि के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मधुमेह, आंखों में चोट लग जाना, उम्र के साथ आंखे कमजोर होना. कॉर्निया और ट्रेकोमा आदि रोग शामिल हैं। कभी-कभी किसी बीमारी से जुड़ा लक्षण भी हो सकता है। आजकल बच्चों में भी दृष्टि हानि के कारण विभिन्न देशों में काफी अलग अलग होते हैं। उदाहरण के लिए कम आय वाले देशों में जन्मजात मोतियाबिंद एक मुख्य कारण है। जबकि मध्यम आय वाले देशों में रेटिनोपैथी होने की अधिक संभावना है।

ये है इस बीमारी का मूल लक्षण 
आंखों की रोशनी कम होने का सबसे बड़ा लक्षण है धुंधला दिखना। लोगों की नजरें जब कमजोर होती है तो धीरे-धीरे धुंधला दिखना शुरू होता है। जिस बात का पता आसानी से नहीं लग पाता तो ये जरूरी है कि हम आंखों की दृष्टि पर रोजाना नजर रखें कि नजरें कब कमजोर हो रही है। एक्सपर्ट्स की मानें तो उनका कहना है कि आंखों में धुंधलेपन की समस्या को अगर समय रहते ही पहचान लिया जाए तो आधी समस्या का निपटारा उसी वक्त हो जाता है। इसलिए डॉक्टर्स का ये भी मानना है कि हर 6 महीने में आंखों का चेकअप करवाते रहना चाहिए।

कोरोना काल में आंखों के मरीज बढ़े
एक रिपोर्ट ये भी सामने आई है कि कोरोना काल में आंखों की समस्या के मरीजों में बढ़ोतरी हुई है। इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है लोगों का घर बैठकर ऑफिस का लगातार काम करना। लोगों का ये भी मानना है कि लॉकडाउन में वर्किग घंटों से ज्यादा काम लोगों ने घर बैठकर किया है।

आंखों को तंदरुस्त रखने के आसान तरीके
सुबह सूर्योदय से पहले उठें, उठने के बाद मुंह में पानी भरें और आखों में छींटे मारे ऐसा रोजाना करने से आंखों में ताजगी रहेगी। आंखों को ठंडे पानी से ही धोएं, गर्म पानी का इस्तेमाल ना करें। कम रौशनी में फोन ना चलाएं, तेज धूप में चमकती हुई चीजें ना देखें, कम रौशनी में काम करने से बचें। धूम्रपान करने से भी आंखों को नुकसान होता है। आंखों के लिए कई विटामिन की जरूरत होती है। इसलिए डाइट में हरे पत्तेदार सब्जियां,मछली आदि को शामिल करें।

एस्सिलोरलक्ज़ोटिका नाम की एक लेंस कंपनी लगातार बच्चों की स्वस्थ आंखों को लेकर कई अभियान चला रही है। इसका मानना है कि अगर आंखों की सेहत को लेकर समय रहते काम नहीं किया गया तो 2050 तक 50 प्रतिशत आबादी मायोपिया से पीड़ित हो जाएगी।

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