











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। मूत्र असंयम या मूत्राशय पर काबू रखने में परेशानी होना एक आम और अक्सर शर्मनाक महसूस करने वाली समस्या है। सर्दियों के दौरान महिलाओं को इससे पीड़ित होने का ज्यादा खतरा होता है। लखनऊ के रीजेंसी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने नोट किया है कि मूत्रमार्ग की छोटी लंबाई, इसकी अतिसक्रियता और योनि के बढ़ने के कारण महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। 50 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं को इस स्थिति का अनुभव होने की ज्यादा संभावना होती है। सर्दियों के महीनों में लोग अक्सर पानी पीना कम देतें हैं। डीहाइड्रेशन के कारण मूत्र ज्यादा गाढ़ा हो जाता है, जो मूत्राशय में समस्या पैदा कर सकता है और इससे कब्ज भी हो सकती है।
रीजेंसी सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के यूरोलॉजी कंसल्टेंट डॉ सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि डाइट में बदलाव और वजन को सही रखने से इस समस्या से निजात पाई जाती है। उन्होंने कहा, यूआई तब होता है जब न चाहते हुए भी मूत्र का रिसाव होने लगता है। इसका मतलब है कि मूत्र को रोकने वाले यंत्र पर नियंत्रण नहीं रह पाता है। मूत्राशय और मूत्रमार्ग में बाहरी पेशीय समर्थन होता है, जो अक्सर कई गर्भधारण, लंबे समय तक मेहनत और जटिल प्रसव के कारण कमजोर हो जाता है। इसलिए हम प्रसवपूर्व महिलाओं को पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज कराने की सलाह देते हैं। मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए भी यही सलाह दी जाती है।
हमारे हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने नोट किया है कि 50 से ज्यादा उम्र की महिलाओं में यह समस्या होना ज्यादा आम है। हमारे हॉस्पिटल में हर साल सर्दियों में कई यूआई यूरीन इंकॉन्टिनें केसेस देखे जाते हैं, जिनमें से ज्यादातर 50 से ज्यादा उम्र की पोस्टमेनोपॉज़ल महिलाएं होती हैं। कुछ केसेस में सर्दी के कारण छींकने और खांसने से भी रिसाव हो सकता है, यह आमतौर पर कमजोर पेल्विक फ्लोर के कारण होता है।
प्रारंभिक अवस्था में मूत्र असंयम के इलाज के लिए कीगल एक्सरसाइज करके पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों की एक्सरसाइज करना उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा डॉक्टर ब्लैडर ट्रेनिंग की भी सलाह देते हैं, यानी मूत्र को रोकने या जारी करने की कोशिश करना । मूत्राशय पर पर काबू न पाना या यूआई की समस्या किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है। यूआई के कुछ सामान्य लक्षण रात के दौरान कई बार पेशाब रोकने और पेशाब करने में असमर्थता होना शामिल हैं। इस समस्या का इलाज घर पर बिना सर्जरी के प्राकृतिक रूप से किया जा सकता है। विटामिन डी का कम लेवल भी यूआई की समस्या को जन्म दे सकता है। फैटी मछली, पनीर, अंडे की जर्दी, मशरूम, डेयरी उत्पाद, और अनाज जैसे खाद्य पदार्थ पर्याप्त विटामिन डी हासिल करने में मदद कर सकते हैं।मैग्नीशियम के सेवन की भी सलाह दी जाती है क्योंकि यह मांसपेशियों और तंत्रिका कार्यों में मदद करता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, नट, बीज, फलियां, और समुद्री भोजन का भी सेवन इस समस्या से निजात पाने के लिए किया जासकता है ।
रीजेंसी सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के यूरोलाजी –एम सीएच, डॉ राजीव कुमार ने कहा, मेडिकल और सर्जिकल इलाज इस समस्या से निजात दिला सकते है लेकिन लाइफस्टाइल में बदलाव से भी इस समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिल सकती हैं। मरीजों को पहले परंपरागत इलाज या घरेलू इलाज का प्रयास करना चाहिए क्योंकि इन तरीको में दवा या सर्जरी नहीं करनी होती है। हालांकि कई केसेस में मूत्राशय को सामान्य काम पर वापस आने के लिए दवाएं बहुत अच्छी तरह से काम कर सकती हैं। इस समस्या के लिए सर्जरी अंतिम विकल्प होना चाहिए। जिन लोगों को यह समस्या है उन्हें अपने कैफीन और शराब का सेवन रोकना चाहिए क्योंकि इन दोनों के सेवन से मूत्राशय में जलन पैदा हो सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात हाइड्रेटेड रहें और सर्दियों के दौरान कम से कम दो लीटर पानी पीने का लक्ष्य रखें।"







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