











































प्रतीकात्मक
लखनऊ। हाल ही में चीन से आएं आंकड़ों ने भारतीय स्वास्थ्य विभाग को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि लगभग एक जैसे पड़ोसी देशों में औसत आयु का इतना बड़ा अंतर कैसे हो सकता है। यह अंतर 8.2 वर्षों का है।
पिछले दिनों नेशनल हेल्थ कमीशन, चायना (National Health Commission, China) ने नागरिकों की औसत आयु का ब्यौरा देते हुए बताया कि चीनी नागरिकों की औसत आयु बढ़ कर 77.9 वर्ष हो गई है। जबकि हाल ही में आई भारतीय सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (Indian Sample Registration System) की रिपोर्ट में भारतीय की औसत आयु 69.7 वर्ष बताई गई थी। तो इस प्रकार चीनी नागरिक भारतीय नागरिकों से 8 साल 2 महीने ज्यादा जीते हैं (Difference in mean age of China and India)।
1949 में चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का शासन आरम्भ हुआ था तब वहां की औसत आयु 35 वर्ष थी और वहीं आजादी के समय भारत की औसत आयु 32 वर्ष थी। यानि भारत से लगभग 10 साल बाद चीन ने स्वास्थ्य सुधार शुरू किया जो आज भारत से कहीं आगे निकल गया है (average age of China higher than that of India)।
स्वास्थ्य सेवाओं में चीन निकला आगे
चीनी नेशनल हेल्थ कमीशन ने बताया कि नागरिक व्यायाम खूब करते हैं और प्रतिव्यक्ति 2.5 वर्ग मीटर एक्सरसाइज एरिया चीन के पास है। चीनी नागरिकों में स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा जागरुकता है। वे अच्छे- संतुलित भोजन के साथ व्यायाम करते हैं और दिमागी सेहत का भी ध्यान रखते हैं। चीनी नागरिकों में स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ कर 25.4% हो गई है जिससे शुगर, डायबिटीज, हार्ट और मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों पर नियन्त्रण पाया गया है। कमीशन ने बताया कि 2025 तक चायना औसत आयु को 78.3 वर्ष तक बढ़ा लेगा।
औसत आयु बढ़ाने के लिए चीन ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में भी बड़े पैमाने पर सुधार किए हैं। यहां प्रति 10 हजार की जनसंख्या पर 22 से अधिक चिकित्सक तैनात हैं। 2025 तक नर्सिंग होम्स में वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1 करोड़ बिस्तर तैयार हो जाएंगे और 95% तक का स्वास्थ्य बीमा भी करवा दिया जाएगा।
अब अगर भारत की बात करें तो यहां जनसंख्या (population) के सापेक्ष चिकित्सक (doctors) to the नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि देश में प्रति 10 हजार की जनसंख्या पर 11.7 चिकित्सक ही है। इसके अलावा देश में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की भी काफी कमी है और यहां नागरिकों में स्वास्थ्य सम्बन्धी जागरूकता (health awareness) का भी काफी अभाव है। अब देखने वाली बात यह होगी कि भारत से 10 साल पीछे चला चीन इतना आगे कैसे पहुंच गया और हम कब तक चीन की बराबरी कर पाएंगे।







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